दिल्ली में एक इमारत में आग से 43 लोगों की मौत | भारत | DW | 08.12.2019
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भारत

दिल्ली में एक इमारत में आग से 43 लोगों की मौत

दिल्ली की रानी झांसी रोड एक इमारत में आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई है. इस फैक्टरी में स्कूली बैग और स्टेशनरी का काम होता था. इसी साल जनवरी में दिल्ली में एक होटल में आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई थी.

रानी झांसी रोड पर स्थित अनाज मंडी की एक फैक्टरी में आगजनी में 43 लोगों की मौत के अलावा इस घटना में 11 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. यह फैक्टरी रिहाइशी इलाके में मौजूद चार मंजिला इमारत में चलाई जा रही थी. घटना में मारे गए लोग यहां काम करने वाले मजदूर थे. इस फैक्टरी में स्कूल बैग और स्टेशनरी बनाने का काम होता है. घटना के बाद से फैक्टरी का मालिक फरार हो गया था जिसे अब हिरासत में ले लिया गया है. आग पर फिलहाल काबू पा लिया गया है. घायलों का इलाज राम मनोहर लोहिया अस्पताल और लेडी हार्डिंग अस्पताल में चल रहा है.

दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर उन्हें अनाज मंडी में एक इमारत में आग की सूचना मिली. सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की दो दर्जन गाड़ियां मौके पर रवाना की गईं. यह फैक्टरी संकरी गलियों में अंदर है. ऐसे में वहां मदद पहुंचने में भी समय लग गया. फैक्टरी के दरवाजे पर बाहर से ताला लगा हुआ था. अंदर फंसे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे. फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने दरवाजा तोड़कर लोगों को बचाने का काम शुरू किया.

दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस हादसे के शिकार अधिकांश लोग दूसरे राज्यों के रहने वाले हैं. आग की प्राथमिक वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है. हालांकि ग्राउंड फ्लोर पर लगे बिजली के मीटर में आग नहीं लगी है. पुलिस के मुताबिक इस फैक्टरी को चलाने के लिए जरूरी एनओसी भी नहीं ली गई थी. ये फैक्टरी पूरी तरह अवैध तरीके से चल रही थी. मरने वालों में अधिकतर लोग 30 साल से कम उम्र के हैं. इनकी पहचान अभी की जा रही है. ज्यादातर मौतें आग के बाद फैले धुएं में दम घुटने से हुई हैं.

आग की घटना के बाद नेताओं का घटनास्थल पर पहुंचना और मुआवजे का ऐलान शुरू हो गया. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घटनास्थल का मुआयना किया. उन्होंने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए. साथ ही मृतकों को दस लाख और घायलों को मुफ्त इलाज और एक लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है. केंद्र सरकार ने मृतकों को दो लाख और गंभीर घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजे का ऐलान किया है. दिल्ली पुलिस ने इस इलाके का ट्रैफिक भी डायवर्ट कर दिया है. आग की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम भी राहत बचाव के लिए वहां पहुंची.

इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत तमाम राजनेताओं ने दुख व्यक्त किया है. हादसे के बाद सरकारी अव्यवस्था भी सामने आई जब कुछ घायलों को एंबुलेंस की जगह प्राइवेट रिक्शा में अस्पताल ले जाया गया. कयास लगाए जा रहे हैं कि ये सब फैक्टरी मजदूर काम के बाद फैक्टरी में एक ही कमरे में सो रहे होंगे. इस वजह से आग लगने पर ये कमरे से निकल नहीं पाए और आग के शिकार हो गए. हादसे के बाद मजदूरों के परिजन अपनों की तलाश में फैक्टरी के पास जमा हो गए.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक संकरी गलियों के बावजूद आग लगने के बाद दिल्ली फायर सर्विस ने तेजी से अपना काम किया. इसी वजह से कुछ मजदूरों की जान बच सकी. दिल्ली फायर सर्विस के फायरमैन राजेश शुक्ला के बारे में दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने ट्वीट किया है कि राजेश शुक्ला ने 11 लोगों की जान बचाई है. शुक्ला खुद इस बचाव कार्य में घायल हो गए. उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

दिल्ली में आग के हादसे नई बात नहीं हैं. 12 फरवरी 2019 को करोलबाग के एक होटल में लगी आग में 17 लोग मारे गए थे. 2018 में दिलशाद गार्डन में एक पटाखा फैक्टरी की आग में 17 लोग मारे गए थे. 2011 में अखिल भारतीय किन्नर समाज के सम्मेलन में लगी आग में 14 लोग मारे गए थे. 1997 में उपहार सिनेमा हॉल में लगी आग में 59 लोगों की जान चली गई थी.

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