हर 10 सेकेंड में जान लेती शराब | विज्ञान | DW | 13.05.2014
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विज्ञान

हर 10 सेकेंड में जान लेती शराब

शराब हर साल करीब 33 लाख लोगों की जान लेती है. एड्स, टीबी और हिंसा के शिकार व्यक्तियों को मिलाकर देखा जाए, तो भी शराब की चपेट में आकर जान खोने वाले लोग कहीं ज्यादा हैं.

दुनिया भर में देखा जाए तो हर 20 मौतों में एक मौत शराब से होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या बढ़ भी सकती है. शराब से होने वाली मौतों में नशे में गाड़ी चलाने से होने वाली मौतें भी शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ की प्रमुखता कर रहे शेखर सक्सेना कहते हैं कि आंकड़ों को देखा जाए तो हर 10 सेकेंड पर एक व्यक्ति अल्कोहल की वजह से मरता है.

शराब का शिकार

2012 में 33 लाख लोग शराब के नशे का शिकार बने. विश्व भर में मरने वाले लोगों में से करीब 6 प्रतिशत अल्कोहल की वजह से मरते हैं. डब्ल्यूएचओ में काम कर रहे ओलेग चेस्टनोव कहते हैं कि अल्कोहल के बुरे असर से आम लोगों को बचाने की जरूरत है. शराब से स्वास्थ्य को बहुत नुकसान होता है और 200 से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां अल्कोहल से होती हैं. इनमें कैंसर के साथ लीवर सिरोसिस शामिल है. निमोनिया, एड्स और टीबी होने का खतरा भी शराब से बढ़ता है.

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि शराब अब उन देशों में मशहूर हो रही है जहां पारंपिक तौर पर शराब को बुरा माना जाता था. ऐसे देशों में भारत और चीन शामिल हैं. लोगों के पास ज्यादा पैसा होने से वह शराब खरीदने लगे हैं. संगठन का कहना है कि चीन में साल 2025 तक एक साल में एक व्यक्ति 1.5 लीटर शुद्ध अल्कोहल पीने लगेगा. लेकिन अब भी शराब के शौकीन सबसे ज्यादा रूस और पूर्वी यूरोप में पाए जाते हैं. 2010 के आंकड़ों के मुताबिक रूस में प्रति व्यक्ति औसतन 32 लीटर शराब पी जाती है. इसके बाद कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की बारी है. पूरी दुनिया को एक साथ लिया जाए तो 15 साल की उम्र से ऊपर हर व्यक्ति एक साल में 6.2 लीटर अल्कोहल पीता है.

लेकिन इन हैरान करने वाले आंकड़ों के बावजूद दुनिया में ऐसे भी देश हैं जहां लोगों ने कभी शराब नहीं पी है. इनमें कुछ इस्लामी देश के लोग हैं जहां शराब पीना वर्जित है. कम आमदनी वाले देशों में भी शराब कम पी जाती है.

एमजी/एएम (एएफपी)

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