श्टेफान स्वाइग: बिवेयर ऑफ पिटी | लाइफस्टाइल | DW | 01.01.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

लाइफस्टाइल

श्टेफान स्वाइग: बिवेयर ऑफ पिटी

श्टेफान स्वाइग ने अपने जीवनकाल में सिर्फ यही एक उपन्यास लिखा था. स्वाइग की बिवेयर ऑफ पिटी गलत तारीफ करने और दया दिखाने की एक अवसादपूर्ण कथा है.

पहले विश्व युद्ध के भड़कने से चंद महीनों पहले हंगेरियन-स्लोवाक सीमा पर एक सैन्य कस्बा. एक सज्जन युवा, लेफ्टिनेट अंटोन होफमिलर एक खूबसूरत युवती पर फिदा हो जाता है, जिससे उसकी नजरें कस्बे की बेकरी में टकरा गई थीं. युवती केकेसफाल्वा की नजदीकी रियासत का कुछ सामान ऑर्डर करने वहां गई थी.

होफमिलर, रियासत में नृत्य के एक कार्यक्रम में जाने के लिए आमंत्रण की व्यवस्था कर लेता है. लेकिन वहां, मकान मालिक की 17 साल की बेटी के साथ डांस की फरमाइश कर वो एक शर्मनाक बखेड़ा खड़ा कर देता है. वैसे वो ये गुजारिश अपनी विनम्रता में ही करता है क्योंकि वो देखता है कि लड़की बगल के कमरे में, गहमागहमी से दूर, बेरुखी से बैठी हुई थी.

अप्रत्याशित निमंत्रण पर लड़की के आंसू फूट पड़ते हैं. एक मासूम फरमाइश एक स्कैंडल बन जाती है. युवा लेफ्टिनेंट नहीं जानता कि लड़की लकवाग्रस्त है.

हमदर्दी के खतरे

इसके बाद चीजों को फिर से दुरुस्त करने की कवायद शुरू होती है. लेफ्टिनेंट रियासत में रोज का मेहमान बन जाता है, चिड़चिड़ाहट और कड़वाहट से भरी लड़की से वो दोस्ती करता है.

लड़की को उसका साथ रास आने लगता है और वो देखता है कि उसमें एक आश्चर्यजनक बदलाव आ रहा है. "जब हम जान लेते हैं कि हम दूसरे लोगों के लिए मायने रखते हैं, केवल तभी हम ये महसूस करते हैं कि हमारे अपने होने का कोई अर्थ और उद्देश्य है.”

वो इसे अपने जीवन का एक निर्णायक मोड़ मान लेता है. "घोड़े की लगाम खींचने के आकस्मिक क्षण के साथ ही ये शुरु हो गया था. आप कह सकते हैं कि तरस खाने के अजीबोगरीब जहर से तारी होने का वो मेरा पहला लक्षण था.”

दया की भावना के वशीभूत, वो उस लड़की एडिथ की देखभाल करने लगता है और उसे ये विश्वास दिला देता है कि वो बस ठीक होने ही वाली है. इस बात से लड़की का जीवन के प्रति साहस फिर से जागने लगता है. लेकिन इसका क्या कि उसकी ओर से दया-धर्म निभाने की कोशिश को अनुभवहीन लड़की, प्यार का इजहार समझने लगती है. इस तरह कहानी एक घातक मोड़ ले लेती हैः

"हमदर्दी एक दुधारी तलवार है. अगर तुम उसका इस्तेमाल नहीं जानते, तो उसे छुओ भी मत और इससे भी बड़ी बात ये है कि उसके खिलाफ तुम्हें अपना दिल कड़ा करना होगा.”

Filmstill Vor der Morgenröte

श्टेफान स्वाइग पर बनी फिल्म में स्वाइग की भूमिका में योजेफ हाडर

बीमार लड़की का आत्म-त्यागी फिजीशियन, डॉ. कोन्डोर इस बात को पारदर्शी तरीके से स्पष्ट करता है. करुणा का एक सेंटीमेंटल रूप होता है, जो "वास्तव में दिल की धुकधुकी या बेचैनी भर है,” और दूसरा गैरभावुक रूप होता है जो भावनाओं से खिलवाड़ नहीं करता है. आत्मसंतुष्ट अच्छाई और खुद का बलिदान कर देने की दृढ़ इच्छा के बीच, ये एक बहुत बड़ी विशिष्टता होती है.

भावनाओं का मनोविज्ञान

श्टेफान स्वाइग मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद के उस्ताद हैं. "हमदर्दी से होशियार” (बिवेयर ऑफ पिटी) उनका अकेला उपन्यास है, जो उनकी लेखनी के फेहरिश्त में देर से दाखिल हुआ. ऑस्ट्रिया का ये उपन्यासकार शुरुआत में लघु उपन्यासों के लिए मशहूर था और अपनी कविता, नाटक और ऐतिहासिक जीवनियों के लिए भी, जिनमें से कई रचनाओं का 50 से ज्यादा भाषाओं में अनुवाद हुआ.

स्वाइग का जन्म 1881 में हुआ था. वो एक यहूदी वस्त्र निर्माता के बेटे थे. वियना में एक समृद्ध उच्च मध्यवर्गीय माहौल में उनका लालन पालन हुआ था. वित्तीय आजादी की बदौलत ही, वे खूब घूम सके और अपने समय के कई महान बौद्धिकों के साथ जीवंत संपर्क के जरिए अपने वैश्विक नजरिए को विस्तृत कर पाए.

1920 के दशक में वो बेस्टसेलिंग लेखक बन गए थे. उस समय उनकी तुलना में सिर्फ थोमस मान जैसे लेखक ही आते थे. स्वाइग की यहूदी विरासत थी और शांतिवादिता और यूरोपीय विश्व नागरिक के रूप में उनका एक स्पष्ट नजरिया था. इस वजह से नाजी जर्मनी में स्वाइग की रचनाओं पर पाबंदी लगा दी गई थी. वो नाजी अधिकारियों की आंखों में खटकते थे.

एक त्रासद अंत

"हमदर्दी से होशियार” (बिवेयर ऑफ पिटी), स्वाइग ने लंदन में निर्वासन के दौरान लिखा था. नाजी क्रूरताओं के बीच 1934 में उन्हें भागना पड़ा था. 1939 में उनका उपन्यास प्रकाशित हुआ था. और ये बड़े पैमाने पर सफल रहा, खासकर इंग्लैंड में.

Filmstill Vor der Morgenröte

फिल्म में लेखक अपनी 27 साल की पत्नी के साथ

आज तक, श्टेफान स्वाइग पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले जर्मनभाषी लेखक हैं. इस महान मानवतावादी की अधिकांश रचनाएं, बदकिस्मती से टकराती हैं और एक त्रासद स्थगन में खत्म होती हैं.

इंग्लैंड में एक दुश्मन विदेशी के तौर पर नजरबंदी के डर से घबराकर स्वाइग 1940 में ब्राजील भाग गए थे. वहां उनका अवसाद और गहरा गया. वो और उनकी 27 वर्षीय पत्नी लॉट्टे ने फेरोनाल का ओवरडोज लेकर फरवरी 1942 में अपनी जिंदगियों का अंत कर लिया. "स्वेच्छा और होशोहवास में,” विदाई खत में स्वाइग ने लिखा था.

श्टेफान स्वाइगः "हमदर्दी से होशियार” (बिवेर ऑफ पिटी) (जर्मन शीर्षकः उन्गेडुल्ड डेस हेर्त्सेन्स), 1939

श्टेफान स्वाइग साहित्यिक पृष्ठभूमि से नहीं थे. वियना में 1881 में वो एक यहूदी व्यापारी परिवार में जन्मे थे. उन्होंने बुदलेयर और रोमां रोलां जैसे महत्त्वपूर्ण लेखकों की रचनाओं के अनुवाद किए. कविताएं, कहानियां और छोटे उपन्यास भी लिखे. पहले विश्व युद्ध के दौरान, स्वाइग ने "युद्ध की अवधि में स्वेच्छा से काम किया था,” जैसा कि उन्होंने एक युद्ध अभिलेख में दर्ज किया था, इसीलिए उन्हें आगे मोर्चे पर नहीं जाना पड़ा था. 1933 में नाजियों के पुस्तक दहन में उनकी रचनाएं भी थीं. स्वाइग देश छोड़ने पर विवश हुए. पहले इंग्लैंड फिर ब्राजील गए. फरवरी 1942 में उन्होंने आत्महत्या कर ली.

DW.COM

विज्ञापन