वेदांता प्रोजेक्ट नामंजूर होने के फैसले का स्वागत | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 25.08.2010
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जर्मन चुनाव

वेदांता प्रोजेक्ट नामंजूर होने के फैसले का स्वागत

बहुराष्ट्रीय वेदांता कंपनी की एक खनन परियोजना को ठुकराने के भारतीय सरकार के फैसले का मानवाधिकार संगठनों ने स्वागत किया है. प्रोजेक्ट से आदिवासी समुदाय के जीवन का आधार खतरे में पड़ने की आशंका.

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सर्वाइवल इंटरनेशनल संगठन ने इस फैसले को एक अप्रत्याशित जीत कहा है, जबकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे एक अभूतपूर्व कदम कहते हुए इसका जोरदार ढंग से स्वागत किया है. एमनेस्टी इंटरनेशनल के एशिया प्रशांत प्रभाग की डिप्टी डायरेक्टर मधु मलहोत्रा ने कहा है कि अब कंपनियों की ओर से गारंटी दी जानी चाहिए कि प्राकृतिक व मानवीय पर्यावरण की रक्षा के बिना वे दूसरे स्थानों में ऐसी परियोजना नहीं शुरू करेंगे.

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जेम्स कैमेरोन की फिल्म अवतार में पैंडोरा ग्रह के नवी जीवों की अवस्था के साथ तुलना करते हुए सर्वाइवल इंटरनेशनल नामक संस्था इन आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ रही थी. पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि मंत्रालय की सलाहकार समिति की सलाह मानते हुए इस परियोजना को अनुमति नहीं दी जा रही है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की रक्षा तथा वेदांता की ओर से अतीत में किए गए नियमों के उल्लंघन के कारण यह फैसला लिया गया है.

भारतीय मूल के उद्योगपति अनिल अग्रवाल का ब्रितानी बहुराष्ट्रीय उद्यम वेदांत उड़ीसा के न्यामगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट का खनन करने चाहता था. डोंगिरया कोंध नामक आदिवासियों की किंवदंतियों के अनुसार ये पहाड़ियां उनके देवता नियाम राजा का आवास है.

साथ ही वे जीवन बसर करने के लिए इस इलाके पर निर्भर हैं. उड़ीसा सरकार इस परियोजना की स्वीकृति के लिए जीतोड़ कोशिश कर रही थी. केंद्र सरकार के फैसले पर प्रदेश सरकार ने अपनी निराशा व्यक्त की है.

एक वक्तव्य में पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने यह भी कहा है है वेदांता कंपनी की ओर से पर्यावरण रक्षा, वन्य संरक्षण और वन्य अधिकार अधिनियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि यह कोई भावनात्मक या राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि कानूनी आधार पर लिया गया फैसला है.

मंत्रालय की सलाहकार समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि बॉक्साइट के खनन से इस क्षेत्र के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा, पानी की आपूर्ति बेहद घट जाएगी, जिससे यहां रहने वाले लोगों और प्रकृति पर भयानक असर पड़ेगा. इसके अलावा उनकी रिपोर्ट में इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया गया था कि अभी अनुमति न मिलने के बावजूद वेदांता कंपनी ने इस इलाके में 26 हेक्टर जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, और परियोजना के लिए एक लाख बीस हजार पेड़ काटने पड़ेंगे.

वेदांत कंपनी राजस्थान में तेल समृद्ध मंगला क्षेत्र में सक्रिय केयर्न इंडिया उद्यम के 51 से 60 प्रतिशत तक शेयर की खरीद की योजना बना रही है. खबर है कि इस योजना को विफल करने के लिए सरकार शेयरों की खरीद में आगे आना चाहती है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: एस गौड़

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