समझौता एक्सप्रेस फैसले पर पाकिस्तान की नाराजगी | दुनिया | DW | 21.03.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

समझौता एक्सप्रेस फैसले पर पाकिस्तान की नाराजगी

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद समेत चार लोगों को बरी किए जाने पर पाकिस्तान ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. इस ट्रेन में 2007 में हुए धमाके में 68 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी थे.

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट केस पर अदालत का फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा हमले के बाद से बहुत तनाव चल रहा है. इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद ने ली और इसमें भारत के 40 जवान मारे गए थे.

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में सबूतों के आभाव में आरोपियों को बरी कर दिया गया. हरियाणा में पंचकुला की अदालत ने इस मामले में एक पाकिस्तानी मृतक की बेटी की याचिका को भी खारिज कर दिया जो चश्मदीद के तौर पर अपना बयान दर्ज कराना चाहती थी. बचाव पक्ष के वकील मुकेश गर्ग ने कहा, "अभियोजन पक्ष अपने केस को साबित करने में नाकाम रहा जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया."

पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश सचिव ने इसे "न्याय के साथ मजाक" करार दिया है. इस बारे में विरोध दर्ज कराने के लिए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय में भारतीय उच्चायुक्त को भी तलब किया गया. भारतीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय उच्चायुक्त ने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी तरह "पारदर्शी तरीके से" हुई है.      

कब कब टकराए भारत और पाकिस्तान

बरी किए गए लोगों में सबसे प्रमुख नाम स्वामी असीमानंद का है जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य रहे हैं. भारत की जांच एजेंसी एनआईए की चार्जशीट में कहा गया है कि 19 फरवरी 2007 को दो विस्फोटों के बाद समझौता एक्सप्रेस के दो डिब्बों में आग लग गई.

इसे एक आतंकवादी हमला करार दिया गया और इसमें कुल आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. एनआईए का कहना है, "ये लोग मंदिरों पर होने वाले जिहादी हमलों से नाराज थे." इसमें से एक व्यक्ति की दिसंबर 2007 में हत्या कर दी गई जबकि तीन लोग फरार हैं.

वीडियो देखें 02:06

कट्टरपंथियों ने पाकिस्तान को किया ठप

पाकिस्तान की नाराजगी

इस मामले में चारों आरोपियों को बरी किए जाने पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताते हुए कहा, "पाकिस्तान ने बराबर इस मामले में प्रगति ना होने और भारत की तरफ से इस घिनौने आतंकवादी कृत्य में शामिल लोगों को बचाने की कोशिशों का मुद्दा उठाया है. समझौता एक्सप्रेस घिनौने हमलों के 11 साल बाद आज आरोपियों को बरी किया जाना इंसाफ के साथ मजाक है और इससे भारतीय अदालतों की झूठी विश्वसनीयता भी खुल कर सामने आती है."

पाकिस्तान पहले भी आरोप लगाता रहा है कि समझौता एक्सप्रेस विस्फोट को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है. वहीं भारत भी 2008 के मुंबई हमलों के संदर्भ में पाकिस्तान पर इसी तरह के आरोप लगाता है जिनमें 166 लोग मारे गए थे.

भारत के एक प्रमुख मुस्लिम राजनेता असदुद्दीन औवेसी ने भी समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में आरोपियों को बरी किए जाने पर सवाल उठाया है. उन्होंने एक ट्वीट में कहा, "68 लोग मारे गए और किसी को जवाबदेह नहीं ठहराया गया. कैसे कहें कि इंसाफ हुआ है."

दूर करें तनाव

इस बीच चीन के प्रभाव वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने भारत और पाकिस्तान से बातचीत के जरिए अपना तनाव दूर करने को कहा है. एससीओ के नवनियुक्त महासचिव व्लादिमीर नोरोब का कहना है कि भारत और पाकिस्तान, दोनों ही आतंकवाद से लड़ने के लिए दृढ़ संकल्प हैं लेकिन अगर दोनों देश तनाव दूर नहीं करते हैं तो फिर "इस संगठन में उनकी भागीदारी असंभव होगी".

लंबी वार्ताओं के बाद भारत और पाकिस्तान को 2017 में इस संगठन में शामिल किया गया था. लेकिन बराबर ये सवाल उठते रहे हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव के इतिहास को देखते हुए वे कैसे एससीओ में एक साथ एक मेज पर बैठ पाएंगे. 

एके/एमजे (रॉयटर्स)

DW.COM

इससे जुड़े ऑडियो, वीडियो

विज्ञापन