याहू मेसेंजर के जाने पर रो पड़े ये व्यापारी | दुनिया | DW | 05.08.2016
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दुनिया

याहू मेसेंजर के जाने पर रो पड़े ये व्यापारी

अब तो इतने सारे मेसेंजर हैं. तो याहू के बंद होने से किसी को क्या फर्क पड़ेगा? देखिए, कुछ लोग रो रहे हैं. उनके लिए तो जिंदगी ही बदल गई है.

बीता शुक्रवार यूरोप और अमेरिका के ऑयल ट्रेडर्स के लिए एक नए युग की शुरुआत सरीखा था. 1990 के बाद से वे लोग जिस तरह काम करते आ रहे थे, एक झटके में वह तरीका बदल गया. याहू मेसेंजर बंद हो गया. कंपनी ने ऐलान किया कि अपना एकमात्र मेसेंजर सॉफ्टवेयर भी 5 अगस्त से बंद कर देगी. ऐसा नहीं है कि याहू मेसेंजर की जगह लेने वाला कोई नहीं है. बल्कि अब तो विकल्पों की पूरी एक कतार लगी है. लेकिन जिस शेयर बाजार में दलालों को भावनाओं के बजाय पैसे से चलने वाले खिलाड़ी माना जाता है, वहां याहू मेसेंजर को लेकर बहुत से लोग जज्बाती हो रहे हैं.

सिंगापुर में एक वरिष्ठ ट्रेडर ने कहा, "आपको अंदाजा भी नहीं है कि मैं याहू मेसेंजर को कितना याद करूंगा. पिछले एक दशक में इसके जरिए मैंने सैकड़ों संपर्क बनाए हैं. मेरे ऐसे ऐसे याहू फ्रेंड्स हैं जिनसे मैं कभी नहीं मिला लेकिन मैंने उनके साथ घंटों बिताए हैं. और इससे मैंने पैसा भी खूब कमाया है. अब जबकि यह चला गया है तो मुझे रोना आ रहा है."

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समस्या यह है कि याहू मेसेंजर सारे दलालों के बीच एक साझी चीज थी. सब लोग एक ही जैसा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहे थे. लेकिन अब सब बंट गए हैं. सबकी अपनी अपनी पसंद हो गई है. कभी फ्रेट इनवेस्टर सर्विसेज में काम करने वाले मैट स्टेनली कहते हैं, "याहू एक बढ़िया जगह थी जहां सब लोग मिल लेते थे. अब एक प्लैटफॉर्म से अलग-अलग प्लैटफॉर्म पर जाना होगा. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि अब लोग अपने पुराने दोस्त का इस्तेमाल करेंगे यानी फोन का. मतलब आप कह सकते हैं कि यह भले ही विडंबना हो लेकिन अब पुराने तरीकों से ज्यादा गहरे रिश्ते बन सकेंगे."

याहू ने जुलाई में ऐलान किया था कि वह अपनी यूनिट वेरिजोन कम्यूनिकेशंस इंक को बेच रही है. इस यूनिट ने ही 1990 के दशक में ऑयल ट्रेडर्स की दुनिया को हिला दिया था. लेकिन पिछले कुछ समय से लोग दिक्कतें महसूस कर रहे थे. इस मेसेजिंग सॉफ्टवेयर में आधुनिक ऐप्स के मुकाबले कम फीचर्स कम हैं. मसलन इसमें बातचीत को सेव नहीं किया जा सकता था. इसलिए दुकानदार, दलाल, व्यापारी, विश्लेषक और पत्रकार सभी अब कोई विकल्प खोजने लगे थे. और अब तो विकल्पों की कमी नहीं है. इकॉन मेसेंजर, आइस इंस्टेंट मेसेंजर, सिंफनी, ब्लूमबर्ग मेसेंजर, ट्विटर और वट्सऐप भी. इसलिए याहू को जाना ही था.

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यह एक दिलचस्प अध्ययन रहा कि अलग-अलग उद्योग के लोग अलग-अलग मेसेजिंग सर्विस इस्तेमाल करते हैं. जैसे एक स्टडी में पता चला कि पावर, नेचुरल गैस और कोल इंडस्ट्री में इकॉन का बोलबाला है जबकि सिंफनी बैंकिंग सेक्टर को जम रहा है. ऑयल सेक्टर आइस का इंस्टेंट मेसेंजर काम कर रहा है.

एक एशियाई ऑयल ब्रेकर के मुताबिक, "ऐसा तो है नहीं कि दुनिया खत्म हो रही है. लेकिन हां, याहू के साथ अच्छी बात यह थी कि हर कोई इसे प्रयोग करता था. अब हमारे पास बहुत सारे प्लैटफॉर्म हैं और यह एक परेशानी भी है."

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