व्यापमं घोटाला: राज्यपाल को हटाने की मांग | दुनिया | DW | 06.07.2015
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दुनिया

व्यापमं घोटाला: राज्यपाल को हटाने की मांग

मध्य प्रदेश के सनसनीखेज व्यावसायिक परीक्षा मंडल व्यापमं घोटाला मामले में उच्चतम न्यायालय राज्यपाल राम नरेश यादव की कथित संलिप्तता को लेकर उन्हें पद से हटाने संबंधी याचिका पर नौ जुलाई को सुनवाई करेगा.

मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू, न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ राय की खंडपीठ ने वकीलों के समूह द्वारा दायर याचिका की सुनवाई पर सहमति जताते हुए कहा कि वह व्यापमं घोटाले से संबंधित सभी याचिकाओं के साथ ही इस याचिका की भी सुनवाई नौ जुलाई को करेगी. याचिकाकर्ता ने राम नरेश यादव को हटाने और इस मामले में उनका बयान दर्ज किए जाने की मांग की है. इससे पूर्व शीर्ष अदालत ने मामले की जांच को पूरा करने के लिए विशेष जांच दल को और चार महीने का समय दिया था, जिसका गठन उच्च न्यायालय के एक आदेश के तहत किया गया था.

करोड़ों रुपये के व्यापम घोटाले में कई हाई प्रोफाइल पेशेवर, राजनेता और नौकरशाह आरोपी हैं. व्यापमं अध्यापकों, चिकित्सा अधिकारियों, सिपाहियों और वन रक्षकों जैसे विभिन्न पदों के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है. घोटाले की जांच कर रही एसआईटी का कहना है कि पद से हटते ही राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. इससे पहले व्यापमं भर्ती घोटाले में एसआईटी ने राम नरेश यादव और उनके बेटे शैलेष यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया था. लेकिन उच्च न्यायालय ने राज्यपाल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी थी क्योंकि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दायर नहीं की जा सकती. जांच एजेंसी राज्यपाल से पूछताछ कर सकती है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं कर सकती. यादव 2011 में मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने. जून 2016 में उनका कार्यकाल खत्म होगा.

शिवराज को बर्खास्त करने की मांग

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले को आजादी के बाद का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए इसकी उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग दोहराई और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बर्खास्त करने की मांग की. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि व्यापमं घोटाला आजाद भारत का संभवत: सबसे बड़ा घोटाला है. इस घोटाले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए चौहान को बर्खास्त करना चाहिए.

सुरजेवाला ने कहा कि व्यापमं घोटाले के कारण इससे संबद्ध 46 लोगों की अब तक संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है. इसी तरह से इस मामले में अब तक 140 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं, जिसमें करीब 3800 लोग आरोपी हैं. आरोपियों में से 800 फरार हैं. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि व्यापमं कितना बड़ा घोटाला है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें खुद मुख्यमंत्री चौहान, उनकी पत्नी, साली, रसोइया और उनके मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री उमा भारती, आरएसएस के पूर्व प्रमुख केएस सुदर्शन तथा संघ के वरिष्ठ नेता सुरेश सोनी का नाम भी इसमें सामने आया है.

व्यापमं घोटाला 2007 से 2013 के बीच हुआ. इस अवधि में मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और व्यावसायिक परीक्षाओं के लिए 167 परीक्षाएं आयोजित की गई. इस अवधि में इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए व्यापमं के माध्यम से 99 परीक्षाएं आयोजित की गईं. इस मामले में रिपोर्टिंग कर रहे टीवी पत्रकार अक्षय सिंह की दो दिन पहले उस समय अचानक मौत हो गई, जब वह घोटाले से संबद्ध नम्रता नाम की महिला की मौत के मामले में उसके परिजनों से बातचीत कर रहे थे. केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पक्षकार की मौत की स्वतंत्र रूप से जांच कराने की मांग की है.

आईबी/एमजे (वार्ता)

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