मूत्र से अलग किया पीने का पानी और यूरिया | विज्ञान | DW | 29.07.2016
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विज्ञान

मूत्र से अलग किया पीने का पानी और यूरिया

बेल्जियम के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मशीन बना ली है जो मानव-मूत्र को पेयजल में बदल सकती है. इस प्रक्रिया में उर्वरक भी बनते हैं जो कि विकासशील देशों के लिए बहुत उपयोगी होगी.

गंदे पानी को साफ करने के कितने ही तरीके आज तक विकसित किए जा चुके हैं. लेकिन एक बेल्जियन यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों के दल ने सौर ऊर्जा और एक खास तरह की झिल्ली के इस्तेमाल से बेहद किफायती और उपयोगी मशीन बनाई है. यूनिवर्सिटी ऑफ गेंट में लगाई गई इस मशीन के नतीजे उत्साहजनक हैं. इन्हें दुनिया भर के ग्रामीण इलाकों में या ऐसी जगहों पर भी लगाया जा सकेगा जहां बिजली की समस्या है.

यूनिवर्सिटी ऑफ गेंट में रिसर्चर सेबास्टियन डेरेसे ने बताया, "हमने एक सरल से तरीके और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर मूत्र से उर्वरक और पीने का पानी अलग किया." मूत्र को एक बड़े टैंक में इकट्ठा किया जाता है, फिर सोलर पावर से चलने वाले बॉयलर में उबाला जाता है. इसके बाद पूरे द्रव को खास झिल्ली से गुजरा जाता है, जहां से पोटैशियम, नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व और पानी अलग कर लिए जाते हैं.

सेहत के कई सुराग मूत्र की जांच में मिलते हैं. मूत्र का रंग, गंध और उसकी प्रक्रिया इस बात के कई सुराग देती है कि शरीर में क्या हो रहा है.

#peeforscience के नारे के साथ इस टीम ने सेंट्रल गेंट में आयोजित हुए 10 दिन के संगीत और थियेटर कार्यक्रम में इस तकनीक को टेस्ट किया. यहां से इकट्ठा हुए लोगों के मूत्र से 1,000 लीटर पानी बनाया गया.

भविष्य में खेल के आयोजनों और हवाईअड्डों में इन मशीनों के बड़े संस्करण लगाए जाने की योजना है. इसके अलावा विकासशील देशों और दुनिया भर के ग्रामीण इलाकों में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा, जहां पीने का साफ पानी नहीं मिलता. फिलहाल बेल्जियम में तो इस पानी से यहां की मशहूर बीयर बनाई जा रही है. रिसर्चर डेरेसे इसे "सीवर से ब्रूअर तक" का सफर कहते हैं.

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