शोरगुल के बीच लोकसभा में लोकपाल | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 22.12.2011
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जर्मन चुनाव

शोरगुल के बीच लोकसभा में लोकपाल

भारी शोर शराबे और विरोध के बीच आखिरकार भारत की संसद में लोकपाल बिल पेश हो गया. लेकिन इससे पहले कार्यवाही को स्थगित भी करना पड़ा. इस बिल के लिए सत्र को बढ़ाया भी गया है लेकिन रजामंदी की कोई संभावना नहीं दिख रही है.

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टीम अन्ना के अलावा विपक्षी पार्टियां तो इस बिल के विरोध में थीं ही, आखिरी मौके पर लोकपाल कमेटी में अल्पसंख्यकों का मुद्दा हावी हो गया. इस मुद्दे पर संसद में बहस तेज हो गई और नियत समय यानी दोपहर दो बजे बिल पेश किया ही नहीं जा सका. पहले बिल को 11 बजे सुबह पेश किया जाना था. यह नहीं हो पाया तो इसे दोपहर दो बजे पेश करने का प्रस्ताव रखा गया. फिर भी ऐसा नहीं हो पाया और आखिरकार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे ही लोकपाल बिल को संसद के पटल पर रखा जा सका.

इससे पहले लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल और कुछ दूसरी पार्टियों ने इस बिल में अल्पसंख्यकों का कोटा नहीं होने पर बवाल मचा दिया. अगले साल कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं और लोकपाल के बहाने ही पार्टियां अपना राजनीतिक नफा नुकसान भी देख रही हैं. उसी सिलसिले में अल्पसंख्यकों का मुद्दा छा गया. कांग्रेस कोर कमेटी ने इसके बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बैठक की, जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हुए.

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अल्पसंख्यक भी शामिल

सरकार को इस मांग के आगे झुकते हुए लोकपाल कमेटी में अल्पसंख्यकों को भी शामिल किया गया. लेकिन ऐसा करते ही कल तक साथ दे रही बीजेपी भड़क उठी. वह इससे बिलकुल नाराज हो गई और पूरे बिल को ही वापस लेने का दबाव बनाने लगी.

किसी तरह बिल के पेश होने के बाद हंगामा और बढ़ने लगा. बीजेपी के नेता यशवंत सिन्हा ने बिल के प्रारूप में कई विसंगतियों का उल्लेख किया और कहा कि इस बिल में कुछ खास नहीं है. यशवंत सिन्हा ने कहा, "इस बिल में तो शब्दों के स्पेलिंग भी गलत हैं." दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी इस बिल का विरोध किया, जबकि आरजेडी के लालू यादव का कहना है कि सरकार को प्रदर्शन के दबाव में आकर कमजोर लोकपाल बिल नहीं पेश करना चाहिए. सिन्हा ने कहा, "आपने बिल को ही बदल दिया. यह ब्लैकमेल है."

सरकार की सफाई

इसके बाद प्रणब मुखर्जी ने विपक्ष की बातों का जवाब देते हुए कहा कि पहले भी कई सरकारों ने बिल को पेश करने की कोशिश की थी, जो हो नहीं सका. उन्होंने कहा, "इस बिल पर बहस होनी चाहिए, आंदोलन नहीं." उन्होंने कहा कि सरकार ने कोई हड़बड़ी में बिल पेश नहीं किया है.

संसद में इस मुद्दे पर बहस के लिए संसद के शीतकालीन सत्र को बढ़ा दिया गया है. अब 27 दिसंबर से तीन दिनों तक सत्र और चलेगा, जिस दौरान इसे पास कराने की कोशिश होगी.

हालांकि इसका मुख्य तौर पर विरोध कर रहे अन्ना हजारे पहले ही इस पर नाखुशी जाहिर कर चुके हैं. उनका कहना है कि सरकार ने एक कमजोर बिल तैयार किया है और वह इसे स्वीकार नहीं करते. इसके बाद वह 27 दिसंबर से एक बार फिर अनशन करने वाले हैं, जिसके बाद जेल भरो आंदोलन चलेगा. यानी हजारे के साथ साथ संसद के अंदर सरकार के खिलाफ दूसरा मोर्चा भी खुल चुका है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः महेश झा

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