भारत के बाद अब अमेरिका भी बैन करेगा चीनी ऐप | दुनिया | DW | 07.07.2020
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दुनिया

भारत के बाद अब अमेरिका भी बैन करेगा चीनी ऐप

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पेयो ने कहा है कि अमेरिका टिक टॉक समेत अन्य कई चीनी सोशल मीडिया ऐप पर प्रतिबंध लगाने के बारे में विचार कर रहा है.

भारत की ही तरह अमेरिका का भी कहना है कि चीन सोशल मीडिया ऐप का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों के डाटा को चोरी करने के लिए कर रहा है. सोमवार को जब अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज पर विदेश मंत्री माइक पॉम्पेयो से पूछा गया कि क्या अमेरिकी प्रशासन भी चीनी ऐप और खास कर टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचेगा, तो उनका जवाब था, "हम इसे बहुत संजीदगी से ले रहे हैं. हम बेशक इस पर ध्यान दे रहे हैं."

पॉम्पेयो ने कहा कि अमेरिका "लंबे समय से" चीनी तकनीक से जुड़ी समस्याओं पर काम कर रहा है, "जहां तक बात लोगों के सेलफोन पर चीनी ऐप की है, तो मैं आप को सुनिश्चित कर सकता हूं कि अमेरिका इसे भी ठीक कर देगा."

टिक टॉक के बारे में बात करते हुए पॉम्पेयो ने कहा कि अमेरिकी लोगों को चीनी कंपनी के शॉर्ट वीडियो ऐप इस्तेमाल करते वक्त सतर्क रहने की जरूरत है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे लोगों को टिक टॉक डाउनलोड करने की सलाह देंगे, तो उन्होंने कहा, "ऐसा सिर्फ तब ही कीजिए, अगर आप चाहते हैं कि आपकी निजी जानकारी चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के हाथों लगे."

पॉम्पेयो के इस बयान के बाद जब समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने टिक टॉक से प्रतिक्रिया मांगी, तो टिक टॉक ने ईमेल के जरिए बयान जारी कर कहा, "अपने यूजर को एक सुरक्षित ऐप देने से बड़ी हमारी और कोई प्राथमिकता नहीं है. हमने कभी चीनी सरकार को कोई यूजर डाटा नहीं दिया है और ना ही अगर हमसे कभी ऐसा करने को कहा भी जाए, तो हम ऐसा करेंगे."

हांगकांग पर अमेरिका का गुस्सा

इससे पहले पॉम्पेयो हांगकांग के मुद्दे पर चीन की कड़ी आलोचना करते हुए कह चुके हैं कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी हांगकांग को बर्बाद कर रही है. जॉर्ज ऑरवेल की किताब 1984 के प्लॉट से हांगकांग की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, "लोगों के अधिकारों को दबाने वाले नेशनल सिक्यूरिटी लॉ की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि स्थानीय प्रशासन ने ऑरवेल वाले अंदाज में नेशनल सिक्यूरिटी ऑफिस की स्थापना कर दी है, लाइब्रेरियों में से कम्यूनिस्ट पार्टी की आलोचना वाली किताबें हटाना शुरू कर दिया है, राजनीतिक नारों पर प्रतिबंध लगा दिया और स्कूलों पर सेंसरशिप थोपने लगे."

पॉम्पेयो ने कहा कि वे हांगकांग के लोगों के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता पर हो रहे हमले की आलोचना करते हैं, "अब तक हांगकांग फल फूल रहा था क्योंकि वह स्वायत्त था, वहां का कानून स्वतंत्र विचारों को और अभिव्यक्ति की आजादी की इजाजत देता था. लेकिन अब ऐसा नहीं रहा."

नए कानून के तहत चीनी सरकार ने हांगकांग के स्कूलों से कई किताबें हटाई हैं, बहुत सी किताबों की जांच की जा रही है कि कहीं उनमें आजादी की मांग या सरकार की आलोचना करते हुए लेख तो नहीं हैं. हांगकांग की सभी लाइब्रेरी उन किताबों को हटा रही हैं जो लोकतंत्र समर्थकों द्वारा लिखी गई हैं. इस नए कानून के लिए पश्चिमी जगत में चीन की काफी आलोचना हो रही है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने पिछले हफ्ते सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि यह कानून "दुनिया भर में आजादी पसंद लोगों को नामंजूर" होगा.

चीन दुनिया भर में तरह तरह का सामान निर्यात करता है और इंटरनेट की दुनिया में भी उसने अपना सिक्का जमाया हुआ है. लेकिन वह खुद अपने नागरिकों को गूगल, फेसबुक जैसे इंटरनेट प्लेटफॉर्म इस्तेमाल नहीं करने देता. यहां तक कि चीन का मशहूर ऐप टिक टॉक भी चीन में उपलब्ध नहीं है. दुनिया में सबसे ज्यादा इसका डाउनलोड भारत में ही हुआ था. सीमा विवाद के बीच भारत सरकार ने टिक टॉक समेत कुल 59 चीनी ऐप पर डाटा चोरी का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिया है. 

आईबी/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)

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