सस्ते स्मार्टफोन ने खोले प्रतिबंधों में जकड़े उत्तर कोरिया की कमाई के दरवाजे | दुनिया | DW | 26.09.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

सस्ते स्मार्टफोन ने खोले प्रतिबंधों में जकड़े उत्तर कोरिया की कमाई के दरवाजे

उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के असर से बचने के लिए स्मार्टफोन की भारी मांग को कमाई का जरिया बना रहा है. सस्ते हार्डवेयर का आयात तक उत्तर कोरियाई शासन अपने लिए धन जुटा रहा है.

अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि उत्तर कोरिया की एक चौथाई आबादी यानी कम से कम साठ लाख लोगों के पास आज मोबाइल फोन है. यही मोबाइल फोन बहुत से लोगों के लिए आमदनी का एक बड़ा जरिया बन गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने उत्तर कोरिया में मोबाइल फोन के बारे में 10 बागियों और कई विशेषज्ञों से बातचीत की. इसके साथ ही सरकारी मीडिया की रिपोर्टों, मोबाइल फोन के विज्ञापनों और दो उत्तर कोरियाई ब्रांडों के स्मार्टफोन का भी निरीक्षण किया.

उत्तर कोरिया के हथियार कार्यक्रम के कारण संयुक्त राष्ट्र ने 2017 में उस पर मोबाइल फोन का हार्डवेयर आयात करने पर पाबंदी लगा दी थी. उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने अपने भाषणों में वायरलेस नेटवर्कों को बढ़ावा दिया है जिन्हें कथित रूप से चीन की कंपनी हुआवे की मदद से तैयार किया गया है. किम जोंग उन ने हाल ही में एक मोबाइल फोन फैक्टरी का दौरा भी किया था जिसके बारे में सरकारी मीडिया ने खबर दी थी.

उत्तर कोरियाई मोबाइल फोन की कीमत 100 डॉलर से 400 डॉलर के बीच रहती है. मोबाइल सेवा के लिए टेलिकॉम मंत्रालय की दुकानो में रजिस्टर करना होता है. विज्ञापन बताते हैं कि 100 मिनट वाला प्रीपेड प्लान करीब 13 डॉलर में मिलता है. अगर आप दूसरे देशों से तुलना करें तो यह कीमत काफी ज्यादा है क्योंकि उत्तर कोरियाई लोगों की औसत आय करीब 100 डॉलर प्रति महीना ही है. पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया की तुलना में यहां औसत आदमनी महज 4 फीसदी है. एप्पल के आईफोन और इस तरह के दूसरे फोन यहां सार्वजनिक रूप से नहीं बिकते लेकिन कारोबारी और उत्तर कोरिया के अमीर लोग इन्हें देश के बाहर से खरीद कर स्थानीय सिमकार्डों के सहारे चलाते हैं. उत्तर कोरिया के फोन से केवल घरेलू नंबरों पर ही कॉल की जा सकती है. इसके साथ ही इसमें कुछ अनोखे सुरक्षा के फीचर भी होते हैं. यहां फाइल डानलोड करने पर सख्त पाबंदी है. अगर कोई ऐसा करना चाहे तो मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत संदेश दिखने लगता है, "अगर आपने गैरकानूनी प्रोग्रामों को इंस्टॉल किया तो आपका फोन ठीक से काम नहीं करेगा या डाटा खत्म हो जाएगा."

उत्तर कोरियाई स्मार्टफोन के बारे में रिसर्च कर रहे दक्षिण कोरिया के सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट ली युआंग ह्वान बताते हैं, "उत्तर कोरिया ने अपने मोबाइल फोन में इस तरह का अल्गोरिद्म और सॉफ्टवेयर लगा रखे हैं जो डाटा को कॉपी होने या ट्रांसफर से रोकते हैं." मैप, गेम या फिर इंग्लिश डिक्शनरी के मैप दिखाते हैं कि उन्हें उत्तर कोरिया के इंजीनियरों ने सरकारी उपक्रमों या फिर यूनिवर्सिटियों में बनाया है. ब्रिटेन की साइबर सिक्योरिटी कंपनी हैकर हाउस के मुताबिक उत्तर कोरिया ने मोबाइल फोन की निगरानी करने के लिए एक सर्विलांस टूल भी विकसित किया है. जब कोई यूजर गैरकानूनी या फिर सरकार की गैरसमर्थित मीडिया को अपने फोन में देखता है तो एक अलर्ट पैदा आता है और उस फोन में स्टोर हो जाता है.

कारोबार के लिए औजार

इतनी पाबंदियों पर भी उत्तर कोरिया की मार्केट इकोनॉमी के लिए मोबाइल फोन एक बड़ी संपत्ति है जो 1990 के दशक में आए भयानक अकाल के बाद से ही फल फूल रही है. एक उत्तर कोरियाई युवती सरनेम चोई ने बताया कि दो सूअर और चीन से तस्करी कर लाई कुछ जड़ी बूटियों को बेच कर उसने 1300 चीनी युआन जमा किए ताकि परिवार के लिए 2013 में एक मोबाइल फोन खरीद कर सके. उस वक्त इस परिवार को फोन की बड़ी  जरूरत थी. वह फोन का इस्तेमाल चीनी कपड़ों, शैंपू के खुदरा व्यापार में करती थी खासतौर से होलसेलरों से माल की डिलीवरी के लिए. चोई ने बताया, "ऐसा हुआ कि हमारे लिए आधिकारिक वेतन से ज्यादा कमाने का एक रास्ता बन गया था." चोई उसके बाद भाग कर दक्षिण कोरिया आ गई लेकिन उसके रिश्तेदार अब भी उत्तर कोरिया में हैं और उनकी सुरक्षा की खातिर ही उसने अपना पूरा नाम नहीं बताया.

उत्तर कोरिया से भाग कर आए 126 उत्तर कोरियाई लोगों के इस साल हुए सर्वे में 90 फीसदी लोगों ने कहा कि मोबाइल फोन से उनकी जिंदगी बेहतर हुई जबकि आधे लोगों ने कहा कि वो फोन का इस्तेमाल बाजार की गतिविधियों के लिए करते थे. दोनों कोरियाई देशों की एकता के लिए काम करने वाले संगठन वन कोरिया से जुड़े शिन मि न्येओ बताते हैं, "लाखों लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं, यह कुछ के लिए जीने की राह बनाता है तो कुछ के लिए यह धन को दिखाने का जरिया है. उनके मोबाइल फोन के बिल से सरकार को भारी कमाई होती है." सरकार को फोन के बिलों से कितनी कमाई होती है इसका ठीक ठीक आंकड़ा तो नहीं मिल सका लेकिन जानकारों का कहना है कि यह सरकार के लिए कमाई के सबसे बड़े स्रोतों में एक है.

प्रतिबंधों को अंगूठा दिखाते फोन

प्योंगयांग ब्रांड के दो स्मार्टफोन को देखने पर पता चला कि उनमें ताइवान की मीडिया टेक की चिप लगी हुई थी और यह गूगल के एक एंड्रॉयड का एक ऑपरेटिंग सिस्टम लगा था. साथ ही इसमें उत्तर कोरियाई सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर भी था. इसमें एक सिमकार्ड और एक मेमोरी कार्ड के लिए जगह बनी हुई थी. मेमोरी कार्ड के सीरियल नंबर से पता चला कि यह जापानी कंपनी तोशिबा का बनाया हुआ था.  फोन के आईडी नंबर से पता चला कि उसे चीनी कंपनी जियोनी ने बनाया था. गूगल का कहना है कि हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियां बिना किसी खर्च के ओपेन सोर्स एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर बना सकती हैं. इसका मतलब है कि उत्तर कोरियाई स्मार्टफोनों के लिए निर्यात के नियमों को तोड़ा जा रहा है. मीडिया टेक और तोशिबा ने रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा कि वे प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं और उन्होंने अपना कोई सामान उत्तर कोरिया नहीं भेजा है ना ही वे उत्तर कोरिया के साथ कोई व्यापार कर रहे हैं. जियोनी ने इस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

रिसर्चरों को कहना है कि उत्तर कोरिया किसी विदेशी कंपनी से सहयोग और तकनीक लिए बिना फोन नहीं बना सकता. इसका मतलब है कि वह व्यापार चलाने के लिए प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है. कस्टम के आधिकारिक आंकड़े दिखाते हैं कि उत्तर कोरिया ने 2017 में चीन से 8.2 करोड़ डॉलर के मोबाइल फोन का आयात किया. सोयाबीन के तेल और कपड़ों के बाद सबसे ज्यादा पैसे मोबाइल फोन के आयात पर ही खर्च किए गए हैं. 2018 में यह आंकड़ा प्रतिबंधों के कारण शून्य पर चला गया. बागियों और विशेषज्ञों का कहना है कि आधिकारिक आयात भले ही रुक गया लेकिन चीन और उत्तर कोरिया की सीमा पर ऐसा लगता है कि अनौपचारिक कारोबार जारी है. अमेरिकी खुफिया विभाग के रिटायर अधिकारी विलियम ब्राउन ने उत्तर कोरिया के मोबाइल फोन के हार्डवेयर पर रिसर्च की है. उनका कहना है,"चीन की सीमा से इन्हें बड़ी आसानी के साथ तस्करी के जरिए लाया जा सकता है."

चीन, उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा और अकेला सहयोगी है. चीन में मोबाइल फोन बनाने वाली कई कंपनियां हैं और इनमें कई ऐसी हैं जिनका नाम ज्यादा लोग नहीं जानते. चीनी अधिकारियों ने इस बारे में पूछे सवाल को उद्योग और सूचना तकनीक मंत्रालय के पास भेज दिया जिसने प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. चीन बार बार कहता है कि वह प्रतिबंधों को मानता है लेकिन साथ ही उत्तर कोरिया के साथ "सामान्य व्यापार" का बचाव भी करता है. बड़ी चीनी टेलिकम्युनिकेशन कंपनियों ने पहले भी उत्तर कोरिया को सप्लाई दी है. हुआवे ने 3जी नेटवर्क के लिए उपकरण दिए जब उत्तर कोरिया के दिवंगत नेता किम जोंग इल ने 2006 में चीनी कंपनी का दौरा किया था.

अमेरिका का वाणिज्य विभाग 2016 से ही हुआवे की इस बात के लिए निगरानी कर रहा है कि क्या उसने उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों की अवहेलन कर उसे सप्लाई दी है. चीन की एक और कंपनी जेडटीई नतो पिछले साल अमेरिकी प्रतिबंधों की अवहेलना कर टेलिकॉम उपकरणों को ईरान और उत्तर कोरिया भेजने के लिए 1 अरब डॉलर का जुर्माना देने के लिए भी तैयार हो गई.

एनआर/एके (रॉयटर्स)

_______________

हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन