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कोविड: 2.5 करोड़ बच्चे नियमित टीकाकरण से चूके

१५ जुलाई २०२२

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दुनिया भर में लगभग 2.5 करोड़ बच्चे डिप्थीरिया जैसी बीमारियों के खिलाफ नियमित टीकाकरण से चूक गए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना ने नियमित स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित किया.

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तस्वीर: Alemnew Mekonnen/DW

विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल 2.5 करोड़ बच्चो का डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी जैसे रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण नहीं हो पाया. 2019 में कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत से ही बच्चों के टीकाकरण में गिरावट दर्ज की जा रही है.

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा, "यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए रेड अलर्ट है." उन्होंने कहा, "हम एक पीढ़ी में बच्चों के टीकाकरण में सबसे बड़ी सतत गिरावट देख रहे हैं." उन्होंने कहा कि इसका परिणाम जीवन के खोने में मापा जाएगा.

दुनिया में टीका लगाने की शुरुआत कैसे हुई?

आंकड़ों से पता चलता है कि टीकाकरण से वंचित रहने वाले अधिकांश बच्चे विकासशील देशों, जैसे इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और फिलीपींस में रहते हैं. हालांकि, दुनिया के हर क्षेत्र में वैक्सीन कवरेज के मामले में गिरावट दर्ज की गई. सबसे खराब प्रभाव पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में पाया गया.

विशेषज्ञों ने टीकाकरण में इस ''ऐतिहासिक गिरावट'' को विशेष रूप से परेशान करने वाला बताया क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है, जब गंभीर कुपोषण के मामले बढ़ रहे हैं. कुपोषित बच्चों में आमतौर पर कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होती है और खसरा जैसे संक्रमण अक्सर उनके लिए घातक साबित हो सकते हैं.

वैज्ञानिकों ने कहा कि कम टीकाकरण दरों का परिणाम पहले ही खसरा और पोलियो जैसी बीमारियों के प्रकोप के रूप में देखा जा चुका है. मार्च 2020 में डब्ल्यूएचओ और साझीदारों ने तेजी से बढ़ती कोविड-19 महामारी के बीच देशों से अपने पोलियो उन्मूलन प्रयासों को स्थगित करने के लिए कहा था. इसके बाद से दुनिया के 30 देशों में पोलियो के मामले अचानक से बढ़ गए.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में बच्चों के स्वास्थ्य की प्रोफेसर हेलेन बेडफोर्ड ने कहा, "यह विशेष रूप से दुखद है क्योंकि कोविड महामारी से पहले दो दशकों में विश्व स्तर पर बच्चों के टीकाकरण दरों में सुधार के लिए जबरदस्त प्रगति हुई थी."

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक कोविड-19 ने बच्चों के लिए दुनिया के अधिकांश हिस्सों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना मुश्किल बना दिया, जिससे बच्चों के लिए कम टीकाकरण हो रहा है.

एए/सीके (एपी, एएफपी)