शादी करना अब भी पसंद करते हैं जर्मन | दुनिया | DW | 22.10.2014
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दुनिया

शादी करना अब भी पसंद करते हैं जर्मन

जर्मनी में बच्चों को अकेले ही पालने वाली महिलाओं और पुरुषों की संख्या रिकॉर्ड 20 फीसदी पर पहुंच गई है, पर अब भी 70 फीसदी लोग ऐसे हैं जो शादी करना पसंद करते हैं. बदलते ट्रैंड पर डॉयचे वेले के ग्रैहम लूकस की समीक्षा.

जर्मनी में सामने आए ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि जर्मन लोगों के लिए विवाह की संस्था अभी भी महत्वपूर्ण है. अधिकतर लोग इसलिए शादी करते हैं क्योंकि वे बच्चे चाहते हैं. यह खबर वैसे तो नई नहीं है, लेकिन नया ये है कि इसी समाज में करीब 20 फीसदी लोग ऐसे हैं जो अपने बच्चों को अकेले पाल रहे हैं, यानी बिना जीवन साथी या दोस्त के. 15 साल पहले से अगर इस स्थिति की तुलना की जाए तो यह छह फीसदी की बढ़ोत्तरी और एक नया रिकॉर्ड है.

रुढ़िवादी निश्चित ही इस आंकड़े से विचलित होंगे और विवाह की संस्था को बचाने के लिए पारंपरिक मूल्यों पर लौटने की अपील करेंगे. वैसे यह कहना काफी एकतरफा होगा. शादी से दूरी बढ़ने के कारण जीवन शैली में आए कई बदलाव हैं. एक ओर इसका सीधा संबंध बढ़ती निजी आजादी और दूसरी तरफ आधुनिक अर्थव्यवस्था की मांग के साथ देखा जा सकता है. अब स्थिति यह है कि 21वीं सदी के करीब 15 साल होते होते, 20 से 39 साल की उम्र के 35 फीसदी महिला और पुरुष विवाह को पुरानी संस्था मानते हैं. वे यह भी मानते हैं कि शादी आधुनिक जीवन की उनकी जरूरतों को पूरा नहीं करती.

सवाल उठता है कि ऐसा हुआ क्यों. पिछले डेढ़ दशक में महिला अधिकारों के मामले में तेजी से बदलाव हुए हैं. मुफ्त में मिलने वाली गर्भ निरोधक गोलियों ने उन्हें यह तय करने की संभावना दी है कि वह कब बच्चा चाहती हैं. कई देशों में गर्भ निरोधक कानून लड़कियों को गर्भपात करने की भी अनुमति देता है. इतना ही नहीं लड़कियां पहले की तुलना में उच्च शिक्षा पा रही हैं. तो स्वाभाविक है कि उन्हें नौकरी की ज्यादा संभावनाएं मिल रही हैं और वे पहले से ज्यादा पैसे भी कमा रही हैं. वह दिन बीत चुके हैं जब लड़कियों को अपने गांव के लड़कों से शादी करनी पड़ती थी ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो जाए. वह दिन भी काफी हद तक गुजर चुके हैं जब औरतों को विवाहित सिर्फ इसलिए बने रहना पड़ता था क्योंकि समाज में तलाक को कलंक के तौर पर देखा जाता था.

एक दूसरा आंकड़ा यह भी बताता है कि जर्मनी में अधिकतर मामलों में महिलाएं ही तलाक देती हैं. आज बाजार के कारण युवाओं को अक्सर घूमना पड़ता है, नौकरी के लिए दूसरे शहरों में जा कर रहना पड़ता है जबकि पुराने समय में वह इस उम्र में शादी कर लेते. दूरी के संबंध अक्सर टूट जाते हैं. जब युवा परिवार एक दूसरे से नौकरी के कारण अलग हो जाता है और परिवार में बच्चे हों तो पालन पोषण मां ही करती है. हालांकि यह भी उतना ही सही है कि पिछले सालों में तलाकशुदा पिताओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है जो अपने बच्चों की अकेले देखभाल कर रहे हैं. अक्सर ऐसे महिला और पुरुष भी साथ में रह रहे हैं जिनके अपने पहले से बच्चे हैं. ऐसे परिवार को 'पैच वर्क फैमिली' कहा जाता है.

जो बदलाव हो रहे हैं, उन्हें पलटना संभव नहीं है और रोकना भी नहीं. हम सिर्फ अपनी बेहतरी और सुख सुनिश्चित कर सकते हैं. जरूरी है कि बच्चों की देखभाल अकेले करने वाले माता-पिता को भी वही सुविधाएं मिलें, जो एक परिवार को मिलती हैं. अब समय आ गया है कि अकेले दम पर अपने बच्चों को संभाल रहे अकेले माता पिताओं के प्रति वर्जनाएं टूटें.

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