लिंडाऊ से मंथन का स्पेशल एडिशन | मंथन | DW | 09.07.2015
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मंथन

लिंडाऊ से मंथन का स्पेशल एडिशन

साइंस का खास शो मंथन इस बार हाजिर है जर्मनी के शहर लिंडाऊ से जहां हर साल नोबेल विजेताओं की मीटिंग होती है. साथ ही, खास मुलाकात नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से.

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लिंडाऊ से मंथन का स्पेशल एडिशन

लिंडाऊ लेक कॉन्सटांस पर बसा एक छोटा सा द्वीप है जो महज 33 वर्ग किलोमीटर में फैला है. इस साल 65वीं बार लिंडाऊ में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की बैठक हो रही है. बैठक की शुरुआत हुई चोटी के वैज्ञानिकों और युवा रिसर्चरों को साथ लाने के लिए, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए. इस बार 65 नोबेल विजेता और दुनिया भर के 650 युवा रिसर्चर यहां पहुंचे हैं. क्या क्या होता है इस मीटिंग में, कौन कौन आया है इस बार और पहली बार लिंडाऊ पहुंचे नोबेल पुरस्कार विजेता श्टेफान हेल के लिए कैसी है लिंडाऊ की मीटिंग, जानिए मंथन की खास रिपोर्ट में.

दुनिया भर से लिंडाऊ आए युवा रिसर्चरों में भारत के रिसर्चर भी बड़ी संख्या में हैं. कोई कैंसर पर रिसर्च कर रहा है, कोई नैनो टेक्नॉलॉजी पर, तो कोई भविष्य के लिए बेहतर दवाएं बनाने पर. लिंडाऊ कॉन्फ्रेंस इनके लिए एक मौका होता है अपने हीरो से मिलने का, उन लोगों के साथ बैठ कर बातें करने का, जिनके नाम वे किताबों में पढ़ते रहे हैं. जानिए, कैसे पहुंचते हैं युवा रिसर्चर इस कॉन्फरेंस में और कैसा है उनका उत्साह.

साथ ही मिलवाएंगे आपको भारत की एक ऐसी रिसर्चर से जिन्हें मिली है जर्मनी की प्रतिष्ठित चांसलर फेलोशिप. हर साल दुनिया भर से चुनिंदा लोगों को ही यह स्कॉलरशिप मिल पाती है. जानिए, कैसी होती है एक रिसर्च स्कॉलर की दिनचर्या.

कैलाश सत्यार्थी के साथ खास बातचीत

लिंडाऊ में दुनिया भर के नोबेल पुरस्कार विजेता तो पहुंचे ही लेकिन इस साल की हाइलाइट रहे नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित भारत के कैलाश सत्यार्थी. मंथन से खास बातचीत में उन्होंने शिक्षा में विज्ञान के महत्व और शिक्षा के अधिकार पर बात की. सत्यार्थी ने इस बात पर जोर दिया कि युवा रिसर्चर और नोबेल पुरस्कार विजेता दुनिया से अशिक्षा और बाल मजदूरी खत्म करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. नोबेल लॉरिएट मीटिंग्स में सत्यार्थी की आधे घंटे की स्पीच के बाद ना केवल पूरा हॉल तालियों की आवाज से गूंज उठा, बल्कि उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला.

कार्यक्रम के अंत में कराएंगे आपको खूबसूरत कॉन्सटांस की सैर. लेक कॉन्सटांस यूरोप के सबसे खूबसूरत इलाकों में से एक है. टूरिस्ट तो यहां आते ही हैं, साथ ही यहां आने वाले रिसर्चरों को भी आसपास का इलाका देखने का मौका मिलता है. इस जगह की खास बात यह है कि लेक कॉन्सटांस के एक तरफ जर्मनी है, दूसरी तरह ऑस्ट्रिया और तीसरी तरफ स्विट्जरलैंड. यानि एक जगह खड़े हो कर आप तीन देश देख सकते हैं. मंथन में इस जगह की एक झलक. देखना ना भूलें मंथन शनिवार सुबह 11 बजे डीडी नेशनल पर.

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