सिप्रास की लोकलुभावन राजनीति का अंत | ब्लॉग | DW | 15.07.2015
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ब्लॉग

सिप्रास की लोकलुभावन राजनीति का अंत

अब जब यूरोजोन नए राहत पैकेज के लिए राजी हो गया है, तो सिप्रास को दिखाना होगा कि वे कितने काबिल हैं. सुधारों को जल्द ही अमल में लाना होगा और ऐसा करना आसान नहीं होगा, कहना है डॉयचे वेले के स्पिरोस मोसोकोवु का.

वामपंथी दल के लफ्फाज नेता और देश के प्रधानमंत्री अलेक्सिस सिप्रास ने देश में सम्मान और लोकतंत्र को दोबारा स्थापित करने के वायदे के साथ जनवरी के अंत में हुए चुनाव में जीत दर्ज की. अंतरराष्ट्रीय देनदारों को लुभाने के लिए पिछले महीने अचानक ही हुए जनमत संग्रह के जरिए उन्होंने यह भी दिखा दिया कि उनके लोगों को उनमें कितना भरोसा है, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ. आखिरकार ग्रीस को बहुत से विरोधी मिल गए और सिप्रास का नजरिया देश की विपदा में तब्दील हो गया. रविवार को यूरोजोन की बैठक 17 घंटे तक चली. इस दौरान सिप्रास को यूरोजोन में ग्रीस की जगह बचानी थी और इसके लिए उन्हें कई कदम पीछे की ओर लेने पड़े, वे भी कड़ी परिस्थितियों के बीच.

आसान नहीं सरकार चलाना

इस सोमवार से ग्रीस के प्रधानमंत्री वह करने पर मजबूर हैं, जिसके लिए आम तौर पर नेताओं को चुना जाता है, सरकार चलाने के लिए. बंद पड़े बैंकों के मद्देनजर सिर्फ जनता की प्रतिष्ठा लौटाना ही काफी नहीं है और ना ही अर्थव्यवस्था की बुरी हालत को देखते हुए विदेशों में जा कर चीख-चिल्ला लेना काफी है. और देखिए, सरकार चलाना एक मुश्किल काम है. सिप्रास के मंत्रिमंडल में ही दो नेताओं ने स्पष्ट रूप से ईयू साझेदारों के साथ समझौते को खारिज कर दिया है और सीरिजा पार्टी के करीब 40 नेता बुधवार को संसद में इसके खिलाफ वोट देने की बात कह चुके हैं. सिप्रास के गठबंधन के उग्रदक्षिणपंथी साझेदार रक्षामंत्री पानोस कामेनोस ने संसद में अपना समर्थन दिखाने का वायदा तो किया है लेकिन साथ ही भविष्य में एकल सुधारों के विरोध में वोट देने का अधिकार भी अपने पास रख लिया है.

ग्रीस का सब कुछ दांव पर

कम से कम पिछले वीकेंड तक तो सिप्रास को समझ आ ही गया होगा कि इस खेल में वे देश का पूरा भविष्य दांव पर लगा रहे हैं. अब वे विरोध को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे. उग्रसुधारवादी नेताओं को अब जाना होगा, जल्द ही वे मंत्रिमंडल में बदलाव करेंगे. दरअसल ग्रीस के प्रधानमंत्री यह समझ नहीं पा रहे हैं कि सुधारों को मंजूरी दिलवाना महज पहला कदम है, असली काम तब शुरू होगा जब इन्हें अमल में लाया जाएगा. "व्यवहारवादी" और "आदर्शवादी" नेताओं में बंटी पार्टी सिप्रास के किसी काम नहीं आएगी और ना ही सीरिजा के बेहद पिछड़े राजनीतिक सिद्धांत, जिनके अनुसार सरकार सामाजिक सुरक्षा का एक विकल्प है, जो रईसों को राक्षस बताते हैं लेकिन उन्हीं के काम आते हैं और जो कामचोर प्रशासन को उपलब्धि के रूप में दर्शाते हैं. इन सबका एक आधुनिक और प्रतिस्पर्धी ग्रीस से जो कि यूरोजोन का सदस्य है, उससे कोई नाता नहीं हो सकता.

कुल मिला कर, बुधवार को संसद में वोट हो जाने के बाद भी देश अस्थिर ही रहेगा और यह एक नई शुरुआत के लिए बुरा शगुन होगा.


DW.COM

विज्ञापन