नए मिले ग्रह ने झुठलाई अब तक की सारी समझ | विज्ञान | DW | 09.12.2021

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विज्ञान

नए मिले ग्रह ने झुठलाई अब तक की सारी समझ

स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नया ग्रह खोजा है. बाहरी अंतरिक्ष में मिले इस ग्रह का आकार इतना बड़ा है कि हमारे वैज्ञानिकों की सारी कल्पनाएं छोटी पड़ गई हैं.

वैज्ञानिकों को एक ग्रह मिला है जो सूर्य से दस गुना बड़े दो जुड़वां सितारों की परिक्रमा करता है. यह ग्रह हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से 11 गुना बड़ा है और इसकी कक्षा सौ गुना ज्यादा चौड़ी है. इस खोज ने वैज्ञानिकों के वे सारे अनुमान झुठला दिए हैं जो अब तक उन्होंने बाहरी अंतरिक्ष में मौजूद तारों और ग्रहों के आकार को लेकर लगा थे.

पृथ्वी से लगभग 325 प्रकाश वर्ष दूर यह ग्रह बृहस्पति की ही तरह एक गैसीय पिंड है लेकिन भार में यह गुरु से 11 गुना बड़ा है. यह बाह्य अंतरिक्ष में पाए जाने वाले ग्रहों की उस श्रेणी में आता है जिसे ‘सुपर जुपिटर' कहा जाता है. यानी वे खगोलीय पिंड जो हमारे सौर मंडल के सबसे बड़ी पिंड से भी बड़े हैं.

छोटी पड़तीं कल्पनाएं

यह ग्रह दो जुड़वां सितारों का चक्कर लगाता है. इसके चक्कर का घेरा जितना बड़ा है वो अब तक पहले कभी नहीं देखा गया. पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा जितने बड़े घेरे में करती है, इस ग्रह का घेरा उससे 560 गुना ज्यादा चौड़ा है.

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अब तक ऐसा कोई ग्रह नहीं मिला था जो सूर्य के भार से तीन गुना से ज्यादा बड़े सितारों का चक्कर लगाता हो. अब तक वैज्ञानिक यह मानते आए थे कि सूर्य से तीन गुना बड़ा कोई तारा होगा तो उसकी विकिरणें इतनी तेज होंगी कि किसी भी ग्रह को जला देंगी और चक्कर लगाने ही नहीं देंगी. इस ग्रह ने उस समझ को झुठला दिया है.

स्वीडन की स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के खगोलविद मार्कुस यानसन के नेतृत्व में हुई यह खोज ‘नेचर' पत्रिका में प्रकाशित हुई है. मार्कुस बताते हैं, "ग्रह संरचना एक बेहद विविद प्रक्रिया लगती है. यह हमारी अब तक की कल्पनाओं से कई गुना अधिक है. और भविष्य में भी हमारी कल्पनाएं छोटी पड़ती रहेंगी.”

तरह तरह के सौरमंडल

1990 के दशक में हमारे सौर मंडल के बाहर पहले ग्रह की खोज हुई थी. ऐसे ग्रहों को बाह्यग्रह (एक्सोप्लेनेट) कहा गया था. वैज्ञानिक तभी से इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जैसे हमारे सौरमंडल में कुछ ग्रह एक तारे का चक्कर लगाते हैं, क्या अन्य सौरमंडलों में भी ऐसा ही होता है.

इस खोज में शामिल एक वैज्ञानिक भारतीय मूल की गायत्री विश्वनाथ हैं. स्टॉकहोम यूनिवर्सटी में पीएचडी कर रहीं विश्वनाथ कहती हैं, "अब तक जो चलन दिखे हैं, हमारा सौरमंडल सबसे आम ग्रह व्यवस्था नहीं है. मसलन कथित ‘जलते बृहस्पतियों वाले' ऐसे सौरमंडल भी हैं जहां बृहस्पति के आकार के ग्रह अपने तारों के बहुत नजदीक जाकर परिक्रमा करते हैं. ज्यादातर ग्रह जो खोजे गए हैं, उनका आकार पृथ्वी और नेपच्यून के बीच का है. हमारे सौरमंडल में इस आकार का कोई ग्रह नहीं है.”

वीके/एए (रॉयटर्स)

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