स्टीव जॉब्स के होने और न होने का साल | दुनिया | DW | 29.12.2011
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

स्टीव जॉब्स के होने और न होने का साल

कंप्यूटर युग ने नई तकनीक और खोज के संसार में एक कद्दावर चेहरे को 2011 में 56 साल की छोटी उम्र में मरते देखा. एप्पल को जन्म देने वाले स्टीव जॉब्स की अक्टूबर में मौत तकनीकी दुनिया के लिए बहुत बड़ा सदमा रही.

स्टीव जॉब्स की मौत ऐसे वक्त में हुई जब एप्पल, दिग्गज तेल कंपनी एक्सॉन मोबिल को टक्कर देते हुए दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में शुमार हुई और उनकी कामयाबियों की तुलना अमेरिका के सर्वकालिक बड़ी खोज करने वाले थॉमस एडिसन और हैरिसन फोर्ड से की जा रही थी. जॉब्स की मौत के बाद के हफ्तों में अनगिनत बार कंप्यूटर, संगीत, डिजिटल सिनेमा, स्मार्ट फोन और टैबलेट कंप्यूटर में उनके लाए बदलावों की चर्चा होती रही. पर सोचने वाली बात यह थी कि एप्पल और तकनीक की दुनिया में स्टीव जॉब्स की दृष्टि और सोच शामिल नहीं हुई होती तो क्या होता.

जॉब्स की मौत के बाद एप्पल के शेयरों की कीमत में भारी गिरावट जरूर आई लेकिन जल्दी ही यह ऊपर चढ़ गया. निवेशकों को जल्दी ही पता चल गया कि दूरदर्शी जॉब्स ने अपने पिछले कई साल अपनी विरासत को संभालने वाले हाथों को तैयार करने में खर्च किए हैं. जॉब्स ने पहले से ही आने वाले समय के लिए एप्पल का खाका खींच रखा है. यहां तक की जॉब्स ने एक गुप्त एप्पल यूनिवर्सिटी भी बना रखी थी जो उनके टॉप एग्जिक्यूटिव्स को पढ़ाती थी. जब उन्होंने टिम कुक को अपने वारिस के रूप में नियुक्त किया तभी यह भी तय कर दिया कि जॉनी इवे की कुर्सी सुरक्षित रहे. जॉनी एप्पल के डिजाइन चीफ हैं.

NO FLASH Steve Jobs Apple Tod Todesfall

जॉब्स की तैयारी कितनी तगड़ी है इसे इससे भी समझा जा सकता है कि उनकी मौत के कुछ ही दिन बाद बाजार में उतरा आईफोन 4एस रिकॉर्ड तोड़ बिक्री को हासिल कर गया वो भी तब जबकि पिछले फोन की तुलना में इसे बस कुछ मामूली सुधारों के साथ पेश किया गया. तकनीक के जानकार अब उम्मीद कर रहे हैं कि आईफोन 4एस में पेश किए गए सिरी और दूसरे वॉयस सिस्टम कंप्यूटर और लैपटॉप को नियंत्रित करने के तरीकों में जल्दी ही भारी लोकप्रियता हासिल कर लेंगे. ऐसी भी उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही इसके जरिए इंटरएक्टिव टीवी की भी शुरूआत हो सकेगी जिसका मनोरंजन की तकनीक को काफी लंबे समय से इंतजार है.

तकनीक के चाहने वालों के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि इस दिशा में दिमाग लगाने वालों में जॉब्स अकेले नहीं हैं. माइक्रोसॉफ्ट ने दिसंबर की शुरुआत में एक अपडेट लॉन्च किया जो पांच करोड़ से ज्यादा लोगों के लिविंग रूप में मौजूद एक्बॉक्स 360 को आवाज से नियंत्रित होने वाले इंटरैक्टिव टीवी मॉड्यूल में बदल देगा. जॉब्स के पुराने प्रतिद्वंद्वी बिल गेट्स के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है लेकिन कई दूसरे कारोबारी भी जॉब्स की जगह लेने को बेचैन हैं. गूगल के सर्गे ब्रिन और लैरी पेज ने तो इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की जिंदगी बदल ही दी है, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग ने इंटरनेट के जरिए संपर्कों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है. इन तीनों का एक ही मंत्र है और वो यह है कि कंप्यूटर क्रांति और उसमें उनकी जगह बस शुरू ही हुई है.

Steve Jobs Flash-Galerie

अब गूगल को ही देखिए उसने वेब की दुनिया में तो लगातार नई चीजों का शामिल करना जारी रखा ही है उसने वैकल्पिक ऊर्जा और परिवहन तंत्र में भी नई खोजों को शामिल करना शुरू कर दिया है. गूगल की खुद से चलने वाली कार का आने वाले समय में लोगों की आवाजाही पर क्रांतिकारी असर हो सकता है. ठीक वैसे ही जैसे कि कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों के लिए कोई जानकारी ढूंढने की दिशा में हुआ है.

इन लोगों ने एप्पल के लिए पहले ही चुनौतियां पेश करनी शुरू कर दी है. गूगल का एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर अब दुनिया भर में ज्यादातर स्मार्टफोन्स के साथ काम करता है. कई लोगों का मानना है कि इस्तेमाल में यह आईफोन के जैसा ही है. इसी तरह आईपैड भी अब सिर्फ एप्पल की मिल्कियत नहीं रही. नवंबर में लॉन्च हुए अमेजन के किंडल फायर के 20 लाख टेबलेट बिक चुके हैं और उसके साथ दूसरी कंपनियों के टेबलेट की भी कतार लगी है.

Flash-Galerie Nobelpreisträger in Lindau

आने वाले दौर में तकनीक की दुनिया पर कब्जे की होड़ क्या रंग लाएगी इस पर जानकारों की राय बंटी हुई है. एप्पल के शेयर अप्रैल में अपनी सर्वकालिक ऊंची कीमत 426 डॉलर से फिलहाल नीचे चल रहे हैं. तकनीकी बाजार के जानकार लियोनिड कानोप्का को लगता है "एप्पल का बुलबुला फूट चुका है." उनकी मानें तो शेयरों के भाव 100 डॉलर से भी नीचे आएंगे. उधर दूसरे जानकार एंडी जेकी का कहना है कि सभी ब्लू चिप कंपनियों के बीच एप्पल के शेयरों की कीमत सबसे कम लगाई गई है. आखिरकार एप्पल की सफलता उसके सामानों की ब्रैंडिंग पर निर्भर करती है.

फिलहाल तो यही लगता है कि भविष्य का ख्याल रख लिया गया है. क्रिसमस पर अमेरिकी बच्चों में कराए सर्वे में टॉप तीन इलेक्ट्रॉनिक गजट के बारे में पूछने पर 6-12 साल की उम्र के बच्चों ने सारे नाम एप्पल से जुड़े लिए. सर्वे के नतीजे बताते हैं कि 44 फीसदी बच्चे आईपैड चाहते हैं, जबकि 30 फीसदी बच्चे आईपॉड टच और 27 फीसदी बच्चों ने आईफोन के लिए चाहत दिखाई.

रिपोर्टः डीपीए/एन रंजन

संपादनः महेश झा

DW.COM

विज्ञापन