सौरव गांगुली का सपना टूटा | खेल | DW | 17.03.2010
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खेल

सौरव गांगुली का सपना टूटा

एक बहुत पुरानी कहावत है कि इतिहास खुद को दोहराता है. मंगलवार को इडेन गार्डेन में खेले गए कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच हुए मुकाबले में भी इतिहास ने खुद को दोहराया.

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इतिहास की यह कवायद नाइट राइडर्स और उसके कप्तान सौरव गांगुली के लिए भारी साबित हुई. गांगुली ने तो सपने में भी कल्पना नहीं की होगी कि दो साल के भीतर ही टीम का इतिहास एक बार खचाखच भरे अपने ही मैदान यानी इडेन में ही टीम के सामने मुंह चिढ़ाता खड़ा हो जाएगा.

पहले दोनों मैचों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली नाइट राइडर्स की टीम इंडियन प्रीमियर लीग के तीसरे मैच में पूरी तरह बिखर गई. जीत के लिए 165 रन के लक्ष्य का पीछा करती हुई पूरी टीम चार गेंदें बाकी रहते ही 109 रन पर आउट हो गई. इस तरह गांगुली की अगुवाई वाली टीम 55 रन से हार गई.

यह नाइट राइडर्स की पहली हार है और चेन्नई की पहली जीत. चेन्नई के कप्तान धोनी को 33 गेदों में 66 रनों की नाबाद कप्तानी पारी के लिए मैन ऑफ़ द मैच चुना गया. धोनी ने जहां आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए अपनी टीम को जिताऊ स्कोर तक पहुंचा दिया, वहीं गांगुली बल्लेबाज के तौर पर तीसरा बार भी फ्लॉप रहे. घरेलू मैदान पर 20 गेंदें खेल कर वे एक चौके की सहायता से 11 रन ही बना सके.

इतिहास की बात

इंडियन प्रीमियर लीग के पहले संस्करण में कोलकाता की टीम ने अपने पहले दोनों मैचों में डेक्कन चार्जर्स और रॉयल चैलेंजर्स बंगलूर को हराया था. उस साल भी उसका तीसरा मैच चेन्नई सुपर किंग्स के साथ. तीसरा मैच हारने के बाद वह लगातार अपने मैच हारती रही और टीमों की सूची में सबसे आखिर में रही थी.

इस बार भी ठीक यही हुआ है. उसने पहले दोनों मैच उन दोनों टीमों के खिलाफ ही जीता था. चेन्नई के साथ यह उसका तीसरा मैच था. टीम के मालिक शाह रुख़ ख़ान और कप्तान सौरव गांगुली को भी तीसरे मैच की सबसे ज्यादा चिंता थी. इसलिए पहले दोनों मैच जीतने के बावजूद टीम ने जीत का जश्न नहीं मनाया था. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद गांगुली इतिहास से पीछा नहीं छुड़ा सके.

Indien und Pakistan spielen Cricket

जीत के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नाइट राइडर्स की शुरूआत बेहद खराब रही. पिछले मैच में अर्द्धशतक लगाने और मनोज तिवारी के साथ पहले विकेट के लिए शतकीय साझीदारी कर टीम को आसान जीत दिलाने वाले ब्रैड हॉज पहले ओवर की दूसरी गेंद बिना खाता खोले ही पेवेलियन लौट गए.

दूसरे ओपनर और रायल चैलेंजर्स के खिलाफ मैच में मैन ऑफ़ द मैच रहे मनोज तिवारी ने दूसरे ओवर की पहली दो गेंदों पर चौके जड़ कर अपना फ़ॉर्म दिखाने का प्रयास किया. लेकिन अगली ही गेंद पर वे भी आउट हो गए. इन शुरूआती झटकों से टीम आखिर तक उबर नहीं सकी. कप्तान गांगुली लगातार तीसरी बार भी नाकाम रहे. तीसरे नंबर पर उतरे गांगुली महज 11 रन ही बना सके. चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों की सधी गेंदबाजी और चुस्त फील्डिंग की वजह से दोनों छोर से लगातार विकेट गिरते रहे.

आठ ओवरों में 55 रनों के स्कोर पर आधी टीम पेवेलियन लौट चुकी थी. उस समय लगने लगा था कि शायद टीम का स्कोर सौ तक भी नहीं पहुंचेगा. लेकिन मुरली कार्तिक और ईशांत शर्मा ने दसवें विकेट के लिए 25 रन जोड़ कर टीम का स्कोर सौ के पार पहुंचा दिया. कोलकाता की ओर से विकेट कीपर ऋद्धिमान साहा ने सबसे ज्यादा 22 रन बनाए.

चेन्नई की ओर से जस्टिन कैंप ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए तीन ओवर में 12 रन दे कर तीन विकेट लिए. उनके अलावा लक्ष्मीपति बालाजी ने 2.2 ओवर में नौ रन देकर दो विकेट हथियाए. मोर्केल और मुरलीथरन समेत टेन्नई के तमाम गेंदबाज काफी किफायती रहे. गोनी कुछ महंगे साबित हुए. उन्होंने तीन ओवर में 33 रन लुटाए. उन्होंने सधी हुई गेंदबाजी करते हुए कोलकाता नाइट राइडर्स के किसी भी बल्लेबाज को हाथ खोलने का मौका नहीं दिया.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता(संपादनः आभा मोंढे)

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