संजीवनी साबित होती गर्भनाल | विज्ञान | DW | 25.01.2012
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विज्ञान

संजीवनी साबित होती गर्भनाल

अपने नौनिहाल को हर बीमारी से बचाने के लिए माता पिता हर जतन करते हैं. डाक्टरों ने लंबी खोज के बाद गर्भनाल यानी प्लेसेंटा से कैंसर और लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करने में सफलता पा ली है.

कोख में बच्चे को नाभि के जरिए मां से जोड़ने वाली नाल को गर्भनाल यानी प्लेसेंटा कहा जाता है. शिशु के जन्म के बाद आम तौर पर गर्भनाल को दोनों तरफ से काट कर फेंक दिया जाता है लेकिन नई खोज ने गर्भनाल को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है. दुनिया के विकसित देशों की तरह अब भारत में गर्भनाल को सुरक्षित रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और जयपुर सहित देश के 25 से अधिक शहरों में तो बकायदा प्लेसेंटा बैंकिंग भी शुरु हो चुकी है.

गर्भनाल को सुरक्षित रखने का बड़ा लाभ यह भी है कि इससे बच्चे के साथ ही गंभीर रूप से बीमार परिवार के दूसरे सदस्यों का भी उपचार किया जा सकता है. गर्भनाल में मौजूद स्टेम कोशिकाओं की सहायता से ही डाक्टरों ने घातक बीमारियों के इलाज में सफलता हासिल की है. इन कोशिकाओं को प्लेसेंटा बैंक में कई साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

जागी नई उम्मीद

इस खोज ने उनके लिए भी नई उम्मीद जगाई है जो ऐसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और जिनका उपचार अब भी चिकित्सा जगत के लिए चुनौती है. ऐसे लोग न केवल खुद रोग मुक्त हो सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इससे बचा सकते हैं. भारत में ऐसे बैंको की शुरुआत हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन दूरगामी फायदों को देखते हुए इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है. देश के बड़े शहरों में प्लेसेंटा बैंकों में हर माह सैकड़ों दंपत्ति पहुंच कर अपने बच्चे की गर्भनाल की कोशिकाओं को संरक्षित करवा रहे है. लेकिन फिलहाल इसके लिए अच्छी खासी रकम खर्च करनी पड़ रही है.

गर्भनाल को काटे जाने के बाद उससे खून निकाला जाता है. इस खून को प्लेसेंटा बैंक भेजा जाता है. बैंक में माइनस 196 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर इसे तरल नाइट्रोजन की सहायता से सुरक्षित रख जाता है. खून को लगभग 600 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

200 से अधिक कोशिकाएं हो सकती है तैयार

मध्यप्रदेश की स्त्री रोग विशेषज्ञ और इंदौर मेडिकल कॉलेज की असोसिएट प्रोफेसर डॉ सुमित्रा यादव के मुताबिक गर्भनाल के खून से निकाली गईं इन कोशिकाओं को शरीर की मुख्य कोशिका या मास्टर सेल कहा जाता है. इन कोशिकाओं में मानव शरीर की 200 से अधिक कोशिकाओं को विकसित करने की क्षमता होती है. स्टेम कोशिकाओं की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि इनमें जीवन भर विभाजन की क्षमता होती है. इससे यह नष्ट हो चुकी या क्षतिग्रस्त हो चुकी कोशिकाओं की जगह भी ले सकती हैं और वहां नई कोशिकाएं तैयार कर सकती हैं.

सैकड़ों बीमारियों का इलाज

अब तक अस्थि मज्जा यानि बोन मैरो से कोशिकाएं लेकर इलाज करने वाले डाक्टर भी अब गर्भनाल से निकली कोशिकाओं को प्राथमिकता देने लगे हैं. डॉ यादव के अनुसार स्टेम सेल कोशिकाओं से खून संबंधित बीमारियों का कारगर इलाज किया जा रहा है. थैलेसिमिया जैसी खतरनाक बीमारियों में तो यह काफी फायदेमंद है. अन्य बीमारियों में इसके उपयोग पर रिसर्च जारी है.

फिलहाल दुनिया भर में स्टेम कोशिकाओं की मदद से 100 से अधिक बीमारियों का इलाज किया जा रहा है. इस क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिक लगातार शोध में जुटे हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जल्द ही इससे अन्य बीमारियों का भी इलाज किया जा सकेगा जो अब तक असाध्य है.

रिपोर्ट: जितेन्द्र व्यास

संपादन: ओ सिंह

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