सॉफ्टवेयर से मरीजों की जांच | मंथन | DW | 17.09.2014
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मंथन

सॉफ्टवेयर से मरीजों की जांच

घर पर ही आप अपना बीपी या ब्लड शुगर चेक कर लें और ये जानकारी इंटरनेट पर चली जाए. बात हो रही है, भविष्य की चिकित्सा सुविधा, टेलीमेडिसिन की.

मसूद करीमी इंटरनेट अस्पताल बनाना चाहते हैं. वह एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाना चाहते हैं जो मरीजों की जानकारी लेकर डेटाबेस तैयार करेगा. हालांकि जर्मनी के डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधक अभी पूरी तरह से तैयार नहीं. करीमी कहते हैं, "हर इनोवेशन के तीन पड़ाव होते हैं. पहले तो सब आपके आयडिया का मजाक उड़ाते हैं, फिर सब इसका विरोध करते हैं. तीसरे पड़ाव तक आते आते सबको आपका आयडिया सामान्य सा लगता है."

टेलीमेडिसिन में पेशेंट अपना ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन घर पर नापकर इंटरनेट से भेज सकेंगे. एक खास वेबसाइट आंकड़ों को देखेगी. गड़बड़ी मिलने पर पेशेंट का डाटा सीधे डॉक्टर के पास चला जाएगा. करीमी को पूरा विश्वास है कि सॉफ्टवेयर के सही होने पर 60 फीसदी तक मेडिकल टेस्ट बहुत सस्ते हो जाएंगे.

वैसे तो करीमी की कंपनी टेलेक्सियोम आईटी कंसल्टंसी है. इसमें 70 लोग काम करते हैं. लेकिन फिलहाल टेलीमेडिसिन फायदेमंद दिखाई दे रहा है.

जर्मनी में दिल की बीमारियों पर सालाना 40 अरब यूरो खर्च होते हैं, क्योंकि मरीज को बार बार डॉक्टर के यहां जाना पड़ता है और दवाएं भी महंगी हैं.

करीमी की वेबसाइट ऑनलाइन चेक अप करेगी. अगर मरीज के दिल की धड़कन ज्यादा तेज हो गई, तो दिल का दौरा पड़ने से बहुत पहले ही डॉक्टर के पास जानकारी पहुंच जाएगी. बूढ़े होते समाज की एक बड़ी जरूरत. करीमी का मानना है कि सबसे पहले मेडिकल इंश्योरेंस कंपनियों को ये सॉफ्टवेयर खरीदना चाहिए, "स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों को कह सकती है कि अगर हमारे ग्राहक इनमें से किसी एक वेबसाइट पर रजिस्टर करेंगे, तो बीमारी की रोकथाम हो सकेगी और कंपनियों को मरीजों पर कम खर्चने होंगे. मेडिकल बीमा कंपनियां ऐसे खूब पैसे बचा सकेंगीं."

उन्हें उम्मीद है कि अस्पताल भी इसका फायदा उठाएंगे. टेलीमेडिसिन का मार्केट बहुत बड़ा है, दुनिया भर में करीब सौ अरब यूरो का, लेकिन इस बाजार में घुसना आसान नहीं.

कई ऐसे डॉक्टर भी हैं जो सोचते हैं कि इस सॉफ्टवेयर के आने से उनकी नौकरी चली जाएगी.

लेकिन मैरहाइम एक्सरे विभाग के प्रमुख आक्सेल ग्रोसमन टेलीमेडिसिन में फायदा देखते हैं. वे कई क्लीनिकों के साथ मिल कर आपस में सीटी स्कैन साझा करते हैं. इससे बार बार जांच का खर्च बचता है. वे बताते हैं, "जब कोई मरीज एक से दूसरे डॉक्टर के पास जाता है तो काफी जानकारी बीच में खो जाती है. इस डेटा के नुकसान को रोका जा सकता है. अगर एक सेंट्रल डेटा सेविंग सिस्टम बना लें तो सच में ये डेटा और जानकारी खोने से बचाई जा सकेगी."

तीन से पांच साल में सटफ्टवेयर तैयार होगा. और वह ये तकनीक स्पोर्ट्स प्रेमियों को भी बेच सकेंगे. कंपनी के तकनीक प्रमुख आंद्रेयास कुम्फ जॉगिंग कर दिल की धड़कन देखते हैं, "सेंसर को आप जरूर और बेहतर कर सकते हैं ताकि इसे पहनने पर महसूस नहीं हो और इसे आप आराम से 48 घंटे या ज्यादा लगाए रख सकें. सॉफ्टवेयर पर भी अभी काम करना होगा ताकि डाटा का एनेलिसिस अच्छे से हो सके."

करीमी को उम्मीद है कि टेलीमेडिसन का उनका आयडिया खूब चलेगा और आने वाले दिनों में वह इससे फायदा उठा सकेंगे.

रिपोर्टः ग्रिट होफमन/एएम

संपादनः ईशा भाटिया


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