शादी की उम्र घटाने से लड़कियों को खतरा | दुनिया | DW | 20.10.2014
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दुनिया

शादी की उम्र घटाने से लड़कियों को खतरा

बांग्लादेश में लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम आयु घटा कर 16 करने के बारे में विचार किया जा रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच की सीनियर रिसर्चर तेजश्री थापा का मानना है कि इससे लाखों लड़कियां जोखिम में पड़ जाएंगी.

तेजश्री थापा को लगता है कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना बाल विवाह की संख्या कम करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए शादी की न्यूनतम आयु को ही कानूनन कम कर देना चाहती हैं. यह कदम सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है. पेश है डीडबल्यू के साथ उनकी बातचीत के अंशः

डीडबल्यू: विवाह की न्यूनतम आयु कम करने के लिए बांग्लादेश की सरकार की क्या दलीलें हैं ?

तेजश्री थापा: प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वादा किया था कि वह बाल विवाह का आंकड़ा कम करेंगी. लगता है कि वह ऐसा करने के लिए शादी की न्यूनतम उम्र को ही घटा कर 16 कर देना चाहती हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम आयु 18 तय की गई है.

बांग्लादेश की लाखों लड़कियों के लिए इसका मतलब क्या है?

इसका मतलब है कि 16 साल से कम उम्र की लड़कियां तो कानून का सहारा ले सकती हैं लेकिन 16 से 18 साल की लड़कियों की शादी वैध होगी यानि वह बाल विवाह नहीं कहलाएगा. वैसे भी जिन लड़कियों की शादी कम उम्र में कर दी जाती हैं वह मुश्किल परिस्थितियों के कारण कानून की मदद नहीं लेती. चूंकि सुरक्षा के लिए तय किया गया यह छोटा सा विकल्प भी उनसे छीन लिया जाएगा तो उनके लिए खतरा और बढ़ जाएगा. इतना ही नहीं इससे सरकार को एक तरह से अनुमति मिल जाएगी कि वह सिर्फ 16 साल से कम उम्र वाली लड़कियों को ही बच्चों की श्रेणी में रखे. तो इससे बाल विवाह की सही संख्या अपने आप कम हो जाएगी.

क्या इससे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा?

विवाह की न्यूनतम आयु कम करने का मतलब ये नहीं है कि बच्चों की शादी नहीं की जा रही. यह एक पर्दा है जिसके तहत आप बाल विवाह को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक जो भी 18 साल से कम का है, वह बच्चा है इसलिए उसे कानून के अंतर्गत अतिरिक्त सुरक्षा मिलनी चाहिए.

गैर कानूनी होने के बावजूद बांग्लादेश में बाल विवाह की दर इतनी ज्यादा क्यों है?

बांग्लादेश में बाल विवाह की दर बहुत ज्यादा होने का कारण, अति गरीबी, भेदभाव, यौन हिंसा जैसे मुद्दे हैं. लेकिन यह सरकार की विफलता भी है कि वह अपने ही कानून लागू नहीं कर पाई है. बांग्लादेश में बाल विवाह पर 1929 में ही प्रतिबंध लगा दिया गया था लेकिन इसे कभी अच्छे से लागू नहीं किया गया. बाल विवाह के मामले में सरकारी अधिकारियों ने सिर्फ अपना मुंह ही नहीं फेरा, बाल विवाह को बढ़ावा भी दिया. उदाहरण के लिए अधिकारियों ने जाली जन्म प्रमाण पत्र स्वीकार किए या फिर जन्म पंजीकरण रजिस्टर से सही उम्र जांचने में लापरवाही बरती.

आप सरकार से इस मुद्दे पर क्या करने की अपील करना चाहती हैं?

चाइल्ड मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट में सुधार एक अच्छा कदम होगा, बशर्ते वह बेस्ट प्रैक्टिस और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक हो. लेकिन और महत्वपूर्ण ये होगा कि सरकार कानून लागू करने के प्रति राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखाए. विवाह की न्यूनतम उम्र कम करने का प्रस्ताव सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है कि क्या सरकार सच में बाल विवाह की प्रथा खत्म करना चाहती है या नहीं.

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