हिंसा की शिकार होती यूरोपीय महिलाएं | दुनिया | DW | 08.03.2019
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दुनिया

हिंसा की शिकार होती यूरोपीय महिलाएं

कल्याणकारी नीतियों के लिए मशहूर कई यूरोपीय देश अब महिलाओं की सुरक्षा के मामले में काफी पीछे नजर आ रहे हैं. ओएससीई ने पूर्वी यूरोपीय देशों में महिलाओं की खराब स्थिति को बयान करती एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है.

ऑर्गनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप (ओएससीई) ने महिलाओं की स्थिति से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी यूरोपीय देशों में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा उभार पर है. सर्वे में 18-74 साल की उम्र वाली तकरीबन 15 हजार महिलाओं को शामिल किया गया. जिनका संबंध अल्बानिया, बोस्निया-हर्जगोविना, सर्बिया, यूक्रेन, कोसोवो, उत्तरी मेसेडोनिया, मोल्डोवा, मोंटेनेग्रो जैसे पूर्वी यूरोपीय देशों से था.

ओएससीई दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन है, जिसमें उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया के करीब 57 देश शामिल हैं. ओएससीई का मकसद दुनिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था समेत शांति और स्थायित्व को प्रोत्साहन देना है.

क्या निकले नतीजे

  • सर्वे में शामिल तकरीबन 70 महिलाओं का कहना था कि वे 15 साल की उम्र से ही किसी न किसी प्रकार की हिंसा को झेल रही हैं. वहीं 30 फीसदी ने कहा कि उनके साथ ऐसी घटनाएं पिछले एक साल के दौरान हुईं.
  • 23 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उन्हें उनके किसी करीबी या पार्टनर ने ही शारीरिक और यौन हिंसा का शिकार बनाया है. वहीं 18 फीसदी महिलाओं के साथ ऐसा सलूक करने वाले उनके साथी नहीं थे. 
  • 31 फीसदी महिलाओं के साथ शारीरिक हिंसा करने वाले लोग कहीं न कहीं उनके परिवार से जुड़े थे. वहीं मनोवैज्ञानिक हिंसा, हिंसा का सबसे आम रूप हैं जिसे 60 फीसदी महिलाओं ने हमने पार्टनर के चलते झेला है.
  • रिपोर्ट कहती है कि हर महिला को किसी न किसी स्थिति में हिंसा का शिकार होना पड़ा है. लेकिन ऐसी महिलाएं जो गरीब तबके से आती हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके बच्चे हैं उनके साथ हिंसा का जोखिम काफी अधिक है.
  • ओएससीई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महिलाओं और लड़िकयों के साथ होने वाली हिंसा मानवाधिकारों का हनन है. ओएससीई ने इसे महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा करार दिया है.

समाज का रुख

समाज का महिलाओं के साथ कैसा रुख है, इस पर भी विस्तार से चर्चा की गई है. जिन देशों में यह सर्वे किया गया वहां की सोसाइटी के नियमों और बर्ताव को समझने की भी कोशिश की गई. इस विषय पर कहा गया है कि, "महिलाओं की कमजोर स्थिति, आज्ञा पालन की आदत और महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाली हिंसा इस क्षेत्र में अब भी व्याप्त हैं."

औसतन दस में से छह महिलाएं मानती हैं कि महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा एक सामान्य बात है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई महिलाएं तो इसलिए भी हिंसा संबंधी रिपोर्ट नहीं करती क्योंकि उन्हें प्रशासन पर भरोसा नहीं है. साथ ही उन्हें लगता है कि ऐसा करने से भी कुछ नहीं बदलेगा. संस्था का कहना है कि इस सर्वे का मकसद डाटा से जुड़ी कमी की भरपाई करना है. दरअसल 2014 में यूरोपीय संघ के देश में बीच हुए सर्वे में इन देशों के आंकड़ें नहीं थे.

भविष्य के लक्ष्य

ओएससीई के सेक्रेटरी जनरल थोमास ग्रेमिंगर ने इस रिपोर्ट को महिलाओं पर होने वाली हिंसा को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है. उन्होंने कहा, "हमें इन नतीजों का इस्तेमाल अपनी नीतियों के लक्ष्य हासिल करने के लिए करना चाहिए. मसलन महिलाओं के साथ हिंसा के मामलों को घटाना, हिंसा से बचे लोगों को सही सुविधाएं देना साथ ही महिलाओं और लड़कियों के लिए पूरी तरह से सुरक्षा को बढ़ाना." ओएससीई के इस सर्वे में कई पार्टनर भी थे जिनमें यूरोपियन कमीशन समेत संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं भी शामिल हैं.

रिपोर्ट- क्रिस्टिना बुराक

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