″संन्यास न लें रिबेरी″ | खेल | DW | 15.08.2014
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खेल

"संन्यास न लें रिबेरी"

फ्रांसीसी फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष ने फ्रांक रिबेरी से अपील की है कि वह अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास के बारे में एक बार और विचार करें.

संघ के अध्यक्ष ले ग्राय ने फ्रांस फुटबॉल फेडेरेशन की वेबसाइट पर लिखा है, "इस तरह का फैसला, वह इतने अच्छे खिलाड़ी के लिए, किसी एक व्यक्ति के विश्लेषण का फल नहीं हो सकता और इसे अंतिम भी नहीं मान सकते. ये फैसला फ्रांसीसी टीम के गार्डियन और कोच का भी है."

बुधवार को रिबेरी ने एलान किया कि वह फ्रांस के लिए अब नहीं खेलेंगे क्योंकि वह अपना ध्यान अपने परिवार और बायर्न म्यूनिख पर लगाना चाहते हैं. ले ग्राय ने कहा, "फ्रांस अपने बेस्ट खिलाड़ियों से कैसे अलग हो सकता है? फ्रांक फ्रांसीसी टीम और ब्लू जर्सी से प्यार करते हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि वह अपने फैसले पर फिर से सोचेंगे."

31 साल के रिबेरी ने फ्रांस के लिए 81 मैच खेलें हैं और 16 गोल किए हैं. इस साल वर्ल्ड कप के दौरान कमर में समस्या के कारण वह नहीं खेल सके. हाल ही में घुटने की चोट से भी वह परेशान रहे.

2006 में अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले रिबेरी ने कहा कि इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने का यह सही समय है. और कि ऐसा लगता है कि फ्रांस उनके बगैर भी मजबूत है. जर्मन फुटबॉल मैग्जीन किकर को उन्होंने कहा, "मैं छोड़ रहा हूं. मैंने तय किया है कि अब वह समय आ गया है. आपको पता होना चाहिए कि निकलने का सही समय कब है."

बायर्न म्यूनिख के लिए विंगर के तौर पर खेलने वाले खिलाड़ी ने कहा, "समय है कि दूसरे आगे आएं. वर्ल्ड कप में आप देख सकते थे कि फ्रांस के भविष्य के बारे में चिंतिंत होने की जरूरत नहीं है."

2013 में वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर में रिबेरी तीसरे रहे और यूएफा 2012-13 में यूरोपीयन प्लेयर ऑफ द सीजन रहे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर से संन्यास लेने के निजी कारण बताए, "मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहता हूं और बायर्न की नौकरी पर अपना ध्यान लगाना चाहता हूं. और राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह को बढ़िया युवा खिलाड़ियों के लिए खाली करना चाहता हूं. काफी उतार चढ़ाव थे लेकिन अब जीवन में नए अध्याय का समय आ गया है.

रिबेरी के चेहरे पर अभी भी बचपन के कार क्रैश की चोटें देखी जा सकती है. उन्हें फ्रांस के खिलाड़ी सिनेदिन सिदान ने फ्रांसीसी फुटबॉल का गहना बताया था. 2006 में जर्मनी में हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान उनका कौशल देखा जा सकता था. उस साल फ्रांस फाइनल में पहुंचा था और इटली के हाथों हारा था.

चार साल बाद दक्षिण अफ्रीका में हुए वर्ल्ड कप में टीम बुरी तरह नाकाम रही. उस समय ट्रेनर रेमों डोमेनिच के विरोध में रिबेरी और अन्य खिलाड़ियों ट्रेनिंग सेशन का बहिष्कार कर दिया था. इसकी वजह से उन्हें दंड का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं करीम बेंजेमा और रिबेरी पर आरोप लगे थे कि उन्होंने किशोर सेक्स कर्मियों के साथ यौन संबंध बनाए. चार साल की जांच के बाद उन्हें आरोपों से बरी कर दिया गया.

एएम/ओएसजे (रॉयटर्स, एएफपी, डीपीए)

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