सर्दी में सड़कों पर मरते लोगों को बचा पायेगी सरकार? | दुनिया | DW | 26.10.2017
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

सर्दी में सड़कों पर मरते लोगों को बचा पायेगी सरकार?

सर्दियां हर साल सैकड़ों लोगों की मौत की वजह बनती है. सरकार हर साल नये सिरे से रैन बसेरों का इंतजाम करती है, लेकिन हालात बहुत बदलते नहीं दिखते. इस बार फिर से नई कोशिशें हो रही हैं. क्या इस बार लोगों की जानें बच पायेंगी?

भारत में सर्दियों के दिन आने में अभी काफी वक्त है, लेकिन सरकार अभी से काफी सारे इंतजाम कर लेना चाहती है. सर्दियों के ठिठुरन भरे दिन अपने साथ जो शीत लहर लाते हैं, वो हर साल सैकड़ों लोगों की मौत की वजह बनती है. इस बार सरकार तैयारी कर रहे है कि बेघरों के लिए ट्रेन के पुराने कोचों को सर्दी के मौसम में रैन बसेरों की तरह इस्तेमाल करने के लिए तैयार करे. हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुश्किल इससे हल नहीं होने वाली.

इस महीने केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से कहा है कि पुरानी पैसेंजर ट्रेनों के कोचों में बिजली और सीवरेज की व्यस्था ठीक करके उन्हें शहरों में अलग अलग स्थान पर राहत शिविर की तरह इस्तेमाल करने के बारे में विचार करें. तेलंगाना के शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य के पास ऐसे 10 कोच होंगे. मंत्रालय के एक निदेशक एल कुमार का कहना है की उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि वह पांच से 10 कोचों में सारी व्यवस्थाएं करके उन्हें राहत शिविरों में बदलें. उन्होंने कहा कि शहरों में राहत शिविरों के तौर पर इमारत बनाने के लिए जमीन की कमी है.  हम सभी संभावनाओं को तलाश कर रहे हैं. तब तक यह अस्थाई हल है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के शहरों में लगभग 10 लाख बेघर लोग हैं. हालांकि, सामाजिक संगठनों का कहना है कि वास्तव में यह आंकड़ा तीन गुना ज्यादा है. यह आंकड़ा पिछले एक दशक में पांच गुना बढ़ गया है. हर साल बेहतर नौकरियों और पैसे कमाने की उम्मीद में हजारों लोग गावों और छोटे कस्बों से शहरों में पहुंच रहे हैं. लेकिन इस बीच सैकड़ों लोग सर्दी और गर्मी से अपनी जान गंवा देते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में 62 शहरों में हर 100,000 लोगों के बीच कम से कम एक रैन बसेरे का इंतजाम करने का आदेश दिया था. इन राहत शिविरों में पीने का पानी, सब्सिडी वाला भोजन, बिस्तर और लॉकरों का होना शामिल था. लेकिन इस आदेश का पालन बहुत ही कम राज्य कर रहे हैं.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने फंड होने के बावजूद राहत शिविरों का इंतजाम न कर पाने के लिए केंद्र सरकार को फटकार भी लगाई थी.

भारत सरकार का लक्ष्य है कि वह साल 2022 तक सभी लोगों को घर मुहैया करवाये. इस प्रकिया में लगभग 2 करोड़ नये घर बनाने होंगे. लेकिन इस योजना के क्रियान्वन में बहुत अधिक वक्त लगने की वजह से अब भी लाखों लोग सड़कों पर सोने और मरने को मजबूर हैं.

(एसएस/थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

DW.COM

विज्ञापन