‘पर्दे तो बर्दाश्त नहीं किए जा सकते’: नए नियमों से परेशान अफगान छात्र | दुनिया | DW | 07.09.2021
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दुनिया

‘पर्दे तो बर्दाश्त नहीं किए जा सकते’: नए नियमों से परेशान अफगान छात्र

काबुल की एक यूनिवर्सिटी की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है जिसमें लड़के और लड़कियों के बीच पर्दा खींच दिया गया है. लड़के-लड़कियों को अलग-अलग पढ़ाने के लिए नए नए तरीके निकाले जा रहे हैं.

काबुल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वालीं 21 साल की अंजीला जब तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार क्लास के लिए पहुंचीं तो हैरान रह गईं. उन्होंने देखा कि उनकी क्लास में बीचोबीच एक पर्दा लगा दिया गया था.

टेलीफोन पर काबुल से बातचीत में उन्होंने कहा, "पर्दे लगाना तो मंजूर नहीं किया जा सकता. मैं जब क्लास के अंदर पहुंची तो मुझे बहुत खराब लगा.”

अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता में आए तीन हफ्ते से ऊपर हो गए. जीवन सतह पर सामान्य नजर आने लगा है. विश्वविद्यालय खुल गए हैं और छात्र कक्षाओं के लिए लौट रहे हैं. लौटने वालों में छात्रों में लड़कियां भी हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर आई कुछ तस्वीरों ने दुनियाभर को न सिर्फ हैरान किया है बल्कि तालीबान के शासन में महिलाओं की सामाजिक स्थिति को लेकर चिंता में भी डाल दिया है.

बंटवारे की तस्वीर

एक ऐसी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है जिसमें यूनिवर्सिटी की एक क्लास में पुरुष और महिला छात्र अलग-अलग बैठे हैं और उनके बीच में एक पर्दा लगा दिया गया है. यह तस्वीर काबुल की एविसेना यूनिवर्सिटी की है.

समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स बताती हैं कि विदेशी ताकतें स्कूलों और विश्वविद्यालयों पर कड़ी नजर रख रही हैं क्योंकि तालिबान के राज में महिला अधिकारों को लेकर चिंता जाहिर की जाती रही है. 1996 से 2001 के बीच जब तालिबान पिछली बार सत्ता में आए थे तब महिलाओं की पढ़ाई और काम करने पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गई थीं.

वैसे, हाल के हफ्तों में तालिबान ने कई बार कहा है कि महिला अधिकारों का सम्मान इस्लामिक कानूनों के दायरे में किया जाएगा. लेकिन असल में इसका अर्थ क्या है, इस बारे में अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है.

देशभर में किया जा रहा है अलग

देश के सबसे बड़े शहरों काबुल, कंधार और हेरात में स्थित विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि महिला छात्रों को कक्षाओं में अलग किया जा रहा है, उन्हें अलग से पढ़ाया जा रहा है और कई जगह तो कैंपस के विशेष हिस्सों से बाहर आने नहीं दिया जा रहा है.

काबुल यूनिवर्सिटी की अंजीला बताती हैं कि तालिबान के शासन से पहले भी लड़के और लड़कियां क्लास में अलग-अलग ही बैठते थे लेकिन यूं कमरों को बांटा नहीं गया था.

देखेंः तालिबान के राज में कैसा है अफगानिस्तान

देश के निजी विश्वविद्यालयों की एसोसिएशन ने कक्षाएं दोबारा शुरू करने के बारे में एक सूचना जारी की है, जिसमें कुछ नियम बताए गए हैं. इनमें लड़कियों के लिए हिजाब पहनना और अलग रास्ते से आना-जाना जैसी बातें हैं.

इस नोटिस में यह बात भी लिखी है कि छात्राओं को पढ़ाने के लिए महिलाओं को काम पर रखा जाना चाहिए और महिलाओं की क्लास या तो अलग लगेगी या फिर छोटी क्लास की सूरत में उन्हें पर्दे से अलग किया जाएगा.

आधिकारिक नियम क्या हैं?

यह तालिबान की आधिकारिक नीति है या नहीं, इस बारे में किसी अधिकारी या यूनिवर्सिटी एसोसिएशन के किसी सदस्य ने कोई टिप्पणी नहीं की है. तालिबान ने पिछले हफ्ते कहा था कि स्कूल शुरू हो जाने चाहिए लेकिन लड़कों और लड़कियों को अलग करना होगा.

तालिबान के एक वरिष्ठ नेता ने रॉयटर्स को बताया कि कक्षाओं को बांटने के लिए पर्दों का इस्तेमाल पूरी तरह स्वीकार्य है और चूंकि अफगानिस्तान के पास संसाधनों की कमी है तो बेहतर यही होगा कि एक ही शिक्षक दोनों तरफ की क्लास को पढ़ाए.

कई शिक्षकों का कहना है कि वे नियमों को लेकर उलझन में हैं क्योंकि तीन हफ्ते से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अब तक अफगानिस्तान में सरकार नहीं बनी है.

तस्वीरों मेंः औरतों के लिए क्या बदला

हेरात यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता पढ़ाने वाले एक प्रोफेसर ने बताया कि उन्होंने अपनी एक घंटे की क्लास को दो हिस्सों में बांट दिया है. आधे घंटे में वह लड़कों को पढ़ाते हैं और फिर लड़कियों को.

उनकी क्लास के लिए 120 छात्रों ने रजिस्टर किया था लेकिन सोमवार को एक चौथाई से भी कम छात्र आए. वह कहते हैं, "छात्र काफी परेशान थे. मैंने उनसे कहा कि आते रहें और पढ़ाई करते रहें. आने वाले दिनों में नई सरकार नए नियम लागू कर देगी.”

वीके/एए (रॉयटर्स)

वीडियो देखें 04:25

तालिबान को ताकत कहां से मिलती है

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