सभी विवादों पर पहली बार खुलकर बोले मोदी | दुनिया | DW | 01.01.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

सभी विवादों पर पहली बार खुलकर बोले मोदी

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे वक्त बाद टीवी मीडिया को इंटरव्यू दिया है. न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में वह विवाद से जुड़े हर मुद्दे पर बोले. पढ़िए इंटरव्यू के अहम हिस्से.

किसानों की आफत और कर्ज न लौटाने वालों की मौज

नरेंद्र मोदी: ये झूठ बोलना, लोगों को भ्रमित करना, इसे मैं लॉलीपॉप कहता हूं. कहते हैं सब किसानों का कर्जा माफ किया, उनका सर्कुलर उठाकर देख लीजिए, ये झूठ है. हमें गंभीरता से सोचना होगा कि बार बार कर्ज माफी करने के बाद भी व्यवस्था में ऐसी क्या कमी है कि किसान कर्जदार बन जाता है और सरकार चुनाव और कर्जमाफी पर चलती है. आखिर ऐसा क्यों. हमें किसान को बीज से लेकर बाजार तक मजबूत बनाना होगा. वरना चुनाव और कर्जमाफी चलती रहेगी.

किसानों पर कर्ज होता क्यों हैं? हमें यह स्थिति बनानी है कि उसे कर्ज लेना ही न पड़े. हम वही कर रहे हैं. उत्पादन के बाद वैल्यू एडिशन, यह हमारे बड़े किसान अभियान का हिस्सा है. नए वेयरहाउस खोलने का काम किया है. बड़े स्तर पर कोल्ड स्टोरेज खोले जा रहे हैं. फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है.

जहां तक बात कर्ज लेकर भागने वालों की है, मैं आपको बताना चाहता हूं कि ऐसे लोगों से तीन लाख करोड़ रुपया वापस आया है.

देश के किसानों को समझाना मीडिया की भी जिम्मेदारी है. जिस किसान को मरना पड़ रहा है, वो इस कर्ज के दायरे से बाहर है. वह साहूकार के कर्ज में फंसा है. किसानों को मजबूत बनाने के लिए जितने कदम उठाने चाहिए, हम उठा रहे हैं.

ट्रिपल तलाक

ट्रिपल तलाक का अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लाया गया. उससे पहले नहीं. सुप्रीम कोर्ट के जज के प्रकाश में लाया गया है. हमने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि संविधान की मर्यादा में हम इसका समाधान करेंगे. आजादी के 70 साल बाद तक सरकारों ने इसे रोकने का भरपूर प्रयास किया है.

राम मंदिर

कोर्ट के अंदर कांग्रेस के वकील जो अड़ंगे डालते हैं, वह बंद हों. न्याय को न्याय प्रणाली के हिसाब से चलना चाहिए.

गाय के नाम पर हत्याएं, मुसलमानों में असुरक्षा की भावना

ऐसी कोई भी घटना सभ्य समाज को शोभा नहीं देती है. ऐसी घटनाओं के पक्ष में कभी आवाज नहीं उठनी चाहिए. ये गलत है, निंदनीय है. क्या ये 2014 के बाद शुरू हुआ है. ये समाज के भीतर आई कमी का सूचक है. एक भी घटना हो, वह गलत है.

महात्मा गांधी, विनोवा भावे और भारत के संविधान में जो कहा गया है, उसका आदर करना सबकी जिम्मेदारी है. एक दूसरे का आदर करना सबकी जिम्मेदारी है. समाज में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए.

सबका साथ, सबका विकास

18,000 गांव में बिजली नहीं थी. हम यह पूछने नहीं गए कि कौन सा गांव किस संप्रदाय है. हमने धर्म देखे बिना चार करोड़ घरों में बिजली पहुंचाई. मां की किस मजहब की है, उससे कोई मतलब नहीं है, हर मां तक गैस पहुंचनी चाहिए, ये कोशिश की.

केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा

ये दुर्भाग्य है कि लोकतंत्र में विरोधियों की आवाज दबाने के लिए कोई भी कृत्य कहीं पर होता है, मैं पीएम और बतौर बीजेपी नेता इसकी निंदा करता हूं. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए कोर्ट में जाना पड़ा. पश्चिम बंगाल, केरल में, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम और जम्मू कश्मीर में हमारे कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं. ये खतरनाक है. ये रास्ता सही नहीं है. ऐसी हिंसा किसी भी दल के द्वारा हो, किसी के खिलाफ हो, यह सरकार स्वीकार नहीं होगा.

2019 के चुनाव से पहले हिंसा

चुनाव हो तब हिंसा न हो, लेकिन बाकी समय हो, ये नहीं चल सकता है. राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षित करना होगा.

ट्रिपल तलाक में प्रगतिशील और सबरीमाला मुद्दे पर परंपरावादी

ऐसा क्यों है कि दुनिया के अंदर कई इस्लामिक देशों ने ट्रिपल तलाक पर बैन लगाया है, इसीलिए यह आस्था का मसला नहीं है. यहां तक कि पाकिस्तान में ट्रिपल तलाक पर रोक है. ये लिंग भेद और अन्याय का मामला है, ये धर्म का मामला नहीं है.

वहीं अगर मंदिर मामले की बात करें तो भारत में कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां पुरुष नहीं जा सकते हैं, लोग ऐसा ही करते हैं. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की महिला जज के फैसले को बारीकी से पढ़ा जाना चाहिए.

विपक्ष का महागठबंधन

महागठबंधन, ये क्यों बन रहा है. पांच साल हो गए, महागठबंधन ने देश के आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर एक स्वर में कोई बात नहीं कही है. ये खुद को बचाने के लिए मैदान में सहारा ढूंढ रहे हैं. उनका एक मात्र इरादा मोदी है. अखबार देखिए, पहला पेज, एक नेता बोलेगा मोदी ऐसा है, दूसरे में दूसरा कहता है मोदी ऐसा है. दस के दस पेज में कोई न कोई मोदी को गाली देता है. तेलंगाना में गठबंधन का क्या हाल हुआ, बुरी तरह विफल हुआ. असम में गठबंधन का हाल बुरा हो गया. त्रिपुरा में भी यही हुआ.

2019 का चुनाव, मोदी को हराना है

जनता चुनाव की दिशा और एजेंडा तय करने वाली है. जनता की उम्मीदों के साथ कौन है और कौन खिलाफ है, ये मापदंड बनने वाला है.

मोदी बनाम राहुल गांधी

देश की उम्मीदें और आकांक्षाएं कौन बढ़ाएगा और कौन उनमें रुकावट डालेगा, 70 साल का अनुभव है. अब जनता तय करेगी.

नाराज सहयोगी, राहुल के बाद शिवसेना के उद्धव ठाकरे का "चौकीदार चोर है" कहना

हमें पूर्ण बहुमत मिला, लेकिन हमने गठबंधन के धर्म का पालन किया. आज भी हम सबके साथ विचार विमर्श करके चलते हैं. लेकिन राज्य की अलग राजनीति होती है. हमारा साथी दल भी चाहता है कि वह आगे बढ़े, हम भी नहीं चाहेंगे कि वह आगे न बढ़े. हमारे साथी दल सुखी रहें. कभी साथी दलों को लगता है कि दबाव डालकर बात बन सकती है, कोई बातचीत से चलता है. सबका अपना अपना तरीका है. हमें प्रांतीय उम्मीदों को महत्व देना ही होगा.

देश के संस्थानों को कमजोर करने का आरोप, सीबीआर्ई और आरबीआई का मुद्दा

कांग्रेस को ये सब बोलने का कोई हक नहीं है. पीएमओ के खिलाफ कांग्रेस ने एनएसी बना दिया था. कैबिनेट निर्णय करे और पार्टी का एक नेता कॉन्फ्रेंस में उसे फाड़ दे, ये कौन सा सम्मान था. सीबीआई के मामले में लड़ाई सामने आई तो सरकार ने कहा कि आप दोनों छुट्टी पर चले जाइए. आरबीआई के गवर्नर पर कोई राजनीतिक दबाब नहीं था. पहली बार मैं बता रहा हूं कि उन्होंने छह महीने पहले मुझे छुट्टी के बारे में लिखा था. कोई राजनीतिक दबाव नहीं था.

ऑगुस्टा हेलिकॉप्टर घोटाला

अगर (क्रिस्टियान) मिशेल (जेम्स) को बचाने के लिए कांग्रेस का नेता वकील बन जाए तो क्या कहा जाए. आप अपनी पार्टी के वकील के जरिए उसकी मदद करने पहुंच जाते हैं.

राफाल मुद्दा, राहुल गांधी के आरोप

ये मुझ पर व्यक्तिगत आरोप नहीं हैं. ये सरकार पर हैं. संसद में मैंने विस्तार से इसका जबाव दिया है. सार्वजनिक मंच पर भी मैंने यह बताया है. सुप्रीम कोर्ट में भी यह मसला साफ हो चुका है. बाल की खाल निकाल कर देखी जा चुकी है. मीडिया को राहुल गांधी से भी सवाल पूछने चाहिए. उन्हें यह बोलने की बीमारी है तो मुझे बार बार उसमें उलझना चाहिए क्या?

देश मे चर्चा यह होनी चाहिए, कि आजादी के बाद लगातार रक्षा सौदे विवादों में क्यों आए हैं. ऐसे विवादों से सेना को दुर्बल कौन करता आया है. रक्षा तंत्र में दलालों का क्या काम है. मेरा गुनाह है यह है कि मैं मेक इन इंडिया के जरिए सेना की जरूरतें भारत में ही पूरी करना चाहता हू. तकनीकी ट्रांसफर कर रहा हूं.

मुझे आरोपों की चिंता करनी चाहिए, या देश की सेना की जरूरत को पूरा करना चाहिए? आरोप लगने दीजिए, मैं सेना के जवानों को उनके नसीब पर नहीं छोड़ूंगा. मैं उनकी सारी जरूरतें पूरी करूंगा. झूठे आरोपों से डरकर मैं देश की सेना को दुर्बल और निहत्था नहीं कर सकता हूं.

सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण

सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. लेकिन जब स्ट्राइक हुई तो सरकार के किसी मंत्री या प्रधानमंत्री ने बयान नहीं दिया. सेना के अधिकारी ने यह जानकारी दी. पहले पाकिस्तान को टेलीफोन पर जानकारी दी. फिर देश को जानकारी दी. लेकिन उसी दिन कुछ राजनीतिक पार्टियों के नेताओं सर्जिकल स्ट्राइक पर शक जताया. उन्होंने पाकिस्तान के रुख को दोहराया, सेना के लिए अनाप शनाप शब्द बोले. सर्जिकल स्ट्राइक पर इस तरह के बयान, वह गलत था. दूसरी बात, सैनिक के पराक्रम का जिक्र करना भी जरूरी है. चाहे वो 62 की लड़ाई हो या सर्जिकल स्ट्राइक. सैनिकों के गौरव का गुणगान राजनीतिकरण नहीं है.

युद्धोन्मादी होने का आरोप

पुरी सेक्टर में जिस तरह सेना के जवानों को मारा और जलाया गया. उस घटना ने मुझे बेचैन कर दिया. मेरे भीतर एक आक्रोश था. मैं केरल में था, वहां एक पब्लिक मीटिंग में मैंने इसका जिक्र भी किया था. मैं खुद को रोक नहीं पा रहा है. लेकिन मैं एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हूं, व्यक्तिगत गुस्सा उस पर हावी होना नहीं चाहिए. मैंने सेना के अधिकारियों से इस पर चर्चा की. वे मुझसे ज्यादा गुस्से में थे. देश के जवानों के मनोबल के लिए कुछ किया जाना था. मैंने सेना के अधिकारियों को प्लान बनाने के लिए कहा. दो बार डेट बदलनी पड़ी. मैं अपने जवानों के लिए फुल सिक्योरिटी चाहता था. मैं जानता हूं कि यह बहुत बड़ा रिस्क था. मेरे जवानों का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए. जवानों की स्पेशल ट्रेनिंग हुई. भूभाग और सारी अड़चनों की समीक्षा की गई. मैंने इस दौरान खुद भी काफी कुछ सीखा. फिर डेट तय हुई. कौन कहां बैठेगा. तय यह भी हुआ कि सूर्योदय से पहले हमारे लोगों को वापस आ जाना होगा. मैंने कहा था कि सफलता और असफलता की चिंता मत करना, लेकिन सूर्योदय से पहले वापस लौट आना. मैं अपने जवानों को मरने नहीं दूंगा, यह मेरा निर्देश था. छांट कर लोग चुने गए थे. इसमें समय भी लगा. मैं लाइव कॉन्टेक्ट में था. सुबह जानकारी आनी बंद हो गई. सूर्योदय होने तक मैं बेचैन हो गया. घंटे भर से खबर नहीं आ रही थी. पहले लगातार आ रही थी. सूर्योदय होने के बाद भी जब खबर नहीं आई तो मैं और बेचैन हो गया. सूर्योदय के भी एक घंटे बाद वो समय मेरे लिए बहुत कठिन था. घंटे भर बाद खबर आई, कि वापस हमारी सीमा में नहीं पहुंचे हैं, लेकिन अब अपने सेफ जोन में आ चुके हैं. सूर्योदय के दो घंटे बाद तक वापस लौटने का क्रम चला. फिर कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी की मीटिंग बुलाई. उसी में तय हुआ कि पहले पाकिस्तान को सूचना दो. फिर मीडिया को बताएंगे. पाकिस्तान को करीब 11 बजे टेलिफोन किया गया, वहां किसी ने फोन नहीं उठाया. फिर करीब साढ़े 11 बजे या पौने बारह बजे बात हुई, उसके बाद ही 12 बजे यहां मीडिया को बताया गया. इस ऑपरेशन से मुझे हमारी सेना की शक्ति का अहसास हुआ.

भविष्य में भी सर्जिकल स्ट्राइक

मैं इन बातों को मीडिया के सामने कहना ठीक नहीं मानता हूं. जहां यह रणनीति तय होती हैं, वहां ये सब हो रहा है. 65 की लड़ाई हुई, विभाजन के वक्त लड़ाई हुई, एक लड़ाई में पाकिस्तान सुधर जाएगा?

भारत पाकिस्तान संबंध, बंद बातचीत, कतारपुर कॉरिडोर

भारत ने कभी भी चाहे यूपीए सरकार हो या एनडीए, भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने बातचीत का विरोध नहीं किया है. यह हमारी सतत नीति है, मनमोहन, मोदी से फर्क नहीं पड़ता. हम सब विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है. हमारा इतना ही कहना है, बम बंदूक में बातचीत सुनाई नहीं देती. आतंकवाद बंद होना चाहिए. हमने पाकिस्तान पर दबाव बनाया. पाकिस्तान अलग थलग पड़ चुका है.

खूब विदेशी दौरे, खूब फोटो

आप हिसाब लगाएं तो सभी प्रधानमंत्रियों की इतनी ही यात्राएं होती हैं. अब कई अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुके हैं. उनमें जाना अनिवार्य हो गया है. ये मेरे साथ ही नहीं है, मनमोहन सिंह के समय भी था. मेरा सिर्फ इतना ही है कि मैं कहीं जाता हूं तो अगल बगल के दो तीन देशों में भी हो आता हूं. पहले जब जाते थे तो कोई नोटिस ही नहीं करता था. आज ऐसा नहीं है.

गंगा की सफाई

एक बेटे के रूप में मैंने ईमानदारी से प्रयास किया है. पांच राज्यों को लेकर साथ चलना है. राजीव गांधी के जमाने से इतने पैसे खर्च किए गए तो सफलता क्यों नहीं मिली? हमने इन कमियों का अध्ययन किया और अच्छी तैयारी से योजना बनाई है. 120 साल से गंगा में जो नाले का पानी डाल रहा था, वो अब जाकर बंद हुआ है. गंगा के किनारे बसे 4000 गांव खुले में शौंच से मुक्त हो चुके हैं.

अब गंगा से जुड़ने वाली नदियों को भी साफ करना है. उनकी सफाई भी बड़ा काम है. आपने अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें देखी होंगी कि गंगा के पानी में कुछ शुद्धता दिखाई पड़ने लगी है. हमने नगरपालिकाओं में सीवेज से जुड़े ठेकेदारों को भी जबावदेह बनाया है.

अगला चुनाव कहां से: बनारस या पुरी

यह खोजना मीडिया का काम है.

ओएसजे/एके

संबंधित सामग्री

विज्ञापन