लीबिया के युद्ध में शामिल देशों को जर्मनी ने बेचे करोड़ों के हथियार | दुनिया | DW | 18.05.2020
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दुनिया

लीबिया के युद्ध में शामिल देशों को जर्मनी ने बेचे करोड़ों के हथियार

रोक के बावजूद जर्मनी ने उन देशों को करोड़ों यूरो के हथियार बेचे हैं जो लीबिया के युद्ध में शामिल हैं. जब से खलीफा हफ्तार की सेनाओं ने त्रिपोली पर कब्जा किया है, तब से लीबिया में युद्ध तेज हो गया है.

चार महीने पहले लीबिया शिखर वार्ता की मेजबानी करने के बाद से जर्मन सरकार ने 33.1 करोड़ यूरो के हथियार बेचने की अनुमति दी है. ये हथियार उन देशों को बेचे जा रहे हैं जो लीबिया के युद्ध में शामिल अलग अलग पक्षों का समर्थन कर रहे हैं. जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए ने यह खबर अर्थनीति मंत्रालय की एक रिपोर्ट को देखने के बाद दी है.

मंत्रालय के अनुसार 30.8 करोड़ यूरो के हथियार अकेले मिस्र को बेचे गए हैं. यह जानकारी वामपंथी पार्टी डी लिंके की तरफ से किए गए आवेदन के जवाब में जारी की गई है. डीपीए की रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी ने तुर्की को 1.51 करोड़ यूरो और संयुक्त अरब अमीरात को 77 लाख यूरो के हथियार बेचने की भी मंजूरी दी है.

लीबिया में प्रभाव की कोशिश

तुर्की लीबिया में संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली राष्ट्रीय सहमति वाली सरकार की हिमायत करता है वहीं रूस, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात प्रतिद्वंद्वी गुट जनरल खलीफा हफ्तार के बलों का समर्थन करते हैं. लीबिया में 2011 में पश्चिमी देशों से समर्थन से तानाशाह मुआम्मर गद्दाफी को हटाया गया था. तभी से ये उत्तरी अफ्रीकी अरब देश गृहयुद्ध का शिकार है. तेल संसाधनों से मालामाल लीबिया में अलग अलग गुट सत्ता पर नियंत्रण के लिए लड़ रहे हैं.

Libyen General Khalifa Haftar (Reuters/C. Balta)

लीबिया के विद्रोही जनरल हफ्तार

जर्मनी ने इस साल जनवरी में उन देशों का शिखर सम्मेलन बुलाया था जिन्होंने लीबिया में लड़ने के लिए अपने सैनिक भेजे हैं या फिर वहां हथियारों की आपूर्ति की है. शिखर बैठक के बाद 16 देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस बात पर सहमत हुए कि लीबिया में हथियार भेजे जाने पर रोक लगाई जाए. मिस्र, तुर्की, रूस और संयुक्त अरब अमीरात ने भी इस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. बाद में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इस चारों देशों पर हथियारों पर लगाई रोक का उल्लंघन करने और लीबिया में हथियार भेजने का आरोप लगाया.

संयुक्त राष्ट्र की निराशा

अंटोनियो गुटेरेश ने फरवरी में एक प्रेस कांफ्रेस में कहा था, "लीबिया में जो कुछ हो रहा है, उसे लेकर मैं बहुत हताश हूं. उन्होंने लीबिया की प्रक्रिया में हस्तक्षेप ना करने की वचनबद्धता जताई थी और वहां हथियार ना भेजने और किसी भी तरह से लड़ाई में हिस्सा ना लेने का वादा किया था. सच्चाई यह है कि सुरक्षा परिषद की (हथियारों) रोक का उल्लंघन हो रहा है." जर्मनी ने भी हथियारों पर रोक का समर्थन किया था.

बीते अप्रैल से हफ्तार की सेनाओं ने राजधानी त्रिपोली पर कब्जा कर लिया और वहां संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली राष्ट्रीय सहमति सरकार को बेदखल कर दिया. उसके बाद से लीबिया में गृहयुद्ध तेज हो गया. कोरोना वायरस को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्षविराम की अपीलों के बावजूद वहां हाल के हफ्तों में हिंसा बढ़ी है. 

रिपोर्ट: क्रिस्टी प्लादसन

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