″सुधरने के बजाए मामलों को दबा रहा है केरल का चर्च″ | दुनिया | DW | 20.02.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

"सुधरने के बजाए मामलों को दबा रहा है केरल का चर्च"

भारत में बलात्कार का मुकदमा झेल रहे बिशप के खिलाफ कैथोलिक चर्च ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है. उल्टा, आरोप लगाने वाली नन और उसका साथ देने वालों को शिकायत की सजा दी जा रही है.

Sister Anupama und die 4 anderen Schwestern, die gegen sexueller Missbrauch in der Kirche arbeiten (privat)

बाएं से सिस्टर अनुपमा, सिस्टर जोसिफीन, सिस्टर आल्फी, सिस्टर नीना रोज और सिस्टर आंसीतावो Sister Anupama, Sister Josephone, Sister Alphi, Sister Neena Rose and Sister Ancitawho)

2018 में केरल की एक नन ने जालंधर के एक बिशप फ्रैंको मुल्लकल पर यौन शोषण का आरोप लगाया. पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए नन अनुपमा समेत अन्य चार ननों ने बिशप के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था. महीनों बाद भी हालात तो नहीं बदले, उल्टा मुश्किलें और बढ़ गईं. बिशप के खिलाफ आवाज उठाने वाली नन का आरोप था कि बिशप मुल्लकल ने 2014 से 2016 के दौरान उसके साथ 13 बार बलात्कार किया. मामला अदालत तक पहुंच गया लेकिन बिशप मुल्लकल फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. इन सब के बीच बिशप के खिलाफ आवाज उठाने वाली ननों के लिए मुश्किलें अब भी कम नहीं हुई हैं. मिशनरी ऑफ जीसस कॉन्वेंट ने अनुपमा और उनकी सभी साथियों का केरल के कुराविलंगड कॉन्वेंट से तबादला कर दिया है. लेकिन मामले ने तूल पकड़ा तो ये ट्रांसफर ऑर्डर रद्द कर दिए. ननों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाले इस पांच सदस्यीय समूह की प्रवक्ता सिस्टर अनुपमा से डीडब्ल्यू ने बातचीत की. इस बातचीत के प्रमुख अंश.

डीडब्ल्यू: क्या केरल में चर्च के ताकतवर पादरियों और खिलाफ जंग छेड़ना मुश्किल रहा?

सिस्टर अनुपमा : जी हां, यह किसी चुनौती से कम नहीं था. हमने इस बीच काफी कठिन समय भी झेला है. बिशप फ्रैंको मुलक्कल के गिरफ्तारी के लिए छेड़े गए अभियान के बाद हम पर कड़ी निगरानी रखी गई. चर्च की ओर से जारी किए गए ट्रांसफर लेटर भी बदले की कार्रवाई थी क्योंकि हमने आवाज उठाई थी. जान का खतरा भी है. इस सब का मकसद बिशप के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हमें सजा देना था.  

क्या आप पर या अन्य ननों पर किसी तरह का दबाव है?

दबाव कई तरीकों से काम कर सकता है. हमारे आंदोलन और आवाजों को बार-बार दबाया गया. जो पैसे हमें मिल रहे हैं, वह बहुत कम है. हम पर नजर रखी जा रही है. ऐसे में तो हम स्वतंत्र होकर तो जी नहीं सकते. पिछले साल पादरी कुरियाकोस कट्टूथारा की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी. हमें उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोक दिया गया. पादरी कुरियाकोस हमें बिशप मुल्लकल के मामले में समर्थन दे रहे थे. 

क्या ये सारी कोशिशें चर्च की भूमिका को दबाने के लिए हो रही हैं?

केरल के चर्च संकट के दौर से गुजर रहे हैं. लेकिन चर्च में सुधार और सच्चाई बाहर लाने की बजाए ऐसे मामलों को दबाने की कोशिश की गई. हमारे चरित्रों पर सवाल उठाए गए, झूठे मामले में उलझाया गया. हम सब सच्चाई के साथ है. हम सभी नन के लिए सुरक्षित जगह चाहते हैं. पिछले दो सालों में ऐसे कई पादरियों के मामले सामने आए जिन पर यौन उत्पी़ड़न के आरोप लगे. हमारी लड़ाई हमारी उन बहनों के लिए है जो चुपचाप ये सब सह रही हैं. हम तब तक ये अभियान चलाएंगे जब तक सबको न्याय नहीं मिल जाता.

हाल में केरल की कैथोलिक बिशप काउंसिल ने यौन उत्पीड़न के मामलों में "जीरो टॉलरेंस" नीति संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं. इस बारे में आपकी क्या राय है?

दिशानिर्देश ही काफी नहीं है. इस वक्त ऐसे दिशानिर्देशों को जारी किया जाना भी अपने आप में सवाल खड़े करता है. हमें ऐसे सिस्टम की जरूरत है जो काम करें. हम ऐसे सिस्टम की बात कर रहे हैं जिसमें पारदर्शिता हो और जहां सभी सुरक्षित महसूस करें.

दुनिया भर के 100 से भी अधिक रोमन कैथोलिक बिशप एक सम्मेलन के लिए इटली में इकट्ठा होने जा रहे हैं. इस सम्मेलन को यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों को देखते हुए स्वयं पोप फ्रांसिस ने बुलाया है. आपकी इस बारे में क्या राय है?

मैं ऐसे कदमों का स्वागत करती हूं. ऐसे सम्मेलन कुछ ठोस समाधानों की उम्मीद तो जगाते ही हैं. रोमन कैथोलिक दुनिया में यौन शोषण के कई मामले सामने आए हैं. अंतिम लक्ष्य तो यही है कि इसका खात्मा हो. इसलिए जरूरी है कि बिशपों को इस मुद्दे पर बताया जाए, उन्हें एजुकेट किया जाए. पोप का इस तरह से सम्मेलन बुलाना दिखाता है कि यह मामला बहुत गंभीर है. 

आपको इस सम्मेलन से कोई खास उम्मीदें हैं?

इस मुद्दे पर गहराई से बिना किसी डर और संकोच के चर्चा होनी चाहिए. चर्चों की दीवारों के पीछे होने वाले शोषण के खुलासे अब बाहर हो रहे हैं. यह भी जरूरी है कि सारा ध्यान सिर्फ पश्चिमी देशों पर न दिया जाए. कड़े कदमों को उठाए जाने की जरूरत है जो ना सिर्फ सुरक्षा सुनिश्चित करें बल्कि पीड़िताओं को न्याय भी दें.

केरल का मामला सामने आने के बाद क्या वैटिकन की ओर से सहयोग या मदद की पेशकश की गई?

हम पोप के सहयोग की उम्मीद जरूर कर रहे थे, लेकिन इस मामले की जांच के लिए किसी को नहीं भेजा गया. यह एक ऐसा मामला था जिसने खूब सुर्खियां बटोरी. इन सब के बावजूद हमारी लड़ाई जारी रहेगी. जब तक इस मामले का हल नहीं निकलेगा हम कही नहीं जाएंगे. हम अपनी बहन के लिए न्याय मांग रहे हैं. हम यहां कुछ छोड़ कर तो कहीं नहीं जा रहे हैं.

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन
MessengerPeople