विवादों के साए में नाटो मना रहा है सत्तर साल का जश्न | दुनिया | DW | 04.12.2019
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दुनिया

विवादों के साए में नाटो मना रहा है सत्तर साल का जश्न

सत्तर साल की उम्र नाज करने की उम्र होती है. नाटो इस साल अपने गठन की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है. इसके विपरीत लंदन में हो रहे नाटो के शिखर सम्मेलन में सत्तर के जश्न के बदले सदस्यों के बीच आपसी दरार दिख रही है.

पश्चिमी सैनिक सहबंध नाटो की दो दिनों की बैठक की शुरुआत में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों के बीच तीखी बहस हो गई. माक्रों ने साफ कर दिया है कि वे नाटो पर दिए अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे. दरअसल पिछले दिनों माक्रों ने नाटो को 'ब्रेन डेड' कहा था. ट्रंप ने नाटो की आलोचना के लिए माक्रों पर जमकर निशाना साधा. बैठक के पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने माक्रों के बयान को "बहुत ही बुरी टिप्पणी" करार दिया. संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने माक्रों के बयान को "अपमानजनक" बताया. इसी संवाददाता सम्मेलन में माक्रों भी मौजूद थे, ट्रंप ने कहा, "‘नाटो एक बड़े मकसद को पूरा करता है. मेरा मानना है कि यह बहुत ही अपमानजनक है और भद्दा बयान है."

माक्रों ने इसके जवाब में कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं, उन्होंने साथ ही सीरिया से अमेरिका द्वारा सेना की वापसी को लेकर निराशा जताई. अमेरिका ने नाटो के सदस्य देशों की सलाह लिए बिना उत्तर-पूर्वी सीरिया से अपने सैनिक हटा लिए थे. इसके तुरंत बाद नाटो के एक और सदस्य तुर्की ने पश्चिमी देशों के सहयोगी कुर्द लड़ाकों पर हमला कर दिया था. कुर्द लड़ाकों ने इस्लामिक स्टेट को हराने में पश्चिमी सेनाओं की मदद की थी.

ट्रंप और माक्रों के रिश्ते

ट्रंप और माक्रों के रिश्तों में बीते तीन साल से उतार-चढ़ाव का माहौल है. ट्रंप 2017 में पेरिस में बास्ताई दिवस समारोह में हिस्सा ले चुके हैं और माक्रों पिछले साल ट्रंप के बुलावे पर अमेरिका का दौरा कर चुके हैं. लेकिन पिछले महीने ट्रंप के उत्तर-पूर्वी सीरिया से सेना वापसी के फैसले के बाद रिश्तों में नया तनाव आ गया है. ट्रंप और माक्रों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह दरार साफ नजर आई. दोनों देश इस बात को लेकर भी चिंतित है कि तुर्की रूस से एंटी एयरक्राफ्ट गन खरीदने की योजना बना रहा है.

इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोवान और अमेरिकी राष्ट्रपति की मुलाकात में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है. तुर्की भी नाटो का सदस्य देश है. वहीं एर्दोवान ने कहा है कि अगर नाटो कुर्द संगठनों के खिलाफ लड़ाई में साथ नहीं देता है तो वह बाल्टिक क्षेत्र में नाटो की योजना का विरोध करेगा. तुर्की कुर्द गुटों को आतंकी मानता आया है. माक्रों ने एर्दोवान पर पलटवार करते हुए कहा, "हमें खेद है कि हमारे पास आतंकवाद की समान परिभाषा नहीं है."

तुर्की की धमकी

इसी दौरान ट्रंप ने एर्दोवान के बचाव में कहा कि अक्टूबर में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तुर्की ने ''बहुत मदद'' की, इस कार्रवाई में इस्लामिक स्टेट का मुखिया अबु बकर अल बगदादी मारा गया था. अमेरिका के विशेष कमांडो दस्ते ने सीरिया-तुर्की सीमा पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था. ट्रंप ने कहा, ''हम उस क्षेत्र से उड़े थे जिस पर पूरी तरह से तुर्की और उसकी सेना का नियंत्रण था. हमने उन्हें यह नहीं बताया कि हम कहां जा रहे हैं और क्यों जा रहे हैं, वास्तव में उन्होंने हमारा समर्थन किया.''

आईएस के लड़ाकों की यूरोप में वापसी के सवाल पर भी ट्रंप और माक्रों के बीच तनाव दिखा. सीरिया और इराक में पकड़े गए इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों की यूरोप वापसी पर फ्रांस द्वारा प्रतिबद्धता को लेकर ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा, "क्या आप आईएस के कुछ और लड़ाके लेना पसंद करेंगे, मैं आपको दे सकता हूं. आप चाहे तो सभी को ले सकते हैं." इस पर माक्रों ने कहा ''थोड़ा गंभीर हो जाइए.'' माक्रों ने कहा, "हमारा प्रमुख उद्देश्य आईएस को हराना है, खेद के साथ कहता हूं कि यह अब तक संभव नहीं हो पाया है.''

एए/एमजे (एपी, एएफपी)

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