सोशल मीडिया पर भी छाया रहा तीन तलाक विरोधी कानून | भारत | DW | 30.07.2019
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भारत

सोशल मीडिया पर भी छाया रहा तीन तलाक विरोधी कानून

तीन तलाक को अपराध बनाने वाला बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया. बिल के विरोध में जहां 84 वोट पड़े. वहीं इसके समर्थन में 99 वोट पड़े.

भारत में तीन तलाक को अपराध बनाने वाला मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया. नए बिल में तीन तलाक को गैर कानूनी बनाते हुए 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस कानून को महिला-पुरुष समानता के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है.

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसे सदन में पेश करते हुए कहा कि 20 से ज्यादा इस्लामिक देशों ने तीन तलाक पर रोक लगा दी है और भारत जैसे देश में यह लागू नहीं रह सकता. पैगंबर मोहम्मद भी 3 तलाक के खिलाफ थे. उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने भी इसे असंवैधानिक करार दिया है. 

सदन में सत्तारूढ़ भाजपा को विरोधी पार्टियों के अलावा अपने सहयोगी जेडीयू का भी विरोध झेलना पड़ा. तृणमूल कांग्रेस ने तो सरकार को यहां तक कह दिया कि उसके पास बहुमत है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह संसदीय परंपरा और संविधान का अपमान करें. राजनीतिक गलियारों के साथ ही सोशल मीडिया पर यह मुद्दा सुबह से ही छाया रहा. सोशल मीडिया यूजर्स ने #tripletalaqbill के साथ अपने विचारों को साझा किया.

टि्वटर यूजर सोहन सिंह नेगी @SohanSinghNeg10 ने एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर कटाक्ष करते हुए लिखा, "ओवैसी जी आपकी नजर में शादी एक कान्ट्रैक्ट है, लेकिन हमारी नजर में मुसलमानों की शादी भी एक अटूट व पवित्र रिश्ता है. इसलिये हमारी नजर में आपकी मां बहन भी हमारी मां बहन है, लेकिन खेद है कि आप इस रिश्ते को खरीद फरोख्त का समझते हैं." नीरज गुप्ता @er_janta लिखते हैं, "तीन तलाक (मुस्लिम महिलाओ की सुरक्षा हेतु) बिल पास. इस देश का एक ही धर्म है भारत का संविधान. धर्म घर के भीतर होता है. घर के बाहर संविधान लागू होता है."

संगमेश मंगा @SangameshManga1लिखते हैं, "तीन तलाक पाकिस्तान और बांग्लादेश में बैन है. यह इस्लामिक राष्ट्र में भी बैन है. भारत में क्यों नहीं इस पर बैन लगना चाहिए." अखिलेश आनंद @akhileshanandd लिखते हैं, "तीन तलाक से डरने वालों गलत करो ही मत. तीन तलाक दो ही मत. कोई सजा नहीं मिलेगी! ये क्या लगा रखा है कि इससे इस्लाम खतरे में आ जाएगा." टि्वटर यूजर  शैलाभ @shailabhnandan लिखते हैं, "ऐतिहासिक! तीन तलाक निरोधक कानून राज्यसभा से पारित हुआ, मुस्लिम महिलाओं को कुप्रथा से मिली स्थायी मुक्ति."

तीन तलाक पर नेताओं के बोल

राज्य सभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया. उन्होंने तीन तलाक बिल के पास होने को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम बताया.

भाजपा की सहयोगी पार्टी जेडीयू सांसद वशिष्ट नारायण सिंह ने कहा, "मैं पूरी विनम्रता के साथ कहता हूं कि ना तो कभी इस विधेयक के समर्थन में बोलूंगा और ना ही इसका समर्थन करूंगा. इसके कारण हैं. प्रत्येक राजनीतिक दल की अपनी विचारधारा है और उन्हें उस पर काम करने की आजादी है."

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य से बिल लाया गया है, हम उसके खिलाफ है. इस कानून पर क्या अल्पसंख्यक समुदाय से चर्चा की गई थी, क्योंकि मोदीजी तो सबके विश्वास की बात भी अब करने लगे हैं. इसे अपराध बनाना ठीक नहीं है. हिन्दुओं में भी ऐसी प्रथाएं हैं. क्या उसके खिलाफ भी सरकार बिल लेकर आएगी. करीब 20 लाख हिन्दू महिलाओं को भी छोड़ दिया गया है. क्या मंत्रीजी उस पर भी कानून लाएंगे?

कांग्रेस सांसद अमी याग्निक ने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन सरकार से इसमें से आपराधिक पहलू हटाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, "पूरी तरह टूट चुकी महिला को अब अपने पति की जमानत के लिए, अपने गुजारा भत्ता की मांग के लिए, बच्चों पर अधिकार के लिए न्यायिक तंत्र से जूझना होगा. सर्वोच्च न्यायालय को इन खामियों के बारे में कभी नहीं बताया गया."

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा बीजेपी सरकार द्वारा मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की बात हास्यास्पद है. सरकार पहले अखलाक, पहलू खान, तबरेज की मां-बहनों को भी न्याय दिलाएं. 3 साल की सजा का प्रावधान अन्याय है. यदि भाजपा की सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानती है तो मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून लेकर आए.

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