सीरियाई विपक्ष ने शांति वार्ता खटाई में डाली | दुनिया | DW | 30.05.2016
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दुनिया

सीरियाई विपक्ष ने शांति वार्ता खटाई में डाली

सीरियाई विपक्ष के प्रमुख मध्यस्थ ने यूएन-समर्थित शांति वार्ताओं से अपना इस्तीफा दे दिया. इसी के साथ जेनेवा शांति वार्ताओं के निकट भविष्य में आयोजित होने और सीरिया संकट का कोई हल निकलने की संभावना और भी कम हो गई.

सीरियाई विपक्ष के प्रमुख मध्यस्थ मोहम्मद आलोश ने जेनेवा में रुकी पड़ी वार्ता को सुरक्षा और मानवता दोनों के लिहाज से बहुत बड़ी असफलता बताते हुए इस्तीफा दे दिया. आलोश ने कहा, "अब तक हुई तीन राउंड की बातचीत असफल रही क्योंकि शासन की जिद और सीरियाई लोगों के ऊपर उनकी बमबारी और आक्रामकता अब भी जारी है." सऊदी-समर्थित विद्रोही गुट जैश अल-इस्लाम के सदस्य मोहम्मद आलोश ने यह बातें अपने ट्विटर अकाउंट पर जारी बयान में लिखीं.

मध्यस्थ आलोश ने सीरिया में "कब्जा हटाए जाने, मदद पहुंचाने, बंदियों को आजाद कराने और युद्धविराम को लागू कराने" जैसे कदम उठाने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा पर्याप्त कदम ना उठाने की आलोचना की है.

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार और गैर-जिहादी विद्रोहियों के बीच फरवरी में बहुत मुश्किलों के बाद एक युद्धविराम पर समझौता हुआ था. इससे शांति प्रक्रिया के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी थी लेकिन उसके बाद भी सीजफायर का उल्लंघन जारी रहा है और हिंसा की खबरें आती रही हैं.

इस्तीफा देते हुए मोहम्मद आलोश ने कहा कि इन वार्ताओं के कभी ना खत्म होने वाले दौर से सीरियाई लोगों को नुकसान हो रहा है. अगले दौर की वार्ता मई के अंत में होने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन अब तक ऐसी कोई तारीख घोषित नहीं हुई है. संयुक्त राष्ट्र के सीरिया के शांति दूत श्टाफान डे मिस्तुरा ने अगले दो-तीन हफ्तों में ऐसी वार्ता बुलाए जाने की संभावना से इंकार किया है.

इन शांति वार्ताओं का लक्ष्य एक ऐसे राजनीतिक समाधान पर पहुंचना था, जिससे पांच सालों से चले आ रहे सारियाई युद्ध को खत्म किया जा सके. अंत तक इन लड़ाई की चपेट में आने से करीब 2 लाख 80 हजार लोगों की जान चली गई है और कई लाख लोग बेघर हो गए हैं. राष्ट्रपति असद को पद से हटाने का मुद्दा इस विवाद के केंद्र में है. इस समय भी सीरिया में जगह जगह युद्ध छिड़े हुए हैं और नागरिक अपनी जान बचा कर भागने की कोशिशों में लगे हैं.

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