ब्रेस्ट कैंसर का सटीक पता लगा लेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस | विज्ञान | DW | 03.01.2020
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विज्ञान

ब्रेस्ट कैंसर का सटीक पता लगा लेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

स्तन कैंसर का पता विशेषज्ञ लगा पाएं या ना लगा पाएं लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसका पता बेहद शुरुआती लक्षणों के आधार पर ही लगा सकती है.

ब्रेस्ट कैंसर का खतरा वक्त के साथ तेजी से बढ़ता जा रहा है. विश्वभर में शोधकर्ता ब्रेस्ट कैंसर का इलाज ढूंढने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. नए रिसर्च से शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस वैश्विक बीमारी के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता हासिल हो सकती है. ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसरों में सबसे आम है, पिछले साल ही बीस लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था.

ब्रिटेन में 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को हर तीन साल में मैमोग्राम कराने की सलाह दी जाती है, जिसके परिणामों का विश्लेषण दो स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है. लेकिन इंसानों द्वारा जांच में गलती की गुंजाइश रह जाती है और मैमोग्राम के गलत नतीजे देने से सही इलाज कर पाना मुश्किल हो जाता है. अब गूगल हेल्थ के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ऐसा मॉडल तैयार किया है जो ब्रेस्ट कैंसर का पता शुरुआती लक्षणों के आधार पर ही लगा लेगा.

इसके लिए शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन और अमेरिका में हजारों महिलाओं की जांच की. इसके लिए डॉक्टरों ने एक्स-रे इमेज की समीक्षा की. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल में मरीज की बीमारी के इतिहास के बारे में जानकारी फीड नहीं की गई थी. शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि उनके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ने विशेषज्ञ रेडियोग्राफर्स के मुकाबले ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को आसानी से पहचान लिया. इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ने उन मामलों के अनुपात में कमी दिखाई जहां कैंसर की गलत पहचान की गई थी. डॉक्टर 9.4 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर के मामले नहीं पहचान पाए लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल की जांच के बाद यह आंकड़ा 2.7 फीसदी ही रह गया.

शोधकर्ताओं ने अमेरिका और ब्रिटेन में मरीजों की पड़ताल की और यह नतीजे पाए. ब्रिटेन स्थित गूगल हेल्थ के डोमेनिक किंग के मुताबिक, "आप जितनी जल्दी ब्रेस्ट कैंसर की पहचान कर लेंगे मरीज के लिए उतना ही अच्छा होगा. हम इस तकनीक के बारे में इस तरह से सोचते हैं कि यह विशेषज्ञों को और सक्षम बनाती है, मरीज की जांच के बाद जो भी नतीजे आएं उनसे बीमारी के इलाज के लिए बेहतर परिणाम पाए जा सकते हैं."

गूगल हेल्थ की टीम ने कंप्यूटर द्वारा दिए नतीजों के साथ प्रयोग भी किया, उन्होंने विशेषज्ञों द्वारा जांच की गई स्कैन रिपोर्ट की तुलना कंप्यूटर द्वारा दिए गए नतीजों से भी की. शोधकर्ताओं की यह रिसर्च 'नेचर' पत्रिका में छपी है. टीम का कहना है इस विषय पर आगे भी शोध की जरूरत है और उन्हें उम्मीद है कि एक इस तकनीक की मदद ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए दूसरी राय के तौर पर ली जा सकती है.

एए/ओएसजे (एएफपी)

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