लिथुआनिया के लिए यूरो सुरक्षा की गारंटी | दुनिया | DW | 03.01.2015
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दुनिया

लिथुआनिया के लिए यूरो सुरक्षा की गारंटी

नए साल में प्रवेश के साथ ही लिथुआनिया यूरो अपनाने वाला अंतिम बाल्टिक देश बन गया. हालांकि महंगाई और यूरोजोन में कर्ज के संकट के खतरे अपनी जगह हैं लेकिन प्रधानमंत्री यूरोजोन में प्रवेश को सुरक्षा की गारंटी बता रहे हैं.

नए साल में प्रधानमंत्री अलगिरदास बुटकेविचुस ने एटीएम मशीन से पहला 10 यूरो का नोट निकाला. इसके साथ ही लिथुआनिया यूरो को अपनाने वाला 19वां देश बन गया. कार्यक्रम में शामिल हुए इस्टोनिया और लातविया के अधिकारियों की मौजूदगी में बुटकेविचुस ने कहा, "यूरो हमारी आर्थिक और राजनीतिक सुरक्षा की गारंटी के तौर पर काम करेगा." इस्टोनिया और लातविया 2011 और 2014 में यूरोजोन के सदस्य बने. लिथुआनिया के केंद्रीय बैंक के गवर्नर वीटास वासिलाउस्कल ने बताया, "पुरानी मुद्रा से नई मुद्रा पर जाना आसान और सफल रहा."

मुद्रा से जान पहचान

लोगों के मुताबिक नए साल में जब दोबारा दुकानें खुलीं तो उन्हें पैसे चुकाने से पहले थोड़ी देर सोचना पड़ रहा था कि किसी चीज की कीमत यूरो में कितनी है और लिटाज में कितनी. 32 साल के कास्टीटिस बाकिस कहते हैं, "हर चीज सस्ती लग रही है." कानूनी तौर पर दो हफ्ते तक दोनों मुद्राओं का इस्तेमाल होगा. जून तक चीजों पर दोनों मुद्राओं में दाम लिखे होंगे.

यूरोपीय संघ के आर्थिक मामलों के कमिश्नर पियर मोस्कोविसी ने कहा, "यूरो को अपनाकर लिथुआनिया के लोग स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के क्षेत्र का हिस्सा बन रहे हैं." लेकिन देश के सभी लोग यूरो के समर्थक नहीं है. नवंबर में केंद्रीय बैंक के एक सर्वे के मुताबिक 30 लाख की आबादी वाले देश में यूरो का समर्थन 53 फीसदी लोगों ने किया जबकि 39 फीसदी ने इसका विरोध किया. पचास साल से ज्यादा उम्र वाली वीडा जुर्जीन कहती हैं कि वह कुछ लिटाज अपने नाती पोतों को दिखाने के लिए रखेंगी.

कर्ज की तलवार

लिथुआनिया ने उस समय यूरो को अपनाया है जब ग्रीस की आर्थिक अस्थिरता एक बार फिर यूरोजोन में कर्ज के संकट को हवा दे रही है. लिथुआनिया पहले ही यूरोजोन के संघर्षरत सदस्यों के लिए राहत कोष में लाखों यूरो देने की हामी भर चुका है. आर्थिक मामलों के जानकार वाल्देमरास काटकुस कहते हैं, "आर्थिक जिम्मेदारी बहुत बड़ा बोझ होता है और देश के कर्ज को बढ़ाता है. मेरे ख्याल में हमें थोड़ी देर से शामिल होना चाहिए था."

असल में लिथुआनिया 2007 में ही यूरो को अपना लेना चाहता था लेकिन मुद्रा स्फीति के मानकों पर खरा न उतर सकने के कारण ऐसा न हो सका. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकट के चलते 2009 में भी बात रुकी रही जब लिथुआनिया ने भारी मंदी का सामना किया. कई जानकारों का मानना है कि यूरोजोन में प्रवेश निर्यात के विकास और निवेश को बढ़ावा देगा. लिथुआनिया ने पूरे यूरोजोन में समान रूप से चलने वाले 13.2 करोड़ बैंक नोट जर्मनी के केंद्रीय बैंक से लिए हैं और सिक्के अपने यहां खुद ढाले हैं.

एसएफ/ओएसजे (एएफपी)


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