शराब को दी मात जर्मन फुटबॉलर ने | खेल | DW | 06.11.2012
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खेल

शराब को दी मात जर्मन फुटबॉलर ने

बुंडेसलीगा के खिलाड़ी ऊली (उलरिष) बोरोव्का ने एक नई किताब में खुद को शराबी बताया है. वह कहते हैं कि वह अकेले ऐसे जर्मन खिलाड़ी नहीं हैं. शराब से लड़ाई के बारे में बोरोव्का की डॉयचे वेले से बातचीत.

"मैं शीर्ष पर था लेकिन मैं बिलकुल खत्म हो चुका था." 50 साल के उली बोरोव्का अपने जीवन के बारे में बताते हैं. अपने करियर में वेर्डर ब्रेमेन और बोरुसिया मोएंशनग्लाडबाख के लिए उन्होंने 388 मैच खेले और जर्मन टीम के लिए छह बार कप्तानी की. मैदान पर सफल डिफेंडर रोजमर्रे में एक दूसरी लड़ाई से जूझ रहे थे. वह अपनी आत्मकथा में कहते हैं, "शराब में बीयर, वाइन, स्पिरिट, मैंने सब पिया, जो जो भी मैं पी सकता था." उनकी यह आत्मकथा इसी सप्ताह बाजार में आई है.

बोरोव्का कहते हैं कि आज बुंडेसलीगा के कुछ खिलाड़ी उनसे सलाह मांग रहे हैं. वह लत के शिकार हुए खिलाड़ियों की मदद के लिए तत्पर हैं. फुटबॉलर और शराब की लत के शिकार, इस दोहरे जीवन के बारे में बोरोवका ने किताब लिखी है. डॉयचे वेले से उनकी बातचीत के कुछ अंशः

डीडबल्यूः आप अपनी किताब में सफल खिलाड़ी से अकेले शराबी बनने के बारे में बात करते हैं. यह सब कहना आपके लिए कितना मुश्किल था?

बोरोव्काः किताब लिखना मुश्किल था. यह तो मुझे स्वीकार करना होगा. जब लिखा हुआ मैंने पढ़ा तो दो तीन सप्ताह के लिए मैं बहुत दुखी हो गया था.

किस कारण आप ये सब लिखने को प्रेरित हुए?

मुझे प्रतिक्रियाओं ने इसके लिए प्रेरित किया. जब मैंने पहली बार इंटरव्यू दिया. कई लोगों ने मुझे बधाई दी और कहा कि वह मेरी ईमानदारी की बहुत कद्र करते हैं. और कहानी लिखना थेरेपी का एक हिस्सा था. सच में.

ऐसा कैसे हुआ कि आपका जीवन पटरी से ऐसे समय उतरा जब आपके पास पैसा, परिवार, नौकरी सब कुछ था, जिससे किसी को भी ईर्ष्या हो सकती है?

मैं इस दबाव को बिलकुल नहीं उठा पा रहा था. मैंने खुद के बारे में एक छवि बना ली थी, मजबूत और सफल व्यक्ति की. लेकिन इस कारण मेरी कमजोरियों के लिए कोई जगह नहीं बची कि मैं कहीं अपनी भावनाएं जाहिर कर सकूं. ये कह पाना कि मैं उतना मजबूत नहीं हूं जितना आप सोच रहे हैं. तो चीजें हाथ से निकलने लगी. पीना लत में बदल गया. और यह एक वॉल्व की तरह भी काम करता जो मेरी कुंठा निकालता, दबाव कम करता. और फिर यह एक चक्रव्यूह बन गया.

Buchcover Uli Borowka Volle Pulle

ऊली बोरोव्का की किताब फोले पुले (पूरी ताकत से)

आपकी लत के कारण आपकी पत्नी और बच्चे चले गए. शराब ने आपको कैसे बदल दिया?

शुरुआत में तो प्रक्रिया धीमी थी. शराब की लत ऐसी बीमारी है जो लगातार बुरी होती जाती है. शुरुआत में मैं पीकर रिलेक्स हो जाता था. लेकिन जब मैं नशे में धुत होता तो मेरा मूड बिलकुल बदल जाता. मैं आक्रामक हो जाता और खुद पर दया दिखाता. इस कारण बहुत से लोग मुझसे दूर हो गए. मेरे दोस्त और मेरा परिवार. मैं इसे अब समझ रहा हूं.

इसके कारण आप पी कर गाड़ी चलाते थे और आत्महत्या की कोशिश भी आपने की. आपको आश्चर्य नहीं होता कि आप अभी भी जीवित हैं?

जी हां, बहुत किस्मतवाला हूं. अब मैं जीवन को बिलकुल अलग नजरिए से देखता हूं. मेरे पास छिपाने के कुछ नहीं. मैं अपनी लत के बारे में खुली बात करता हूं. यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. मुझे इसके बारे में अच्छी प्रतिक्रियाओं और टिप्पणियों को सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ.

आपने किताब में यह भी लिखा है कि कैसे आप दूसरे फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ शराब पीते थे. क्या आप ऐसा कहेंगे कि बुंडेसलीगा में शराब एक समस्या है?

पिछले सालों में चीजें बदली हैं. खिलाड़ियों पर पूरे समय नजर रहती है. इसलिए कोई खिलाड़ी अगर पीने जाएगा तो उस पर ध्यान जाएगा ही. लेकिन पिछले कुछ सप्ताह में कई खिलाड़ियों ने कहा है कि उन्हें भी ऐसी कुछ बातें शेयर करनी हैं. यह मैं सिर्फ रिटायर्ड खिलाड़ियों की बात नहीं कर रहा.

आपने ये आदत कैसे छोड़ी?

जब तक मैं अस्पताल नहीं पहुंचा, मैं मानता ही नहीं था कि मुझे शराब की लत है. तब भी मैं इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर रहा था. मैं सोच रहा था कि बस एक दो हफ्ते नियंत्रण करके मैं सामान्य स्थिति में पहुंच जाऊंगा. लेकिन थेरेपिस्ट ने घर पर संदेश भिजवाए कि मुझे तुरंत शराब छोड़नी होगी, नहीं तो कुछ ही महीने में मैं खुद को खत्म कर लूंगा. मैंने अस्पताल में उन लोगों को देखा जिनकी ऐसी हालत थी. और इससे मेरी आंखें खुल गईं.

फुटबॉलर के करियर को आप जब देखते हैं तो क्या आप कहेंगे कि आप जो चाहते थे वो सब आपने पा लिया?

मैं जितना चाहता था उससे ज्यादा मैंने पा लिया है. ईमानदारी से कहता हूं कि मैं कोई बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में शामिल नहीं था, लेकिन मेरे लक्ष्य बहुत ऊंचे थे और मैंने दूसरों से ज्यादा मेहनत की. मेरी इच्छाशक्ति मजबूत थी. इस कारण मैं वहां पहुंच सका. साफ बात कहूं तो इच्छाशक्ति और लड़ने का जज्बा ही था जिसकी मुझे लत छोड़ने के लिए जरूरत थी. इस लत से बाहर निकल पाने की सफलता खेल में मिली किसी भी सफलता से कहीं ज्यादा है.

इंटरव्यूः योशा वेबर/एएम

संपादनः महेश झा

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