हाथियों के डीएनए की जांच से खुल रहा है उनके शिकार का सच | विज्ञान | DW | 15.02.2022

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विज्ञान

हाथियों के डीएनए की जांच से खुल रहा है उनके शिकार का सच

अफ्रीका में बड़े पैमाने पर होने वाली हाथी दांत की तस्करी का पता लगाने में अब वैज्ञानिकों की टीम भी मदद कर रही है. डीएनए का पता लगा कर जांच अधिकारी हाथियों के घर परिवार तक पहुचने में कामयाब हुए हैं.

जिम्बाब्वे के नेशनल पार्क में रखा हाथी दांत का भंडार.

हाथी दांत का डीएनए परीक्षण तस्करों को पकड़ने में मददगार हो रहा है.

कम से कम तीन प्रमुख आपराधिक गैंग अफ्रीका से हाथी दांत की तस्करी में शामिल हैं. जब्त किए गए हाथी के दांतों की डीएनए जांच से इस बात का पता चला है. रिसर्चरों ने हाथी दांत के डीएनए के साथ ही फोन रिकॉर्ड, लाइसेंस प्लेट, फाइनेंशिल रिकॉर्ड और शिपिंग के दस्तावेजों की मदद से पूरे महाद्वीप में होने वाली तस्करी और उसमें शामिल लोगों के बारे में बेहतर जानकारी जुटाई है. तस्करी की यह पूरी कहानी सोमवार को जर्मन नेचर ह्यूमन बिहैवियर में छपी.

जेनेटिक जानकारी से पकड़े तस्कर

वॉशिंगटन की जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी की लुइजे शेले अवैध कारोबार पर रिसर्च करती हैं. वो इस रिसर्च में तो शामिल नहीं थीं लेकिन उनका कहना हैं, "जब आपके पास जेनेटिक विश्लेषण और दूसरे आंकड़े हो तो आप अवैध सप्लाई चेन को समझना शुरू कर सकते हैं, यह इन नेटवर्कों को रोकने में बिल्कुल अहम है." इस रिसर्च रिपोर्ट के सह लेखक और संरक्षण जीवविज्ञानी सैमुअल वासर को उम्मीद है कि नई खोज कानून का पालन कराने वाले अधिकारियों को इन नेटवर्कों के प्रमखों तक पहुंचने में मददगार होगी. आमतौर पर इन्हें रोकने की कार्रवाइयों में निचले स्तर के लोग ही पकड़ में आते हैं.

आपराधिक गुटों के मुखिया बड़ी आसानी से उनकी जगह नए लोगों को काम पर लगा देते हैं. वासर का कहना है, "आप उस जगह कारोबार को रोक सकते हैं जहां दांतों को इकट्ठा कर देश के बाहर भेजा जाता है, यही लोग इसके असली खिलाड़ी हैं."

अफ्रीका में हाथियों की आबादी तेजी से घट रही है. एक सदी पहले अफ्रीका में करीब 50 लाख हाथी थे जो 1979 में घट कर महज 13 लाख रह गए. वर्तमान में अनुमान है कि कुल मिलाकर 415,000 हाथी ही बचे हैं. हर साल करीब 500 मेट्रिक टन हाथी दांत अफ्रीका से बाहर भेजा जाता है. इनमें से ज्यादातर की मंजिल एशिया होती है.

केन्या में पकड़े गए हाथी दांत और गैंडों के सिंग.

हर साल करीब 500 मेट्रिक टन हाथी दांत की तस्करी होती है.

हाथियों के डीएनए की जांच

पिछले दो दशकों में वासर ने कई प्रमुख सवालों के जवाब ढूंढे हैं, मसलन सबसे ज्यादा हाथी दांत के लिए शिकार कहां होता है? कौन इन्हें एक जगह से दूसरी जगह भेज रहा है? और कितने लोग इसमें शामिल हैं? वासर केन्या, सिंगापुर, हांगकांग, मलेशिया और दूसरी जगहों के वन्यजीव प्रशासन के साथ काम करते हैं.

वन्यजीव अधिकारी हाथी दातों को पकड़ने के बाद वासर से संपर्क करते हैं. वासर इन देशों में जा कर पकड़े गए हाथी दांत का एक छोटा सा हिस्सा अपने साथ लेकर आते हैं ताकि उसके डीएनए का विश्लेषण कर सकें. उनके पास अब करीब 4,300 हाथियों के डीएन के सैंपल जमा हैं. ये वे हाथी हैं जिन्हें 1995 से लेकर अब तक अफ्रीका से बाहर तस्करी के जरिए ले जाया गया.

2004 में वासर ने यह दिखाया कि हाथी के दांत और उसकी लीद का इस्तेमाल यह पता करने में किया जा सकता है कि उसका घर कहां है. उनकी गणना के सहारे हाथियों के घर के कुछ सौ किलोमीटर के दायरे तक पहुंचा जा सकता है. 2018 में उन्होंने पता लगाया कि दो अलग जगहों से पकड़े गए हाथी दांत के डीएनए अगर एकसमान हों तो इसका मतलब है कि उन्हें एक ही जानवर से हासिल किया गया और फिर शिकारियों के नेटवर्क ने उनकी तस्करी की है.

अफ्रीकी हाथी

शिकार की वजह से मुश्किल में गजराज

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मुट्ठी भर गैंग ही करते हैं तस्करी

वैज्ञानिकों ने अब इस खोज का विस्तार कर डीएनए के जरिए यह पता लगाने में कामयाबी पाई है कि अलग अलग दांत वाले हाथियों के बीच क्या रिश्ता है. जैसे कि उनके मां बाप, बच्चे यहां तक कि भाई बहन की भी पहचान करने में कामयाबी मिली है. इन जानकारियों के आधार पर वैज्ञानिकों ने नतीजा निकाला है कि अफ्रीका से होने वाली ज्यादातर तस्करी के पीछे महज दो तीन गैंग ही शामिल हैं.

हाथियों के झुंड में मादा हाथी जीवन भर उसी पारिवारिक झुंड में रहती है. नर हाथी भी अपने पारिवारिक झुंड से बहुत ज्यादा दूर नहीं जाते. इससे वैज्ञानिकों ने मोटे तौर पर यह आकलन किया है कि परिवार के सदस्य या तो एक ही बार में शिकार किए गए हैं या फिर एक ही शिकारी उनका अलग अलग समय पर शिकार करता है.

जेनेटिक जानकारी से फायदा

जेनेटिक से जुड़ी इस तरह की जानकारी वन्यजीव अधिकारियों के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती हैं. वन्यजीव अधिकारी इसके अलवा मोबाइल फोन रिकॉर्ड, लाइसेंस प्लेट, शिपिंग के दस्तावेज और आर्थिक लेखाजोखा के आधार पर कड़ियां जोड़ते हैं.

अफ्रीका के सवाना में हाथियों का झुंड.

मादा हाथी पूरी उम्र एक ही झुंड में रहती है.

जॉन ब्राउन 25 साल से होमलैंड सिक्योरिटी इनवेस्टिगेसंस के स्पेशल एजेंट के तौर पर पर्यावरण से जुड़े अपराधों पर काम कर रहे हैं. वह बताते हैं कि पहले जब हाथी दांत का जखीरा पकड़ा जाता था तब एक बार में यह पता लगाना मुश्किल था कि इसके पीछे किस गैंग का हाथ है. वैज्ञानिकों की मदद से डीएनए लिंक की पहचान अलग अलग पकड़ी गई खेपों के बीच संबंध निकाल सकती है. ब्राउन भी इस रिसर्च रिपोर्ट के सह-लेखक हैं. उन का कहना है, "सहयोगपूर्ण कोशिशें निश्चित रूप से कई बहुराष्ट्रीय जांचों की रीढ़ रही हैं जो अब भी जारी है."

शिकार के ठिकाने

इन लोगों ने शिकार की कई प्रमुख जगहों की पहचान की है. ये इलाके तंजानिया, केन्या, बोत्सवाना, गेबॉन और रिपब्लिक ऑफ कांगो में हैं. हाथी दांत अकसर पहले दूसरी जगह पर मौजूद गोदामों में ले जाया जाता है जहां दूसरी जगहों से आई दूसरी प्रतिबंधित चीजें भी होती हैं. इसके बाद इन्हें साथ मिलाकर शिपिंग कंटेनरों में पैक किया जाता है और फिर बंदरगाहों पर ले जाया जाता है. फिलहाल तस्करी के बड़े केंद्र युगांडा में कंपाला, केन्या में मोम्बासा और टोगो में लोम हैं.

वासर ने बताया कि हाल ही में दो संदिग्धों को इस तरह की जांच के बदौलत गिरफ्तार किया गया. आमतौर पर तस्कर दूसरी चीजों की भी हाथी दांत के साथ तस्करी करते हैं. जैसे कि पकड़े गए सामानों में करीब एक चौथाई मात्रा तो पेंगोलिन के शल्कों की होती है. तस्करी के लिए बड़े पैमाने पर पेंगोलिन का भी शिकार होता है.

एनआर/एके(एपी)

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