सुरक्षा परिषद के चुनाव में जर्मनी | दुनिया | DW | 12.10.2010
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दुनिया

सुरक्षा परिषद के चुनाव में जर्मनी

आज सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्यों के चुनाव हो रहे हैं. भारत का चुना जाना लगभग निश्चित लगता है, क्योंकि उसके खिलाफ कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं है, सिर्फ दो-तिहाई सदस्यों का अनुमोदन जरूरी है. जर्मनी भी उम्मीदवार है.

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वेस्टरवेले : भरोसे के साथ

पश्चिमी देशों की दो खाली सीटों के लिए जर्मनी के अलावा पुर्तगाल और कनाडा उम्मीदवार है. दो तिहाई सदस्यों के समर्थन के लिए चुनाव के कई दौर हो सकते हैं. जर्मनी की उम्मीदवारी की पैरवी के लिए विदेश मंत्री गीदो वेस्टरवेले न्यूयार्क गए हुए हैं. उन्होंने कहा कि जर्मनी प्रतिद्वंद्वियों के प्रति आदर के साथ चुनाव में भाग ले रहा है, लेकिन साथ ही भरोसे के साथ. उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता शांति और निरस्त्रीकरण के लिए सक्रिय

Abstimmung im UN Sicherheitsrat

होने का मौका होगा. न्यूयार्क जाने से पहले सुरक्षा परिषद में जर्मनी की संभाव्य भूमिका के सिलसिले में उन्होंने कहा था -

लोग हमारे बारे में जानते हैं कि हम सैनिक संयम की संस्कृति के अनुगामी हैं, साथ ही हम यह भी जानते हैं कि हम साथ मिलकर ही जलवायु रक्षा के लिए कुछ कर सकते हैं. ये मुद्दे सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए भी जरूरी हैं. - गीदो वेस्टरवेले

विपक्षी दल एसपीडी के लिए ये काफी नहीं हैं. यूरोपीय संसद में सोशल डेमोक्रेट दल के नेता मार्टिन शुल्त्ज ने कहा है कि यह बेहद अफसोस की बात है कि यूरोपीय संघ के दो सदस्य देश जर्मनी और पुर्तगाल प्रतिद्वंद्वियों के रूप में सामने आ रहे हैं, और यूरोपीय संघ फिर एकबार एकजुट नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि जर्मन सरकार कोई कायल करने वाली विदेश नैतिक स्ट्रैटेजी नहीं पेश कर पाई है. सिर्फ सदस्यता के लिए चुनाव में उम्मीदवार बनना काफी नहीं है.

मंगलवार शाम तक न्यूयार्क से नतीजे आने वाले हैं. जर्मनी अगर चुना जाता है तो उसके साथ भारत और जापान भी होंगे, जो सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा इस बार सुरक्षा परिषद में नए उभरी आर्थिक ताकत के रूप में जाने जानेवाले ग्रुप ब्रिक के चारों सदस्य, रूस, चीन, ब्राजील और भारत सुरक्षा परिषद में होंगे. परिषद के निर्णयों पर इसका क्या असर पड़ता है, देखना दिलचस्प रहेगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: ओं सिंह

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