हांग कांग: नहीं निकला हल | दुनिया | DW | 23.10.2014
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

हांग कांग: नहीं निकला हल

हांग कांग में पूर्ण लोकतंत्र की मांग के साथ जारी आंदोलन में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया. प्रशासन और छात्र नेताओं के बीच बातचीत में कोई हल न निकलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़कों से न हटने का एलान किया था.

गिरफ्तार हुए लोगों में सात पुरुष और एक महिला है. पुलिस के मुताबिक इन पर खतरनाक हथियारों के रखने और मारपीट के आरोप हैं. हांग कांग में आंदोलन कर रहे छात्र चीन के विशेष प्रशासनिक इलाके में अधिक लोकतंत्र चाहते हैं. उनके मुताबिक हफ्तों से चल रहे आंदोलन को रोकने के लिए अधिकारियों ने बातचीत में एक भी ढंग का प्रस्ताव नहीं रखा.

हांग कांग के प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्र नेताओं से इस हफ्ते पहली बार मिल कर बात करने के बाद कहा था कि वे उनके साथ आगे ताजा बातचीत की उम्मीद रखते हैं. लेकिन छात्र नेताओं की प्रतिक्रिया इसके बिलकुल विपरीत निकली. दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद छात्र नेताओं ने इसमें आगे दिलचस्पी से इनकार किया है. उनके मुताबिक बातचीत हवा में हो रही है, कोई ठोस वादे या प्रस्ताव नहीं रखे गए हैं.

बिगड़ते हालात

ऑक्यूपाई सेंट्रल के नाम से मशहूर आंदोलन के प्रमुख कर्ता धर्ता छात्र ही हैं. 22 सितंबर को उन्होंने हफ्ते भर का आंदोलन शुरू किया जिसमें बाद इसमें स्कूली छात्र भी शामिल हो गए. हांग कांग फेडरेशन ऑफ स्टूडेंट्स के महासचिव एलेक्स चाउ ने कहा, "भविष्य में हमारे बीच कोई बात होगी या नहीं इस बारे में कुछ तय नहीं है. सरकार को इस मुद्दे के हल के लिए किसी नतीजे के साथ सामने आना होगा. अभी वे जो बातें कह रहे हैं उनमें कोई ठोस बात नहीं है." साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी फिलहाल सड़कों से नहीं हटने वाले. इसके बाद प्रदर्शनकारी हांग कांग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लियुंग चुन यिंग के घर तक पहुंच गए.

महीने भर से जारी ऑक्यूपाई सेंट्रल आंदोलन में अब तक कई स्थानीय लोग भी छात्रों से भिड़ चुके हैं. लोग प्रदर्शनों से उक्ता गए हैं और जल्दी कोई हल चाहते हैं. टैक्सी ड्राइवर असोसिएशन और कई अन्य संगठनों ने हाई कोर्ट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कदम उठाए जाने की मांग की है. जानकारों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत से ही कोई हल निकल सकता है. बातचीत न हो सकने की स्थिति में हालात दोबारा हिंसक हो सकते हैं. पिछले हफ्ते प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में दर्जनों लोग जख्मी हो गए थे.

सीमित प्रस्ताव

बातचीत के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों का जोर इसी बात पर रहा कि उम्मीदवारों का चयन जनता के हाथ में नहीं जाएगा. हालांकि उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि वे मौजूदा स्थिति के बारे में बीजिंग के अधिकारियों से बात करेंगे. इसके जरिए 2017 के आगे राजनीतिक सुधारों के बारे में दोनों पक्ष मिलकर चर्चा कर सकेंगे. छात्र नेता इन प्रस्तावों से निराश हैं, उनके मुताबिक बातचीत में एक भी काम की बात नहीं कही गई. उन्होंने अधिकारियों से मांग की है कि वे साफ साफ बताएं कि उनके प्रस्ताव में क्या कहने की कोशिश की जा रही है.

दोनों पक्षों के बीच अगले चुनाव में नेतृत्व चुनने के तरीकों पर विवाद है. 2017 में होने वाले चुनाव के लिए प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि उम्मीदवारों का चयन आम लोगों के हाथ में हो जबकि सरकार के फैसले के तहत यह फैसलाहांग कांग की जनता नहीं, बल्कि 1200 सदस्यों की एक समिति करेगी. आंदोलनकारियों का कहना है कि यह पूर्ण लोकतंत्र नहीं है. इसके अलावा चीन उम्मीदवारों में देशभक्ति की भावना पर बल दे रहा है जिसका मतलब होगा कि लोकतंत्र समर्थकों को सरकार प्रमुख बनने का कोई मौका नहीं मिलेगा. इस तरह चीन हॉन्ग कॉन्ग के सीमित लोकतंत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है. आंदोलनकारी 2017 चुनाव के बाद राजनीतिक सुधारों में तेजी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की भी मांग कर रहे हैं.

एसएफ/एमजी (एएफपी)

DW.COM