सोशल मीडिया में चुप्पी तोड़ते बांग्लादेशी मदरसों में यौन उत्पीड़न के शिकार | भारत | DW | 13.09.2019
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भारत

सोशल मीडिया में चुप्पी तोड़ते बांग्लादेशी मदरसों में यौन उत्पीड़न के शिकार

बांग्लादेश जैसे रुढ़िवादी देश में यौन उत्पीड़न या सेक्स पर बात करना अब तक वर्जित विषय माना जाता था. लेकिन देश के मदरसों में बलात्कार की हालियां घटनाएं सामने आने के बाद अब लोग सोशल मीडिया पर खुल कर बोलने लगे हैं.

बांग्लादेश के मदरसों में बाल यौन उत्पीड़न की घटनाओं का पहले दबे-छिपे स्वरों में जिक्र तो होता था. लेकिन अपने एक शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली एक किशोरी की अप्रैल में जलाकर हत्या की घटना के बाद लोग इस विषय पर बात करने के लिए आगे आने लगे हैं. अकेले जुलाई में ही देश के विभिन्न मदरसों के कम से कम पांच शिक्षकों को उनके संरक्षण में रहने वाले लड़कों और लड़कियों के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है. उक्त छात्रा को जिंदा जलाने की घटना के बाद बांग्लादेश मदरसा शिक्षा बोर्ड (बीएमईबी) ने मदरसों में छात्राओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए थे. लेकिन बावजूद इसके ऐसी घटनाएं थम नहीं रही हैं.

मुखर होते लोग

बांग्लादेश के मदरसों में शिक्षकों और मौलवियों की ओर से छात्र-छात्राओं के यौन उत्पीड़न की घटनाएं नई नहीं हैं. लेकिन पहले आतंक के मारे कोई भी इस बारे में मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था. अब एक छात्रा की जला कर हत्या होने और कई मौलवियों के गिरफ्तार होने के बाद लोग खुल कर सामने आने लगे हैं. दरअसल, बीते मार्च में एक 18 वर्षीय छात्रा नुसरत जहां रफी ने अपने मदरसे के प्रिंसिपल सिराजुद्दौला के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी.

Bangladesch, Dhaka: Protest gegen den Mord an Studentin (picture-alliance/M. Rashid)

नुसरत जहां रफी मामले के बाद भी नहीं थमा इस्लामिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न का सिलसिला.

उसका आरोप था कि प्रिंसिपल अपने चैंबर में बुलाकर उसे गलत तरीके से छूता था. उसकी शिकायत पर प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन इसके कुछ दिनों बाद छह अप्रैल को चार बुर्काधारी हमलावरों ने उस छात्रा के शरीर पर किरासन तेल छिड़ कर उसे जिंदा जला दिया. चार दिनों तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 10 अप्रैल को उसने दम तोड़ दिया था. उसके बाद राजधानी ढाका समेत पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों का लंबा सिलसिला चलता रहा. उसकी हत्या के मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एकेएम सैफउल्लाह कहते हैं, "शिक्षा विभाग इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए दिशानिर्देशों को लागू करने की कड़ी निगरानी करेगा.”

इससे पहले ढाका हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 में तमाम स्थानों में पांच-सदस्यीय यौन उत्पीड़न विरोधी समिति के गठन का निर्देश दिया था. अकेले जुलाई में लड़कों व लड़कियों के साथ बलात्कार के आरोप में पांच मदरसा शिक्षकों की गिरफ्तारी से साफ है कि तमाम कवायद के बावजूद मदरसों में यौन उत्पीड़न की घटनाएं थमने की बजाय बढ़ती ही जा रहीं हैं.

सबकी कहानी एक सी 

मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ऐसी इक्का-दुक्का घटनाएं ही सामने आ पाती हैं. इस वजह से यौन उत्पीड़न करने वालों के हौसले मजबूत होते रहे हैं. ऐसे एक संगठन बांग्लादेश शिशु अधिकार फोरम के अध्यक्ष अब्दुस शाहिद कहते हैं, "यह मामला इतना संवेदनशील है कि बरसों से कोई इस पर बात तक नहीं करता था.” ढाका के कई मदरसों में तालीम हासिल कर चुके होजाईफा अल ममदूह ने बीती जुलाई में अपनी कई फेसबुक पोस्ट में अपने अलावा दूसरे लड़कों के साथ हुए यौन उत्पीड़न का खुलासा किया था.

ढाका विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के छात्र ममदूह कहते हैं, "मदरसे में पढ़ने वाले हर ठात्र को इस यौन उत्पीड़न की जानकारी है. वहां बड़े पैमाने पर ऐसी घटनाएं होती रही हैं.” ममदूह के फोसबुक पोस्ट के बाद पूरे देश में इस मामले पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई. ममदूह को इसके लिए धमकियां भी मिलीं. लेकिन उसके बाद कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की. उनमें से सबकी कहानी लगभग एक जैसी थी. उन सबके साथ कभी न कभी बलात्कार हुआ था और मुंह बंद रखने की धमकी मिली थी.

Bangladesch Hojaifa al Mamduh Ex-Madrasa-Student (Getty Images/AFP/M. Uz Zaman)

होजाईफा अल ममदूह ने बीती जुलाई में अपनी कई फेसबुक पोस्ट में किया था खुलासा.

हालांकि मदरसा शिक्षकों ने इसे नकारात्मक प्रचार करार देते हुए कहा है कि यह उनकी छवि खराब करने की साजिश है. एक मदरसे के प्रिंसिपल महफजूल हक कहते हैं, "अपवाद के तौर पर एकाध ऐसी घटनाएं हो सकती हैं. लेकिन सबको एक ही चश्मे से देखना उचित नहीं है.” उनका कहना था कि जिन छात्रों को मदरसे की जीवनशैली पसंद नहीं है वही लोग ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं.लगभग एक हजार मदरसों का प्रतिनिधत्व करने वाला कट्टरपंथी इस्लामी संगठन हेफाजते-ऐ-इस्लामी के एक प्रवक्ता कहते हैं, हाल में एक सम्मेलन में 1,200 मदरसा प्रमुखों को यौन अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करने का निर्देश दिया गया था.

अपवाद है या व्यापक समस्या

मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ऐसे मामले अपवाद नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर हो रहे हैं. एक मानवाधिकार कार्यकर्ता जमील कहते हैं, "मदरसा छात्रों के सोने की जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए. ऐसे मामलों की अनदेखी करने या इनको साजिश बताने की बजाय मदरसों को जिम्मेदारी लेकर ऐसे अपराधों से निपटने की ठोस कार्य योजना तैयार करनी चाहिए.”

शिशु अधिकार फोरम के अब्दुस शाहिद कहते हैं, "किफायती होने की वजह से इन मदरसों में ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं. लोग बच्चों को मदरसों में तो भेजते हैं. लेकिन जानकारी होने के बावजूद वह लोग ऐसे अपराधों के बारे में मुंह नहीं खोलते. उनको लगता है कि इससे इन अहम धार्मिक संस्थानों की बदनामी होगी. यही मानसिकता मदरसों के लिए कवच का काम करती रही है.”

सरकार का पक्ष

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मदरसा छात्रा को जिंदा जलाने के मामले में तमाम अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है. मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सैफुल्लाह कहते हैं, "इन घटनाओं से मदरसों की छवि खराब हो रही है.” वह बताते हैं कि आगे से ऐसा आरोप सामने आने के बाद उसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाएगी. मदरसा परिसर में किसी अपराध या हिंसा से कड़ाई से निपटा जाएगा.

लेकिन एक गैर-सरकारी संगठन मानुषेर जन्यो (लोगों के लिए) फाउंडेशन ने दावा किया है कि बीते अप्रैल से अब तक 18 साल से कम उम्र के बच्चों के यौन शोषण की 39 शिकायतें सामने आई हैं. मानवाधिकार संगठन 'आईन ओ सालिश' केंद्र की कार्यकारी निदेशक शिपा हाफिजा कहती हैं, "हमारी पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. ऐसे मामलों में ताकतवर लोग अपराधियों को बचाने के लिए एकजुट हो जाते हैं.”

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