″वाजपेयी साहब″ को याद करता पाकिस्तान | दुनिया | DW | 17.08.2018
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दुनिया

"वाजपेयी साहब" को याद करता पाकिस्तान

पाकिस्तान की मुख्य राजनीतिक पार्टियों के नेताओं और पत्रकारों ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धाजंलि दी है. सीमा पार की ज्यादातर हस्तियों ने इस लम्हे को "एक महानायक की विदाई" कहा है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने जा रहे इमरान खान ने वाजपेयी को श्रद्धाजंलि देते हुए कहा, "उपमहाद्वीप की इतनी ऊंची राजनीतिक शख्सियत को खोने का बहुत गहरा दुख है. शोक की इस घड़ी में वह भारत का दुख साझा करते हैं." इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने भी शोक संदेश जारी करते हुए कहा, "वाजपेयी के निधन ने दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा शून्य बन गया है."

पत्रकारिता से राजनीति में आए पाकिस्तानी सांसद मुशाहिद हुसैन सैयद ने वाजपेयी की तस्वीर साझा करते हुए दो ट्वीट किए, जिनमें उन्होंने लिखा, "भारत के सबसे बड़े महानायक का जाना एक बड़ी अपूर्णीय क्षति है. दूसरे भारतीय नेताओं ने शांति की सिर्फ बात की, लेकिन वाजपेयी के पास बातचीत आगे बढ़ाने का नजरिया, इच्छाशक्ति और नैतिक साहस था. 1998 में परमाणु परीक्षणों के बाद वह जान चुके थे कि पाकिस्तान और भारत को जमीन हकीकत को ध्यान में रखते हुए नई शुरुआत करनी होगी, उन्होंने मीनार ए पाकिस्तान में श्रद्धाजंलि भी अर्पित की."

पाकिस्तान के मशहूर टीवी पत्रकार आमिर मतीन ने ट्वीट में लिखा, "अटल बिहारी वाजपेयी: एक महानायक का निधन. वह सबसे ऊंचे प्रधानमंत्रियों में से एक हैं. उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की पुरजोर कोशिशें कीं लेकिन हमने उन्हें नाकाम कर दिया."

पाकिस्तानी स्तंभकार और लेखिकार मेहर तरार ने कहा, "आपकी आत्मा को शांति मिले, वाजपेयी साहब. वह भारतीय प्रधानमंत्री जो दोस्ती का संदेश लेकर सदा-ए-सरहद बस के साथ लाहौर आए, जिन्होंने भारत और पाकिस्तान को खूनखराबे वाले इतिहास के पार ले जाकर दोस्त बनाने का ख्वाब देखा."

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के प्रमुख शहबाज शरीफ ने ट्वीट में लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन, भारत ने इलाके में शांति के लिए सेवाएं देने वाला एक नेता खो दिया है, उन्हें लंबे वक्त तक याद किया जाएगा. उन्होंने और नवाज शरीफ ने 1999 में दोनों पड़ोसी देशों की बीच शांति की बहुत संजीदा कोशिश की थी. आशा है कि भारत उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए शांति को एक मौका और देगा."

अटल बिहारी वाजपेयी को लोकप्रियता पाकिस्तान में भी कम नहीं. पाकिस्तान के ज्यादातर राजनेता और लोग मानते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की पहल जितनी शिद्दत से वाजपेयी ने की, वह किसी और नेता ने नहीं की. 1999 में वाजपेयी के कार्यकाल में दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू हुई. भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया. दोनों देशों के लोग आसानी से सीमा पार कर एक दूसरे को जान सके.

लेकिन यह भी सच है कि वाजपेयी की इन कोशिशों को पाकिस्तान ने उतनी गंभीरता से कभी नहीं लिया. दिल्ली-लाहौर बस सेवा और कश्मीर बस सेवा के बदले वाजपेयी को कारगिल मिला. उन्होंने कंधार विमान अपहण कांड और संसद पर हमला देखा. दोनों देशों की राजनीति को करीब देखने वाले जानकार दावा करते हैं कि वाजपेयी भारत-पाकिस्तान विवाद को सुझलाने के बहुत करीब थे, लेकिन उनकी कोशिशें कभी उन्हीं की पार्टी के कुछ नेताओं को नागवार गुजरीं तो कभी पाकिस्तानी सेना को.

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