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तस्वीर: DW/C. Kapoor
समाज

आग से छिन गए 270 रोहिंग्याओं के घर

आमिर अंसारी
१४ जून २०२१

दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में रोहिंग्या शरणार्थियों के एक शिविर में आग लगने से 56 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं. 2018 में पास के ही एक कैंप में लगी थी तब कई लोग इस शिविर में आ गए थे.

https://www.dw.com/hi/56-shanties-gutted-in-blaze-at-rohingya-refugee-camp-270-residents-homeless/a-57878913

दक्षिणपूर्व दिल्ली के कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन के पास रोहिंग्या शरणार्थियों के एक शिविर में आग लग जाने से 56 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं. आग की वजह से करीब 270 लोग बेघर हो गए हैं. दिल्ली पुलिस उपायुक्त (दक्षिणपूर्व) आर पी मीणा के मुताबिक, "56 झोंपड़ियां जलकर खाक हो गईं, जिनमें करीब 270 रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे थे. अभी यह पता नहीं लग पाया है कि आग क्यों लगी और उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है." हालांकि आग से किसी की मौत नहीं हुई है.

दमकल विभाग को आग की सूचना शनिवार देर रात मिली, जिसके बाद दमकल विभाग की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंची और तड़के तीन बजे तक आग पर काबू पा लिया गया. लेकिन कई परिवार आग की वजह से बेघर हो गए हैं. अग्निशमन विभाग के मुताबिक आग एक घर में शॉर्ट सर्किट या मुख्य लाइन में चिंगारी की वजह से लगी, जिसके बाद सिलेंडर फटने से आग तेजी से फैल गई.

कई परिवारों के पास जरूरी सामान नहीं है और उन्हें एनजीओ की ओर से मदद की जा रही है. अगले दिन पीड़ित परिवार खाक हुईं झुग्गियों से बचे हुए सामान तलाशते नजर आए. महिलाएं और बच्चे पास में ही टेंट में दिन बताने को मजबूर हैं. कुछ गैर-लाभकारी संगठनों ने परिवारों को साबुन, सैनिटरी पैड, चप्पल और अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराई हैं.

कोरोना महामारी में मुसीबत

शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए आग एक नई मुसीबत बनकर टूटी. महामारी की वजह से कई पुरुष सदस्यों के पास काम नहीं है और वे किसी तरह से अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं. कई लोगों ने बताया कि आग के कारण वे जरूरी दस्तावेज और पैसे तक नहीं बचा पाए. उनका कहना है कि उन्होंने सबसे पहले अपनी जान बचाने की कोशिश की.

साल 2018 में इसी शिविर के पास आग लग गई थी. तब कई परिवार नए शिविर में जा बसे थे लेकिन शनिवार की आग ने उन्हें एक बार फिर से बेघर कर दिया है.

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