विधान सभा चुनाव हैं सुधारों की चाबी | दुनिया | DW | 15.10.2014
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दुनिया

विधान सभा चुनाव हैं सुधारों की चाबी

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद होने वाले ये पहले विधानसभा चुनाव हैं. चुनावों परिणामों से सीधे जुड़े हैं आर्थिक सुधार. उधर आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारत की आर्थिक बेहतरी अभी भी अस्थिर है.

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों में बड़ी पार्टी बन कर तो उभर सकती है लेकिन बहुमत नहीं पा सकेगी. विधान सभा चुनाव राज्य सभा की सीटों से जुड़े हैं, जहां अभी बीजेपी का बहुमत नहीं है. भले ही राज्य सभा, लोकसभा की तुलना में कम ताकतवर हो लेकिन प्रस्ताव पारित करवाने में उसकी भूमिका अहम होती है. अगर राज्यसभा में बीजेपी की सीटें बढ़ती हैं तो इससे नए सुधारों को पारित करने में तुलनात्मक रूप से आसानी हो जाएगी. प्रधानमंत्री मोदी ने मतदान केंद्र खुलने के साथ ट्वीट किया, "मैं हरियाणा और महाराष्ट्र के लोगों से अपील करता हूं कि वह अपना मत दें. युवाओं को दिशा दिखानी चाहिए और सुनिश्चित करें कि रिकॉर्ड मतदान हो."

कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि चुनावों को देखते हुए ही सरकार ने प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ाने या डीजल से सब्सिडी हटाने जैसे फैसलों को रोक रखा है. दोनों ही पर फैसला चुनावों के बाद लिया जाएगा. इससे पहले हुए उपचुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन कमजोर रहा था. इससे सबक लेकर मोदी ने भारत की आर्थिक गतिविधियों के गढ़ महाराष्ट्र और गुड़गांव वाले राज्य हरियाणा में जोरदार तरीके से प्रचार किए और कई रैलियों को संबोधित किया. इन दोनों ही राज्यों में अब तक बीजेपी कभी भी मुख्य ताकत नहीं रही है. इन दोनों चुनावों के नतीजे रविवार को आने हैं.

मुंबई में रहने वाली एक महिला सुविधा कामथ का मोदी के बारे में कहना है, "जब से वह सत्ता में आए हैं, सब्जियों जैसी चीजों की कीमत नहीं बढ़ी है. हम मोदी को इतनी जल्दी जज नहीं कर सकते. उन्हें खुद को साबित करने के लिए कम से कम एक दो साल दिए जाने चाहिए."

बड़े सुधारों की संभावना

मुंबई में आईएनजी वैस्य बैंक के साथ काम कर रही अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज कहती हैं, "बड़े सुधार पेश करने की बजाए मोदी अभी तक अर्थव्यवस्था में रिपेयरिंग ही कर रहे हैं और अंतर पाटने की कोशिश कर रहे हैं. अगर विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी की पकड़ मजबूत होती है तो निश्चित ही मोदी की सरकार से अहम सुधार करने की अपेक्षा की जा सकती है."

भले ही अब तक मोदी सरकार वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई हो जैसा निवेशक सोचे बैठे थे, लेकिन फिर भी निवेशक सकारात्मक बने हुए हैं.

विशेषज्ञ चाहते हैं कि मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण नीति पर काम करे, मूलभूत संरचना बेहतर बनाए और 2016 तक सामान और सर्विस पर राष्ट्रीय कर लागू करे. इस सबके लिए जरूरी होगा कि उसे राज्य सरकारों का समर्थन हासिल हो. आने वाले तीन सालों में बीजेपी को और कई चुनावों का सामना करना है. अगले साल झारखंड और बिहार में चुनाव होने हैं और 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के महत्वपूर्ण चुनाव भी.

एएम/आरआर (रॉयटर्स, एएफपी)

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