30 साल पुराने मामले में जेनेटिक वंशावली बनेगी सबूत | विज्ञान | DW | 14.06.2019
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विज्ञान

30 साल पुराने मामले में जेनेटिक वंशावली बनेगी सबूत

अमेरिका में 30 साल पहले कनाडा के दो युवाओं की हत्या हुई लेकिन हत्यारा नहीं पकड़ा गया.अब अनुवांशिक वंशावली के जरिए पुलिस ने एक ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार किया. हालांकि गिरफ्तार ड्राइवर आरोपों को गलत ठहरा रहा है.

अमेरिका में पहली बार किसी हत्या के मामले में जेनेटिक जीनियोलॉजी (अनुवांशिक वंशावली) को बतौर सबूत अदालत में पेश किया जाएगा. 30 साल पहले हुई दो हत्याओं में एक ट्रक ड्राइवर के खिलाफ अमेरिकी अदालत में जल्दी ही सुनवाई शुरू होनी है.

जेनेटिक जीनियोलॉजी में डीएनए और पूरे वंश वृक्ष की स्टडी की जाती है. इसके लिए सबूत जीनियोलॉजी वेबसाइट से जुटाए जाते हैं.  हालांकि इसके पहले इस तकनीक का इस्तेमाल "गोल्डन स्टेट किलर" की पहचान करने के लिए किया गया था, जिस पर 12 हत्याओं और 50 लोगों के साथ बलात्कार के आरोप थे. इस मामले में उसका डीएनए उसके दूर के रिश्तेदार से मिलाया गया था. अब इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल ट्रक ड्राइवर विलियम टालबोट के मामले में किया जा रहा है. ट्रक ड्राइवर पर 20 साल के जे कुक और उसकी 18 साल की गर्लफ्रेंड तान्या वान काइल्नबुर्ग को मारने का आरोप है. साल 1987 के इस मामले में कुक के मुंह में सिगरेट का पैकेट भरकर उसे मारा गया था वहीं तान्या के सिर पर गोली मारी गई थी.

दशकों की असफलता के बाद अमेरिकी पुलिस ने टालबोट को साल 2018 में गिरफ्तार कर लिया. जांच दल का नेतृत्व कर रहे जासूस जिम शार्फ कहते हैं, "अगर जेनेटिक जीनियोलॉजी से नहीं गए होते तो आज हम यहां तक नहीं पहुंचते."

इन दोनों मामलों समेत, कम से कम 70 अन्य मामलों में भी अब तक इस पद्धति का इस्तेमाल किया जा चुका है. ऐसे मामलों में अपराधिक घटना स्थल पर पाए गए डीएनए को जीनियोलॉजी वेबसाइट पर मौजूद डाटा बेस के साथ मिलाया जाता है. वेबसाइट अपने यूजरों को डीएनए टेस्ट के नतीजे पोस्ट करने की इजाजत देता है और फिर समान जीनोम वाले लोगों की सूची तैयार करता है. सूची के जरिए यूजर अपने दूर के रिश्तेदारों को ढूंढ सकते हैं.

इस मामले में कैसे मिला सुराग

इन दो लोगों की हत्या के मामले में सबसे पहले एक निजी बायोटेक्नोलॉजी लैब ने उस स्पर्म की जांच की जो मृतका लड़की तान्या के कपड़ों से मिला था. जांच नतीजों की जेनेटिक प्रोफाइलिंग की गई और उसे जीईडी मैच सिस्टम में डाल दिया गया. सर्च में दो संदिग्ध चचेरे भाइयों के नाम सामने आए. इसके बाद लैब के जीनियोलॉजीकल विशेषज्ञों ने कई पीढ़ियों की एक पारिवारिक वंशावली बनाई और इसमें एक व्यक्ति की पहचान की. पहचाना गया व्यक्ति था विलियम टालबोट. इसके बाद पुलिस ने टालबोट पर नजर रखी और उसका इस्तेमाल किया हुआ एक कप उन्हें मिल गया. कप के जरिए उन्होंने उसके डीएनए की जांच की और उन्हें पता चला कि उसका डीएनए उस स्पर्म से मेल खाता था जो तान्या के कपड़ों पर मिला था. हालांकि 56 साल का विलियम टालबोट गिरफ्तारी के बाद से लगातार यही कह रहा है कि वह निर्दोष है.

टालबोट ने कहा, "पिछले एक साल से मेरी जिंदगी थम सी गई है वह भी एक ऐसे अपराध के चलते जो मैंने कभी किया ही नहीं." बचाव पक्ष में खड़े टालबोट के वकील जेनेटिक प्रोफाइल की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं.

जेनेटिक जीनियोलॉजी पद्धति पर कानून से जुडे़ जानकार सवाल उठाते रहे हैं. इसके साथ ही कोई स्पष्ट नियम-कायदे ना होने के चलते यह कई बार आलोचना में आती रही है.

एए/आरपी (एएफपी)

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