हूथी बागी ताकतवर सऊदी गठबंधन के सामने कैसे टिक पा रहे हैं? | दुनिया | DW | 08.12.2018
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दुनिया

हूथी बागी ताकतवर सऊदी गठबंधन के सामने कैसे टिक पा रहे हैं?

सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने जब 2015 में यमन पर बमबारी शुरू की तो उन्हें भरोसा था कि चंद दिनों के भीतर जीत उनकी होगी. लेकिन साढ़े तीन साल से ज्यादा हो गए और लड़ाई जारी है. हूथी बागी सऊदी गठबंधन को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.

सवाल यह है कि गोला बारूदी की कमी से जूझने वाले यमन के हूथी विद्रोही कैसे ताकतवर सऊदी गठबंधन का मुकाबला कर पा रहे हैं. हूथी विद्रोहियों का संबंध अल्पसंख्यक जैदी शिया समुदाय से है और पहाड़ी इलाके वाले उत्तरी यमन में उनका पारंपरिक रूप से दबदबा रहा है.

उन्हें अपना नाम उनके दिवंगत आध्यात्मिक नेता बदरेद्दीन अल हूथी और उनके बेटे हुसैन से मिला है. 1990 के दशक में हूथियों ने सांप्रदायिक भेदभाव के खिलाफ आंदोलन शुरू किया. 2004 से 2010 के बीच वे यमन की तत्कालीन सरकार के खिलाफ छह बार लड़े. 2009-10 में उन्होंने सऊदी अरब की सीमा में घुस कर उससे भी लोहा लिया.

आधिकारिक तौर पर हूथी बागी खुद को अंसारुल्लाह कहते हैं जिसका शाब्दिक अर्थ होता है 'अल्लाह के समर्थक'. हूथियों ने अरब क्रांति में हिस्सा लिया और दशकों से सत्ता में जमे अली अब्दुल्ला सालेह को हटने के लिए मजबूर होना पड़ा.

देखिए इस हाल में है यमन

इसके बाद देश में मची उथल पुथल में उन्होंने अपने दुश्मन अली अब्दुल्लाह सालेह को साथ ले लिया और उनकी जगह देश की बागडोर संभालने वाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य अब्दरब्बू मंसूरी हादी की सरकार को अपदस्थ कर दिया.

जब हूथी बागियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया तो सऊदी अरब और उसके साथियों ने मार्च 2015 में हस्तक्षेप करने का फैसला किया. इस बीच, हूथी बागियों के सालेह के साथ मतभेद पैदा हो गए और उनकी दिसंबर 2017 में हत्या कर दी गई.

यमन में जारी लड़ाई को बहुत से लोग दो क्षेत्रीय ताकतों सऊदी अरब और ईरान की तनातनी का नतीजा मानते हैं. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर खास तौर से यमन की आग में घी डालने के आरोप लगते हैं.

सऊदी अरब और ईरान के बीच पिसता यमन

सऊदी अरब और उसका सहयोगी अमेरिका कहते हैं कि शिया बहुल ईरान हूथी बागियों को सैन्य समर्थन दे रहा है. यहां तक कि बागियों को बैलेस्टिक मिसाइल के हिस्से भी दिए जा रहे हैं जिन्हें वे सऊदी सीमा की तरफ दाग रहे हैं.

ईरान ऐसे आरोपों से इनकार करता है. उसका कहना है कि वह सिर्फ राजनीतिक रूप से हूथियों का समर्थन करता है. पूर्व यमनी एयर फोर्स अधिकारी ब्रिगेडियर जमाल अल मोम्मारी ने एएफपी को बताया ईरानी हथियार, विशेषज्ञ और "बैलिस्टिक मिसाइल तैयार करने के उपकरण" 2015 में पहुंचे.

सुरक्षा विश्लेषक एलेक्सांद्र मित्रेस्की कहते हैं कि ईरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह से हूथियों की मदद कर रहा है. उन्होंने कहा, "जहां भी और जब भी संभव हुआ, ईरान ने हूथी विद्रोहियों को सैन्य साजो सामान के साथ साथ ट्रेनिंग भी दी है और इसी के दम पर वह सऊदी अरब को टक्कर दे रहे हैं."

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का दावा है कि ईरान समर्थित लेबनानी मिलिशिया हिजबुल्ला के सदस्य भी हूथियों को ट्रेनिंग देते हुए यमन में मारे गए हैं. हिजबुल्ला इससे इनकार करता है.

जानिए सऊदी क्राउन प्रिंस को

ईरानी मदद के आरोपों के बावजूद ऐसा लगता है कि हूथी बागियों के पास जो हथियार हैं, वे यमन सरकारी हथियार भंडारों से लूटे हुए हथियार हैं. सरकार समर्थक बलों के एक प्रवक्ता ब्रिगेडियर अब्दो मजली कहते हैं, "हूथियों के पास 90 फीसदी हथियार यमनी सेना के डिपो से लिए गए हथियार हैं." उनके मुताबिक यह हथियार तभी लूटे गए जब 2014 में उन्होंने सना पर कब्जा किया.

माजली कहते हैं कि सऊदी गठबंधन के लड़ाकू विमानों ने अपनी बमबारी में हूथियों के कुछ हथियारों को तबाह कर दिया है लेकिन विद्रोही देश के उत्तरी हिस्से में "खुफिया ठिकानों पर" अपने हथियार छिपाने में कामयाब रहे हैं.

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विद्रोहियों के पास किस तरह के हथियार हैं, यह बंदरगाह शहर होदिदा में हुई लड़ाइयों में देखने को मिला जहां सरकारी बलों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए उन्होंने टैंक तैनात किए थे. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हूथियों ने बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें भी बिछाई और अपने कुछ हथियार भी खुद ही बनाए हैं, जिनमें रॉकेट और ड्रोन भी शामिल हैं.

हूथियों को अपने इलाके में लड़ने और क्षेत्रीय गठबंधन बनाने का भी फायदा हुआ है. यही वजह है कि वे मध्य पूर्व की कई बेहतरीन सेनाओं को एक साथ टक्कर दे रहे हैं. विश्लेषक मित्रेस्की कहते हैं कि हूथियों का संबंध भले ही उत्तरी यमन से हो लेकिन उन्हें पूरे देश की जानकारी है.

वह कहते हैं, "भूगोल के अलावा भी देखें तो विद्रोहियों को स्थानीय कबीलों का भरपूर सहयोग मिल रहा है. यमन आज भी कबीलों के आधार पर विभाजित देश है और हूथी इसी का फायदा उठा रहे हैं."

अंतरराष्ट्रीय क्राइसिस ग्रुप ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूथी बागियों को शुरू में बहुत हल्के में लिया. ग्रुप कहता है, "हूथियों के पास संसाधन हैं, वे वचनबद्ध हैं, अनुभवी और बर्बर भी हैं. वे ऐसे लड़ाके हैं कि अगर उनसे कहा जाए तो एक आदमी बचने तक भी वे पूरे जोश और जज्बे से लड़ेंगे."

एके/एनआर (एएफपी)

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