सऊदी अरब में वेतन घटे, दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ीं | दुनिया | DW | 06.10.2016
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दुनिया

सऊदी अरब में वेतन घटे, दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ीं

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सद्दाम अल-याफाए की दुकान में केस में रखे हीरे तो खूब चमक रहे हैं, लेकिन उनका कारोबार अपनी चमक खो रहा है.

सऊदी अरब में अल-याफाए और उनके जैसे बहुत से खुदरा कारोबारी बिक्री में आ रही गिरावट से परेशान हैं. पिछले दिनों सऊदी कर्मचारियों की तन्ख्वाहों में हुई कटौती बताती है कि आने वाले दिन इन कारोबारियों के लिए और मुश्किल हो सकते हैं. ये सब हो रहा है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के गिरते दामों की वजह से, जिसका सीधा खमियाजा दुनिया से सबसे बड़े तेल उत्पादक सऊदी अरब को उठाना पड़ रहा है.

अल-याफाए रियाद के मुख्य इलाके में अल-अब्दुल वहाब जूलरी स्टोर में सेल्समैन हैं. उनका कहना है, "पिछले साल के मुकाबले आजकल बिक्री बहुत ढीली है.” दुकान में खरीददार ही नहीं हैं तो अल-याफाए के पास भी बात करने का समय है. वेतन में कटौती के सरकार के फैसलों की तरफ इशारा करते हुए वो बताते हैं, "काम बहुत ही घट गया है, खास कर इन फैसलों की वजह से. दिन पर दिन हालात खराब हो रहे हैं.”

सऊदी सरकार ने न सिर्फ कर्मचारियों को मिलने वाले कई भत्ते रोक दिए हैं बल्कि ओवरटाइम की भी सीमा तय कर दी है. इसके अलावा वेतन में होने वाली तीन से पांच प्रतिशत की सालाना वृद्धि को भी खत्म कर दिया है. इस कटौती से बड़े बड़े लोग भी नहीं बच पाए हैं. शाह सलमान ने अपने मंत्रियों के वेतन में 20 प्रतिशत की कमी कर दी है. बड़े अधिकारियों को अब कार नहीं मिलेगी जबकि टेलीफोन के बिल पर भी पाबंदी लगाई गई है.

वैसे इन कटौतियों से पहले ही अर्थशास्त्रियों को सऊदी अरब में आम लोगों के खर्चों की क्षमता और आर्थिक वृद्धि में गिरावट दिखनी शुरू हो गई थी. एक सेल्समैन का कहना है, "हमारे पास गोदाम में बहुत सारा माल पड़ा है क्योंकि बिक ही नहीं रहा है.” पास ही में कालीन का कारोबार करने वाले एक दक्षिण एशियाई की दुकान है. वो कहते हैं कि तीन या चार साल पहले कारोबार बहुत अच्छा था. हालांकि कई लोग अपनी मुश्किल तो बयान करते हैं, लेकिन अपना नाम जाहिर नहीं करना चाहते. एक व्यापारी ने कहा कि जब लोगों के पास पैसे ही नहीं होंगे तो वो खरीददारी कैसे करेंगे.

एएफपी ने कुछ सऊदी कर्मचारियों से भी बात करने की कोशिश की. इन्हीं से एक 35 वर्षीय खलीद अल-बिशी ने कहा कि यह समय सरकार का साथ देने का है और खर्चों में कटौती करने का है. वो कहते हैं, "हम अपनी बुनियादी जरूरतें तो पूरी कर ही सकते हैं. वहीं एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले 45 वर्षीय माजदी दामानहोरी कहते हैं कि सऊदी परिवारों को बचत करने की आदत नहीं और वो ऐशो आराम की जिंदगी जीना चाहते हैं. ऐसे में उनका कहना है कि सरकार को सख्त कदम उठाने ही पड़ेंगे. पेशे से टीचर 39 वर्षीय हादी अल औसेमी कहते हैं कि सऊदी लोगों को शादी या फिर बच्चे के जन्म पर पार्टियों में पैसा बहाने से बचना होगा.

सऊदी शाह की सलाहकार परिषद शूरा काउंसिल के एक सदस्य अब्दुल्ला अल-सादौन कहते हैं कि उन्हें और उनके साथियों को इस बात की खुशी है कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए उन्हें भी निशाना बनाया जा रहा है. वो कहते हैं, "हम लोग पिछले 50 साल से तेल के आदी हो गए हैं. अब तक जिस तरह हम खर्चा करते रहे हैं, वो तरीका बहुत खराब है.”

अप्रैल में सऊदी शाह सलमान के बेटे डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के लिए विजन 2030 योजना पेश की थी. इसमें निजी क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देना और 2020 तक बजट में वेतन की हिस्सेदारी को 45 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी करना शामिल है. वह तेल उत्पादन पर अर्थव्यवस्था की निर्भरता को कम करना चाहते हैं. 

एके/वीके (एएफपी)

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