9/11 के आठ साल, बाक़ी हैं जख़्म | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 11.09.2009
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जर्मन चुनाव

9/11 के आठ साल, बाक़ी हैं जख़्म

11 सितम्बर 2001 की सुबह जब न्यूयॉर्क के लोग अपने अपने काम धंधों पर जा रहे थे तो किसने सोचा था कि वह दिन इतिहास का एक नया पन्ना खोल देगा और दुनिया को नए मायने देगा. अमेरिका पर इस आतंकवादी हमले को आठ साल हो गए हैं.

11 सितंबर 2001

11 सितंबर 2001

11 सितंबर 2001 को आतंकवादियों ने विमानों से न्यूयॉर्क के ट्विन टावर को उड़ा दिया. लगभग तीन हज़ार लोग मरे और अरबों की संपत्ति स्वाहा हो गई. अमेरिकी ज़मीन पर हुए इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया था जिसके बाद विश्व स्तर पर आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक बड़ी मुहिम शुरू हुई. यह अलग बात है कि इन आठ सालों में दुनिया में आतंकवाद का ख़तरा उतना ही बना हुआ है.

9/11 घटना की आठवीं बरसी पर इस बार भी न्यूयार्क में कई कार्यक्रम हो रहे हैं. स्वाभाविक है कि हमलों में मारे गए लोगो के परिजनों का जीवन तो हमेशा के लिया बदल गया है. एक बार फिर वे नम आंखों से मारे गए अपने प्रियजनों के नाम वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के पास होने वाले विशेष आयोजन में पढ़ेंगे. इस बार नाम पढ़ने वाले हर व्यक्ति का साथ चुने गए अन्य नागरिक देंगे. यह एक प्रकार से शहर के लोगों की सहानभूति व दुख के समय एकजुट होकर आगे आने की दिलेरी का प्रतीक होगा.

लेकिन क्या 9/11 के घाव भर गए हैं? यह दिन लोगों के लिए क्या मायने रखता है? दीपक दवे घटना के समय अमेरिका में ही थे. वह कहते हैं, "9/11 की घटना बहुत दुखद थी लेकिन उसने हम सब को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की एक नई ताकत दी. मेरी यही प्रार्थना है कि ईश्वर मरने वालों की आत्मा को शांति दे." सड़क पर कॉफ़ी बेचने वाले जॉन को भी वह दिन अच्छी तरह याद है. वह कहते हैं, "मुझे अब भी बहुत दुख होता है. मैं 9/11 को नहीं भूला है. उसकी याद हमेशा दिल में रहती है. ईश्वर उन लोगों के साथ हो जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है."

इस बार अमेरिका में 11 सितंबर के आतंकवादी हमले को सेवा और यादगार दिवस के रूप मे मनाया जा रहा है. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के बगल में एक पार्क में होने वाली स्मृति सभा के दौरान चार बार एक एक मिनट का मौन रखा जाएगा. ठीक उसी यह मौन रखा जाएगा जब हवाई जहाज ट्विन टावर से टकराए और जब इमारतें ढहीं. साथ ही बगल के ऐतिहासिक चर्चों में मरने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए घंटियां बजेंगी.

रिपोर्टः अंबालिका मिश्रा, न्यूयॉर्क

संपादनः ए कुमार

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