स्विस तिजोरियों में छिपेगा काला धन | दुनिया | DW | 01.07.2012
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दुनिया

स्विस तिजोरियों में छिपेगा काला धन

स्विस बैंकों में बढ़ते काले धन को छिपाने का बैंकों ने एक नया तरीका निकाला है. वे लोगों को पैसा सेविंग अकाउंट में ना रख कर लॉकर में रखने की सलाह दे रहे हैं. सरकारों की नजरों से यह पैसा पूरी तरह छिप सकेगा.

बैंक के क्लाइंट अब तक इन तिजोरियों का इस्तेमाल हीरा,सोना या शेयरों का कागजात रखने के लिए करते आए हैं, लेकिन अब इनमें पैसा भी रखा जा रहा है. बैंकों की सलाह है कि लोग हजार हजार स्विस फ्रैंक्स के नोटों की गड्डियां इन तिजोरियों में रखें. स्विस बैंकों के नियमों के अनुसार सरकारों को केवल लोगों के अकाउंट के बारे में जानकारी दी जा सकती है. तिजोरियों में रखा गया धन गुप्त माना जाता है और उस पर कोई जानकारी नहीं दी जाती. इसलिए यदि लोग यहां पैसा भी रखने लगें तो वे सरकारों की नजरों से बच सकते हैं.

इन बैंकों में ऐसी कितनी तिजोरियां हैं इसके कोई आंकड़े मौजूद नहीं हैं. रिपोर्टों के अनुसार 2011 में बैंकों को इन तिजोरियों के किराए से होने वाला मुनाफा बढ़ा है, जबकि सेविंग्स अकाउंट से होने वाले मुनाफे में कमी देखी गई है.

साठ हजार का नोट

एक हजार फ्रैंक के नोट की कीमत साठ हजार रुपये होती है. यानी काले धन को छिपा कर रखना अब लोगों के लिए और आसान हो गया है. स्विट्जरलैंड उन चुनिन्दा देशों में से है, जहां इतनी बड़ी कीमत का नोट छपता है. ब्रिटेन में सबसे बड़ी कीमत का नोट पचास पाउंड का और अमेरिका में सौ डॉलर का है. हालांकि अमेरिका में पांच सौ, एक हजार, पांच हजार और यहां तक कि दस हजार के नोट भी छपा करते थे. लेकिन 1945 के बाद से इनकी छपाई बंद कर दी गई. इसके बाद 1969 से इन्हें बाजार से पूरी तरह हटा लिया गया. यूरोप में दो सौ और पांच सौ यूरो के नोट भी छपते हैं.

विदेशों से बढ़ती मांग

समाचार एजेंसी पीटीआई ने जब स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) से भारत के काले धन के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही तो उसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. लेकिन बैंक ने माना कि पिछले एक साल में हजार फ्रैंक के नोटों की मांग तेजी से बढ़ी है. बाजार में मौजूद कुल स्विस नोटों का साठ फीसदी हिस्सा हजार के नोटों का है. पिछले साल तक यह पचास प्रतिशत था.

इस वक्त बाजार में कुल दो हजार अरब रुपयों की कीमत के एक एक हजार स्विस फ्रैंक के नोट मौजूद हैं. ज्यूरिख में एसएनबी के एक प्रवक्ता ने पीटीआई से कहा, "हमें लगता है कि नोटों की अधिक मांग का कारण स्विस नोटों के रूप में धन को बचा कर रखने का चलन है. जब ब्याज की दरें कम होती हैं तो अक्सर यह चलन देखा जाता है. हमें ऐसा भी लगता है कि यह मांग विदेशों से बढ़ रही है."

भारत का हिस्सा

इन तिजोरियों में भारत का कितना धन पड़ा है या भारत की तरफ से इनकी मांग में कितनी वृद्धि हुई है इसका जवाब देने से एसएनबी ने इनकार कर दिया. हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारत के कुल 2.18 अरब फ्रैंक यानी 12,700 करोड़ रुपये मौजूद हैं. यह रकम भले ही काफी बड़ी लगे, लेकिन इन बैंकों में मौजूद राशि का यह केवल 0.14वां हिस्सा है.

आईबी/एमजे (पीटीआई)

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