वर्ल्ड वाइड वेब के तीसवें जन्मदिन पर उसके जनक कितने खुश हैं? | विज्ञान | DW | 12.03.2019
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विज्ञान

वर्ल्ड वाइड वेब के तीसवें जन्मदिन पर उसके जनक कितने खुश हैं?

वर्ल्ड वाइड वेब के जनक को पता था कि उनकी खोज दुनिया में छा जाएगी लेकिन फिलहाल जो हो रहा है वह उन्हें पसंद नहीं आ रहा. इंटरनेट संपर्क तो जोड़ रहा है लेकिन इसके नतीजे में कुछ ऐसा भी है जो बनाने वालों को परेशान कर रहा है.

30 साल पहले इंटरनेट की मौजूदा रूपरेखा बनाने वाले टिम बर्नर्स ली मानते हैं कि डिजिटल दुनिया वर्तमान में सरकार समर्थित हैकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, भड़काऊ भाषण और गलत जानकारी का बड़ा केंद्र बन गई है. 

टिम बर्नर्स ली ने इंटरनेट यानी वर्ल्ड वाइड वेब(डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू) की तीसवीं सालगिरह पर भावनात्मक अपील का पत्र जारी किया है और सोमवार को कुछ पत्रकारों से बात की. 30 साल पहले 11 मार्च को उन्होंने वेब की रूपरेखा बताते हुए अपना पहला पेपर जारी किया था. आज की दुनिया को बदलने वाले वर्ल्ड वाइड वेब की शुरूआत यहीं से मानी जाती है.

यूरोपीयन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च जिसे सर्न भी कहा जाता है उसने मंगलवार को बर्नर्स ली और वेब की दुनिया को चाहने वाले कुछ दूसरे लोगों के साथ इस मौके का जश्न मनाने की तैयारी की है. हालांकि ली का कहना है, "हम उत्सव मना रहे हैं लेकिन हमें बेहद चिंता भी है."

बीते साल के आखिर में इंटरनेट की दुनिया ने एक और ऊंचाई को छुआ. तकरीबन आधी दुनिया अब ऑनलाइन है. वर्तमान में करीब दो अरब वेबसाइटें चल रही हैं. बर्नर्स ली का कहना है, "सालगिरह का मौका पर यह सोचना चाहिए कि हम कितनी दूर और जा सकते हैं. हमारे वक्त की सबसे बड़ी चिंता यही है." ली को यकीन है कि ऑनलाइन आबादी का बढ़ना अभी जारी रहेगा लेकिन इंटरनेट की सुलभता का मुद्दा दुनिया को आशंकित रखेगा. ली का कहना है, "आप उन 50 फीसदी लोगों को देखिए जिनके पास इंटरनेट है, और यह उनके लिए बहुत अच्छा नहीं है. सभी लोग डर कर पीछे हट रहे हैं, ट्रंप और ब्रेक्जिट के चुनाव ने यह महसूस कराया है कि यह वेब जिसे अच्छा माना गया था यह वह मानवता के लिए वास्तव में उतना अच्छा साबित नहीं हो रहा."

युवा सॉफ्टवेयर इंजीनयर के रूप में बर्नर्स ली ने हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (एचटीटीपी) का विचार दिया था. एचटीटीपी और इंटरनेट के लिए दूसरी बुनियादी चीजों को ली ने सर्न में काम करते हुए 1989 में तैयार किया. कुछ लोग इंटरनेट की असल शुरूआत 1990 को भी मानते हैं जब उन्होंने पहला वेब ब्राउजर लॉन्च किया था. बर्नर्स याद दिलाते हैं कि कैसे वह कंप्युटरों की आपस में बातचीत कराने के लिए बेचैन थे.

मौजूदा वक्त में उनकी वर्ल्ड वाइड वेब फाउंडेशन की उम्मीदें सरकारों, कंपनियों और नागरिकों को वेब के लिए अच्छे सिद्धांत तैयार करने पर टिकी हैं. इन सिद्धांतों का ब्यौरा उनके "कॉन्ट्रैक्ट फॉर वेब" में है.

इस कॉन्ट्रैक्ट की कुछ प्रमुख बातों में सरकारों से उम्मीद की गई है कि वह हर नागरिक के लिए इंटरनेट से जुड़ना तय करेंगे और साथ ही इसमें लोगों की निजता का भी ख्याल रखेंगे. कंपनियों से इंटरनेट को किफायती बनाने, निजता का सम्मान करने और ऐसी तकनीक विकसित करने की उम्मीद है जो लोगों को आगे रखें और "सार्वजनिक" हित में हों.

बर्नर्स ली का कहना है कि कुछ सख्त नियम कुछ जगहों पर जरूरी हो सकते हैं और कुछ जगहों पर नहीं. नेट न्यूट्रलिटी के मामले पर जरूर उनका रुख साफ है कि इंटरनेट कनेक्शन वाले हर शख्स की पहुंच वीडियो, म्यूजिक, ईमेल, फोटो, सोशल नेटवर्क, मैप और दूसरे ऑनलाइन मटीरियल तक एक समान होनी चाहिए. 

बर्नर्स ली मानते हैं कि वेब ने एक मौका बनाया है, लोगों की जिंदगी आसान की है और वंचितों को आवाज दी है लेकिन, "इसने घोटालेबाजों के लिए भी मौका बनाया है, नफरत फैलाने वालों को भी आवाज दी है और हर तरह के अपराध करना आसान बनाया है."

एनआर/एए (एएफपी)

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