वाईफाई से नहीं प्रकाश से इंटरनेट | विज्ञान | DW | 26.02.2016
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विज्ञान

वाईफाई से नहीं प्रकाश से इंटरनेट

इस तकनीक में स्मार्टफोन या लैपटॉप को इंटरनेट से जोड़ने का काम वाईफाई नहीं बल्कि लैंप से लिया जाता है. "लाईफाई" तकनीक से मिलने वाले इंटरनेट कनेक्शन का 100 गुना ज्यादा तेज होने का दावा किया जा रहा है.

फ्रांसीसी स्टार्टअप कंपनी ओलेडकॉम ने इस तकनीक का प्रदर्शन बार्सिलोना में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल मेले मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में किया. जैसे ही स्मार्टफोन को लैंप के नीचे रखकर उसमें वीडियो चलाया गया, वीडियो निर्भाध रूप से चलने लगा. इस तकनीक की सबसे खास बात है इसकी रफ्तार. प्रयोगशाला में हुए टेस्ट में इसकी स्पीड 200 जीबीपीएस से ज्यादा पाई गई. ओलेडकॉम के संस्थापक और प्रमुख सुआत टोप्सु के मुताबिक यह इतनी स्पीड है जिससे 23 डीवीडी एक सेकेंड के अंदर डाउनलोड की जा सकती हैं.

यह तकनीक एलईडी बल्ब से उत्पन्न हुई आवृत्ति का इस्तेमाल करती है. हवा के जरिए इंफॉर्मेशन छोड़ने के लिए एक सेकेंड में हजारों बार फ्लिकर उत्पन्न होता है.

फ्रांस में 2015 में लैब में लाईफाई के टेस्ट पूरे हुए और अब इसे शॉपिंग मॉल और संग्रहालयों जैसे ठिकानों पर आजमाया जा रहा है. इसके टेस्ट बेल्जियम, एस्टोनिया और भारत में भी किए गए हैं.

डच कंपनी फिलिप्स भी इसमें रुचि ले रही है. साथ ही खबरें हैं कि एप्पल भी अपने नए स्मार्टफोन आईफोन-7 में इस तकनीक को शामिल कर सकता है. आईफोन-7 2016 के अंत में बाजार में आएगा.

वाईफाई का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि 2020 तक वाईफाई से जुड़े उपकरणों की संख्या करीब 5 करोड़ होगी. प्रचारक ऐसे में लाईफाई के व्यवहार्य साबित होने की उम्मीद जता रहे हैं. टोप्सु ने कहा, "हम अपनी कॉफी मशीन, वॉशिंग मशीन और टूथब्रश को भी जोड़ने जा रहे हैं. लेकिन आप 10 से ज्यादा उपकरणों को ब्लूटूथ या वाईफाई से एक साथ कनेक्ट नहीं कर सकते हैं." एस्टोनियाई कंपनी वेलमेनी के संस्थापक दीपक सोलंकी ने लाईफाई का औद्योगिक इलाके में टेस्ट किया. उन्होंने कहा, "दो साल बाद तकनीक व्यावसायिक होगी और लोग इसके इस्तेमाल का अलग ही स्तर देखेंगे."

विश्लेषकों का मानना है कि अभी भी यह कहना मुश्किल है कि लाईफाई नया वाईफाई बनकर सामने आएगा. तकनीकी विश्लेषक फ्रेडेरिक साराट मानते हैं कि यह "अभी भी प्रयोगशाला की तकनीक है." आईटी रिसर्च कंपनी गार्टनर के प्रमुख जिम टली के मुताबिक बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि वाईफाई आगे आने वाले सालों में किस रूप में विकसित होता है. उन्होंने कहा, "वाईफाई ने लगातार अपनी संचार स्पीड की क्षमता में तकनीक की हर नई पीढ़ी के साथ बढ़ोत्तरी दिखाई है."

कुछ कमियां भी

लाईफाई की कुछ अपनी कमियां भी हैं. इससे जुड़ा उपकरण तभी इंटरनेट से जुड़ सकता है जब वह प्रकाश के ठीक नीचे हो. इससे मिलने वाला इंटरनेट दीवार के पार नहीं जा सकता. ना ही इसे इस्तेमाल करने वाला उपकरण के साथ घूम फिर सकता है. इसका डाटा सीमित इलाके में ही इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि इससे डाटा की चोरी से बचने में मदद मिलेगी.

लाईफाई के समर्थकों का कहना है कि कई ऐसे इलाके जैसे स्कूल और अस्पताल जहां वाईफाई नहीं होता है, उन जगहों पर यह बेहतरीन साबित होगा. अस्पतालों में लाईफाई का इस्तेमाल इसलिए बेहतर है क्योंकि यह मेडिकल सामग्री के इस्तेमाल में किसी तरह का विघ्न नहीं पैदा करेगा.

एसएफ/आईबी (एएफपी)

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