वायरस के कारण झेलनी पड़ सकती है कंडोम की कमी | दुनिया | DW | 08.04.2020
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दुनिया

वायरस के कारण झेलनी पड़ सकती है कंडोम की कमी

सेहत, रोजी रोटी और अर्थव्यवस्था पर मंडराते खतरों के अलावा दुनिया के सामने जल्द ही एक और जोखिम पैदा होने की संभावना जताई जा रही है. यूएन इसके “तबाह करने वाले” नतीजों की चेतावनी दे रहा है.

कोरोना महामारी के कारण दुनिया की करीब आधी आबादी लॉकडाउन झेल रही है और तमाम फैक्ट्रियों में काम काज ठप पड़ा है. विश्व में गर्भनिरोधक उत्पादों के सबसे बड़े निर्माता ने चिंता जताई है कि सप्लाई चेन भंग होने से कंडोम प्रोडक्शन पर भी बुरा असर पड़ने का खतरा है.

विश्व में रबड़ का सबसे बड़ा उत्पादक देश मलेशिया है जो कि कंडोम के निर्माण के लिए सबसे अहम कच्चा माल होता है. मार्च से ही लॉकडाउन लागू होने के कारण मलेशिया से इस कच्चे माल की आपूर्ति में दिक्कतें पेश आ रही हैं. बाकी सरकारों की तरह ही यहां भी केवल अतिआवश्यक सेवाओं को ही जारी रखने की अनुमति है जिसमें रबड़ का काम शामिल नहीं है.

गर्भनिरोधक प्रोडक्ट बनाने वाली बड़ी मलेशियाई कंपनी कारेक्स का कामकाज इस रोक के चलते काफी प्रभावित हुआ है. दुनिया के हर पांच में से एक कंडोम यही कंपनी बनाती है. कंपनी का अनुमान है कि मार्च के मध्य से अप्रैल के मध्य तक की रोक के कारण वह पिछले साल के सामान्य उत्पादन के मुकाबले 20 करोड़ कंडोम कम बना पाएगी.

कारेक्स के सीईओ गो मिया कियाट मानते हैं कि विश्व की दूसरी कंडोम निर्माता कंपनियां भी आपूर्ति का संकट और ट्रांसपोर्ट की समस्या झेल रही हैं जिससे बाजार में कंडोम की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ेगा. कियाट ने एएफपी से बातचीत में कहा, "दुनिया कंडोम की कमी जरूर झेलने वाली है.” विकासशील देशों को लेकर खास चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि "यह एक बहुत बड़ी चिंता है क्योंकि कंडोम एक आवश्यक मेडिकल डिवाइस है.”

कारेक्स तमाम कंपनियों लिए कंडोम बनाने के अलावा, इसकी आपूर्ति कई सरकारों और सहायता कार्यक्रमों द्वारा बांटे जाने के लिए भी करती है. मलेशिया में लॉकडाउन शुरु होते ही कंपनी को देश में स्थित अपनी तीन फैक्ट्रियां भी अस्थाई तौर पर बंद करनी पड़ीं. कुछ दिन बाद इन्हें आंशिक तौर पर कामकाज शुरू करने की अनुमति मिली लेकिन केवल आधे कर्मचारियों के साथ.

दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी एजेंसी ने भी कंडोमों की कमी को लेकर चिंताएं जताई हैं. यूएन पॉपुलेशन फंड ने बताया है कि कोरोना के कारण प्रभावित से उन्हें पहले के मुकाबले केवल 50 से 60 फीसदी कंडोम ही मिल पा रहे हैं. परिवार नियोजन पर विश्व की कई सरकारों के साथ काम करने वाली एजेंसी का कहना है कि इस कमी का सबसे बुरा असर सबसे गरीब और कमजोर समुदायों पर पड़ेगा.प्रवक्ता ने कहा, "कंडोम या किसी भी अन्य गर्भनिरोधक की कमी से अनचाही प्रेगनेंसी में बढ़ोत्तरी होगी और इसके कारण किशोरियों, महिलाओं, उनके पार्टनरों और परिवारों पर तमाम तरह के सामाजिक दुष्प्रभाव दिख सकते हैं."

एजेंसी ने कहा कि इसके असुरक्षित गर्भपात, एड्स और संक्रामक यौन बीमारियों के बढ़ने का खतरा भी बढ़ सकता है. दूसरे, घरों में बंद रहने को मजबूर लोगों में कंडोम की मांग भी काफी बढ़ गई है. भारतीय मीडिया में खबरें आई हैं कि देशव्यापी तालाबंदी लागू होने के पहले हफ्ते में ही कंडोम की मांग में 25 से 35 फीसदी उछाल दर्ज हुआ.

आरपी/ओएसजे (एएफपी)

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