सरदारबक्स से सरदारजी-बख्श बनने का झमेला | मनोरंजन | DW | 28.09.2018
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मनोरंजन

सरदारबक्स से सरदारजी-बख्श बनने का झमेला

दूर से देखा तो लगा कि स्टारबक्स कैफे है. पास गए तो पता चला ये सरदारबक्स है. दिल्ली में 25 जगहों पर ऐसा नजारा दिखा तो अमेरिकी कंपनी नाराज हो गई.

2012 में अमेरिका की मशहूर कैफे चेन स्टारबक्स ने भारतीय बाजार में निवेश किया. देश भर में स्टारबक्स ने 125 कैफे खोले. लेकिन तभी स्टारबक्स की नजर दिल्ली में सरदारबक्स पर गई. देखते ही देखते दिल्ली में सरदारबक्स के 25 कैफे खुल गए. ग्राहक स्टारबक्स और सरदारबक्स के नाम से कंफ्यूज होने लगे. सरदारबक्स के लोगो में भी स्टारबक्स जैसे ही रंग थे. हरा और काला, लेकिन उनकी जगह बदल दी गई. स्टारबक्स के लोगो में जहां बीच में एक समुद्री जलपरी है, वहीं सरदारबक्स के लोगो में बीच में सरदार जी हैं.

मिलती जुलती पहचान के चलते स्टारबक्स और सरदारबक्स के बीच विवाद खड़ा हो गया. मामला कोर्ट गया और अब अदालत ने सरदारबक्स को दो महीने के भीतर अपना नाम बदलने के आदेश दिया है. सरदारबक्स के सह संस्थापक सनमीत सिंह कालरा के मुताबिक, "हमारा नाम स्टारबक्स से मेल खा रहा था, इसीलिए कोर्ट ने उनके हित में फैसला दिया." सरदारबक्स ने "सरदारजी-बख्श" नाम का नया नाम चुना है.

 

ब्रांडिंग सलाहकार हरीश बिजूर के मुताबिक भारत में दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मिलता जुलता नाम रखना कोई नई बात नहीं है. बिजूर कहते हैं, "ऐसी नकलियों के सीमित लक्ष्य होते हैं और वे भारत में मशहूर ब्रांड की नकल कर कुछ समय के लिए लाइमलाइट में आना चाहते हैं."

ऐसा ही एक मामला 2015 में लुधियाना में भी सामने आया. वहां एक स्थानीय कारोबारी ने अपने रेस्तरां का नाम "मिस्टर सिंह बर्गर किंग" रखा. अमेरिकी फूड कंपनी बर्गर किंग मामले को अदालत में लेकर गई. वैसे भारत में "बर्गर सिंह" नाम का भी फूड आउटलेट है. देश में उसके 20 आउटलेट हैं. अब बर्गर सिंह ब्रिटिश मार्केट में कदम रखने की तैयारी कर रहा है.

(मोबाइल से लेकर मशीनें, विमान, हथियार और इमारतें. आज चीन सब कुछ बना रहा है. यहां तक कि दुनिया के मशहूर पर्यटन स्थलों की नकल भी उसने अपने यहां तैयार कर ली है.)

ओएसजे/आईबी (एएफपी)

 

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